एसडीएम को थप्पड़ जड़ने वाले वकील साहब का सीना हुआ चौड़ा
-एसडीएम को थप्पड़ जड़ने वाले बार एसोसिएशन के पूर्व तहसील अध्यक्ष महिनाथ तिवारी को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी
-हर्रैया के अधिवक्ताओं को नहीं हो रहा वादकारियों के दर्द का एहसास
-वादकारियों के अपील के बाद भी वापस नहीं लिया कार्यबहिष्कार
-यह कैसी तहसील है, जहां पर आठ माह में सिर्फ 10-12 दिन कोर्ट चला
-कार्यबहिष्कार से किसको लाभ होगा यह नहीं बता पा रहे अधिवक्तागण
बस्ती। एसडीएम हर्रैया मनोज प्रकाश को तहसील में ही थप्पड़ जड़ने वाले बार एसोसिएशन के पूर्व तहसील अध्यक्ष महिनाथ तिवारी को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जिससे वकील साहब का सीना चौड़ा हो गया। ’अधिवक्ता के.एल.तिवारी’ की दलील सुनने के बाद ’न्यायमूर्ति सिद्धार्थ’ व ’न्यायमूर्ति हरवीर सिंह’ की बेंच ने महिनाथ तिवारी के गिरफ्तारी एंव दंडात्मक कार्यवाही करने पर रोक लगा दिया है। वादकारियों को लगा था, कि इसके बाद अधिवक्तागण कार्यबहिष्कार का वापस ले लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं किया बल्कि तीन दिन के लिए कार्यबहिष्कार का बढ़ा दिया, अब मंगलवार की बैठक में यह निर्णय होगा कि कार्यबहिष्कार समाप्त किया जाए या फिर आगे जारी रखा जाए। अधिवक्तागण यह जानते हुए कि उनकी मांग पूरी नहीं हो सकती, लेकिन आज भी अपनी मांग पर अड़े हुए है, और कह रहे हैं, कि जब तक मुकदमा वापस नहीं लिया जाएगा या फाइनल रिपोर्ट नहीं लग जाएगा तब तक कार्यबहिष्कार जारी रहेगा। कार्यबहिष्कार करने वाले वादकारियों को यह नहीं बता पा रहे हैं, कि इससे किसका लाभ हो रहा है। ऐसा लगता है, कि हर्रैया के अधिवक्ताओं को वादकारियों के दर्द का एहसास नहीं हो रहा है। यह कैसा तहसील है, जहां पर आठ माह में सिर्फ 10-12 दिन ही कोर्ट चला हो। क्या अधिवक्ताओं की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह वादकारियों का हित देखे। जिन वादकारियों के कारण न जाने कितने परिवार का भरण-पोषण होता हैं, अगर उन्हीं वादकारियों का दर्द वकीन साहब नहीं सुनेगें तो फिर सुनेगा कौन? न जाने क्यों हर्रैया के अधिवक्तागण इतनी सी बात समझ में नहीं आती कि वादकारियों के हित में ही उनका हित छिपा हुआ है। जिस तरह बच्चों की तरह जिद्व कर रहे हैं, उससे लगता है, कि इन्हें वादकारियों की परेशानी और समस्याओं से कोई लेना देना नहीं।
अधिवक्ता के बीच बीते कुछ दिनों एसडीएम को थप्पड़ जड़ने के मामले में ’एसडीएम हरैया मनोज प्रकाश’ ने थाना हर्रेया पर तहरीर देकर आरोप लगाया कि तहसील बार के पूर्व अध्यक्ष महिनाथ त्रिपाठी व दो अन्य के द्वारा हमारे ऊपर हमला करते हुए जान से मारने की धमकी और सरकारी काम बाधा पहुंचाने का अपराध कारित किया गया है। यह घटना तीन दिन पहले एक मुकदमे में एसडीएम मनोज प्रकाश के एक पक्षीय आदेश से अधिवक्ता खफा थे और खुन्नस के वजह से हमला कर दिए जिसके आरोप में उपरोक्त व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करते हुए विधिक कार्यवाही करते हुए दंडित। जिसके बाद हरैया थाने पर एसडीएम मनोज प्रकाश की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। उसके बाद तहसील बार के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट महिनाथ त्रिपाठी ने ’अधिवक्ता के.एल.तिवारी’ के माध्यम से उच्च न्यायालय में रिट याचिका योजित कर एफआईआर को रद्द करने तथा किसी भी प्रकार के दंडात्मक कार्यवाही व गिरफ्तारी करने पर रोक लगाने की प्रार्थना की। याचिका के सुनवाई के समय ’अधिवक्ता के.एल.तिवारी’ ने न्यायालय के समक्ष दलील रखी कि एसडीएम के दबाव में दर्ज एफआईआर में कई प्रकार की न्यायिक त्रुटियां है धारा 121(1) जिसमें एक साल से दस का सजा का प्राविधान है तथा दर्ज की गई सभी धाराओं का अपराध कारित किया जाना तहरीर से ही प्रतीत नहीं हो रहा है। दलील सुनने के बाद ’न्यायमूर्ति सिद्धार्थ’ व ’न्यायमूर्ति हरवीर सिंह’ की बेंच ने किसी भी प्रकार के गिरफ्तारी, व दंडात्मक कार्यवाही करने पर रोक लगाते हुए तहसील बार के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता महिनाथ त्रिपाठी को बड़ी राहत प्रदान की। पुलिस को 90 दिन के भीतर जांच करने का आदेश दिया।
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