बस्ती। भ्रष्टाचार के खिलाफ निरंतर आवाज उठाने वालें चंद्रेश प्रताप सिंह ने सरकार से सवाल किया हॅै, कि क्यों सांसदों को सस्ते दर पर फाइव स्टार वाला भोजन, नाष्ता, चाय और काफी मिल रहा है? क्यों नहीं यही सुविधा गरीबों को मिल रहा है? क्या सरकार की निगाह में गरीबों की कोई अहमियत नहीं? क्यों गरीबों के हक पर डाका डाला जा रहा?कहते हैं, कि सस्ती दरों पर 5-स्टार भोजन बंद हो’ देश की सबसे सस्ती जगह कोई बाजार नहीं, बल्कि भारत का संसद भवन है, जहां देश के सबसे अमीर और सबसे सुविधाभोगी लोग सबसे सस्ता खाना खाते हैं। कहते हैं, कि संसद कैंटीन में वर्षों तक जो दरें चलती रहीं, वो आम आदमी के लिए एक मजाक हैं।

’वर्ष 2021 के बाद संशोधित दरें भी शर्मनाक रूप से कम रोटी 3, थाली 100, चिकन बिरयानी 100, चिकन करी 75, मटन करी 125, चाय 5, कॉफी 10 जबकि बाजार में इसी क्वालिटी का भोजन 5-स्टार होटल के रेट पर मिलता है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लाखों रुपये वेतन, भत्ते, बीसों गाड़ियों के काफिले, पुलिस सुरक्षा और तमाम लग्जरी सुविधाएं लेने वाले माननीय सांसदों को यह सब्सिडी दी जा रही है, जबकि 200-300 दिहाड़ी कमाने वाला मजदूर 10 की चाय पीने से पहले 10 बार सोचता है। ’हमारी मांगें संसद कैंटीन की सब्सिडी तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए और दरें बाजार भाव के अनुसार तय की जाएं। यदि सरकार सस्ता भोजन दे ही सकती है, तो ऐसी ही कैंटीन मॉडल पर हर 10 किलोमीटर पर आम जनता के लिए खोली जाए, ताकि 5 किलो फ्री राशन की लाइन खत्म हो और सम्मान के साथ सस्ता भोजन मिल सके। यह कोई खाने-पीने की वस्तु नहीं, बल्कि गरीब जनता के खून-पसीने की कमाई है, जिसका बोझ आम टैक्सपेयर पर पड़ता है। हम सभी सज्जन और ईमानदार जनप्रतिनिधियों से अपील करते हैं कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएं।