बस्ती। पढ़कर चौकिंए मतः वाकई दिव्यांशु खरे ‘पति रत्नाकर श्रीवास्तव और पत्नी’ उर्षा श्रीवास्तवा के ‘ठगी’ का शिकार  हो गए हैं, ठगी मामूली रकम की नहीं बल्कि एक करोड़ 90 लाख की हुई। वैसे मामला तो बहुत पहले से चल रहा था, लेकिन विधिक कार्रवाई अब हुई है। दोनों परिवार कभी एक दूसरे कि बिना खाना और नाष्ता नहीं करते थे, लेकिन इस बीच न जाने ऐसा क्या हुआ, कि जो परिवार एक दूसरे के बिना रह नहीं सकता, वही परिवार एक दूसरे के दुष्मन बन गए, और वह भी पैसे के लिए। इसी पति और पत्नी ने खरे परिवार के लोगों पर एसपी आवास के पास कार से कुचलने का आरोप लगाया था। इसी लिए बार-बार कहा जाता है, पैसा सबकुछ कराता है। यह पैसा दोस्त से दुष्मन बनाता हैं, जानी दुष्मन तक मना देता है। कहा भी जाता है, कि अगर अच्छे खासे रिष्ते को समाप्त करना हो तो पैसे को बीच में ला दीजिए, रिष्ता अपने आप समाप्त हो जाएगा। इसी पैसे के चलते मामा और भांजी का रिष्ता खराब हुआ। बहरहाल, लेन-देन में अगर ईमानदारी है, तो कोई कड़ुवाहट नहीं आती है, कड़ुवाहट तभी आती है, जब बेईमानी का समावेश होता है, अभी तक खरे परिवार पर न जाने कितने आरोप लगें, लेकिन अब इस परिवार ने पति-पत्नी पर ऐसा आरोप लगाया है, कि दोनों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

सीजेएम के आदेश पर दर्ज हुए मुकदमें कहा गया है, कि रत्नाकर श्रीवास्तव ने मकान बेचने के नाम पर एक करोड़ 90 लाख रुपये लिया और बाद में रजिस्ट्री से इनकार कर दिया। दिव्यांशु खरे के मुताबिक वह चित्रांश इंटरप्राइजेज फर्म के प्रोपराइटर हैं, और व्यवसाय के सिलसिले में उनकी रत्नाकर श्रीवास्तव से मित्रता हुई थी। दोनों के बीच वर्ष 2021 से ऑनलाइन रुपये का लेनदेन भी होता रहा। इसी बीच व्यावसायिक संबंध के चलते दिव्यांशु खरे का रत्नाकर और उनकी पत्नी पर भरोसा बढ़ गया। कहा कि रत्नाकर श्रीवास्तव ने अपना दो मंजिला मकान बेचने की पेशकश की और जिसकी कीमत 2.50 करोड़ रुपये तय हुई। अगस्त 2025 में बैनामा करने की बात कही गई। इस दौरान अनुभव श्रीवास्तव और सूरज श्रीवास्तव के मौजूद रहने का भी दावा किया गया है। पीड़ित के अनुसार मकान के स्वामित्व से संबंधित नगर पालिका का एसेसमेंट प्रपत्र भी दिखाया गया, जिसमें रत्नाकर श्रीवास्तव का नाम दर्ज बताया गया। कहा कि एसेसमेंट प्रपत्र पर भरोसा करते हुए पीड़ित और उसके चाचा के बैंक खातों से अलग-अलग किस्तों में 15 जुलाई 2025 तक कुल एक करोड़ 90 लाख रुपये रत्नाकर श्रीवास्तव और उनकी पत्नी के बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए। इसके बाद मकान की रजिस्ट्री करने में टालमटोल शुरू हो गई। पीड़ित का कहना है कि संदेह होने पर नगर पालिका परिषद से दस्तावेज की तस्दीक कराई गई। इसमें कथित तौर पर मकान रत्नाकर श्रीवास्तव की मां कृष्ण मोहनी के नाम दर्ज मिला। इसके बाद पीड़ित ने आरोपियों से रकम वापस करने की मांग की, लेकिन रकम वापस नहीं की गई। नौ नवंबर 2025 को शाम करीब छह बजे पीड़ित अपने मित्र अनुभव श्रीवास्तव और सूरज श्रीवास्तव के साथ आरोपियों के घर गया। वहां रकम वापस मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने लगे। इसकी शिकायत कोतवाली पुलिस और पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों को प्रार्थना पत्र के जरिए की गई। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 10 मार्च 2026 को पुलिस अधीक्षक को रजिस्ट्री के जरिए भी शिकायत भेजी गई। कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बस्ती ने 17 अगस्त 2026 को धारा 173 (4) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष कोतवाली को मामले में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना कराने और सात दिन के भीतर न्यायालय को कार्रवाई से अवगत कराने का आदेश दिया। पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद मामले में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। शिकायत में आरोपियों पर कूटरचित दस्तावेज के जरिए विश्वास कायम कर धोखाधड़ी से रकम हासिल करने और उसे हड़पने की बात कही गई।