UGC सत्ता के गलियारों में रची गई एक खतरनाक और विभाजनकारी साज़िश
राजेश शुक्ल।
UGC से जुड़ा यह कानून कोई साधारण नीति नहीं है, बल्कि सत्ता के गलियारों में रची गई एक खतरनाक और विभाजनकारी साज़िश है। यह कानून सीधे-सीधे सामान्य वर्ग के अधिकारों का गला घोंटता है। और साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को राजनीतिक रूप से फँसाने का हथियार बनता दिख रहा है।
सबसे बड़ा और शर्मनाक विरोधाभास यह है कि एक तरफ़ मंचों से चिल्ला-चिल्लाकर कहा जाता है —हम सब “हिंदू एक है”,और दूसरी तरफ़ सरकार की नीतियाँ हिंदू को ही हिंदू से लड़ाने का काम कर रही हैं।
यह कैसी राजनीति है?
यह कैसी विचारधारा है?
यह वह राजनीति है जो जातिवाद को खुद बढावा देते हुए पूरे समाज में ज़हर घोलने का काम हुआ। समाज को तोड़कर सिर्फ़ सत्ता बचाने का खेल खेल चल रहा है। भाजपा के भीतर बैठे कुछ वरिष्ठ, अहंकारी और सत्ता-डरे हुए लोग नहीं चाहते कि योगी आदित्यनाथ राष्ट्रीय राजनीति में और मज़बूत बनकर उभरें। इसलिए योजनाबद्ध तरीके से ऐसे कानून लाए जा रहे हैं, जिनसे सामान्य वर्ग को उकसाया जाए सामाजिक तनाव पैदा किया जाए
और यूपी सरकार को जनविरोधी साबित किया जाए
यह न नीति है, न सुधार — यह राजनीतिक कायरता है।
आज हालात यह हैं कि योग्यता अपराध बन गई है, मेहनत की कोई कीमत नहीं रहा।
लोगों का भविष्य अब जाति के प्रमाण-पत्र से तय किया जा रहा है।
यह रास्ता राष्ट्र को मज़बूत नहीं करता बल्कि
समाज को अंदर से खोखला कर रहा है।
इतना ही नहीं, इतिहास हमें चेतावनी भी देता है। रावण को यही घमंड था कि
“एक बंदर मेरा क्या बिगाड़ लेगा?जिसका परिणाम यह हुआ कि पूरी लंका जलकर स्वाहा हो गई और वहीं से उसके पतन की शुरुआत हुई।
आज भी वही अहंकार दोहराया जा रहा है।
यह समझा जा रहा है कि जनता की आवाज़ में सामान्य वर्ग का आक्रोश कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।
लेकिन इतिहास गवाह है अहंकार का अंत निश्चित है।
अगर आज इस कानून के खिलाफ़ खुलकर, डटकर और एकजुट होकर विरोध नहीं हुआ,
तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें सिर्फ़ दोष हीं नहीं देंगी अपितु वे कहेंगी कि हमने अन्याय को चुपचाप स्वीकार किया। समाज टूटते हुए देखा और अपने बच्चों का भविष्य राजनीति की भूख के हवाले कर दिया।
यह लेख किसी जाति या वर्ग विशेष के खिलाफ़ नहीं है।
यह लेख जातिवादिता को बढ़ावा देने,समाज को बाँटने की साज़िश करने, योग्यता का हनन करने, न्याय, समान अवसर न पाने के खिलाफ है।
हिंदू एकता भाषणों से नहीं बल्कि सामाजिक समरसता,एकता, न्याय व समभाव से होगा।
“ हम सब हिंदू एक है” का नारा देकर आज
हिंदूओं को ही हिंदूओं से आपस में लड़ाया जा रहा है।
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