बस्ती। पीडब्लूडी के अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में आय से अधिक धन अर्जित करने वालों की भरमार है। प्रशासनिक अधिकारी/टेंडर बाबू प्रेमचंद्र के बारे में तो आप लोग अच्छी तरह जान ही गए होगें, अब आप लोगों को इसी कार्यालय के टेंडर बाबू प्रभात कुमार उर्फ पटटू की हैसियत के बारे बताने जा रहे है। कहने को तो इन्हें दो प्रमोशन के बाद 40 हजार वेतन मिलता है, लेकिन इनके पास इतनी दौलत हैं, कि इनके अंशुल सिंह सहित तीन बच्चे न्यूजीलैंड जैसे दुनिया के मंहगें देष में पढ़ाई कर रहे है। बताते हैं, कि बच्चों की पढ़ाई पर सालाना लगभग 50 लाख का खर्च आता है। अब जरा अंदाजा लगाइए कि जिस टेंडर बाबू का वेतन इतना भी न हो कि वह अपने लिए एक टूटीफूटी चार पहिया वाहन ले सके, अगर ऐसे बाबू के बच्चे विदेश में पढ़ेगें तो सवाल तो उठेगा ही, इसकी जानकारी लोगों को कभी न हो पाती अगर इसकी शिकायत ठेकेदार एसोसिएष्न बस्ती के अध्यक्ष रवींद्र नाथ मिश्र ने प्रमुख सचिव पीडब्लूडी सहित अन्य अधिकारियों से न की होती। बड़े-बड़े अधिकारी अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाने का सपना देख रहे होगें, खुद पटटू बाबू के चीफ इंजीनियर और एसई साहब भी सपना देख रहे होगें। ऐसा भी नहीं कि यह बहुत बड़े लैंड लार्ड हो, इनके स्व. पिता मिठठू पीडब्लूडी में क्लीनर के पद पर रहे, कहते हैं, कि जब तक इनके पिता नौकरी में रहे, ईमानदारी की मिसाल बन कर रहे, लेकिन जैसे ही मृतक आश्रित पर पटटू को नौकरी मिली, वैसे ही इन्होंने बेईमानी करना षुरु कर दिया, एक तरह से इन्होंने अपने पिता र्की अमानदारी का मजाक उड़ाया। लोग अपने पिता के पद चिन्ह्ों पर चलते हैं, लेकिन पटटू बाबू बेईमानी के रास्ते पर चल निकले। यह पिछले 16 साल से एसई कार्यालय में टेंडर बाबू के रुप में ही काम करते आए, इन्हें इनके काउंटर पर से हटाने की बड़े-बड़े साहब चाह कर भी नहीं हटा सके, क्यों कि पटटू बाबू के सिर पर भ्रष्ट नेताओं/ठेकेदारों का हाथ रहा। अब जरा अंदाजा लगाइए, जो टेंडर बाबू 16 साल तक चोरी वाले टेंडर में 10 फीसद नकद कमीशन लेता हो, उसके कमाई का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं, कि उसके तीन बच्चे विदेश में पढ़ रहे है। देखा जाए तो पूरे विभाग का कमीशन 10 फीसद होता है, लेकिन पटटू बाबू का अकेले 10 फीसद होता है। जिसे कमाता होता है, वह 10 फीसद पटटू बाबू को देता है। इन्होंने विभाग के बिना अनुमति के 14 मई 26 से 27 मई 26 तक न्यूजीलैंड की यात्रा किया। इन बीस सालों में डीवीजन में एसई स्तर के अरबों रुपया का टेंडर निकला होगा, अगर उसमें से 20 फीसद ही इन्होंने टेंडर को चोरी कर लिया, तो अर्जित आय कितनी होगी, इसका गुणाभाग आप लोग करिए। प्रेमचंद्र की संपत्ति की जांच करवाने वाले की नजर से मानो पटटू बाबू ओझल हो गए, इनका दो बार प्रमोशन हुआ लेकिन इनकी तैनाती नेता से ठेकेदार बने लोगों ने अपने लाभ के लिए नहीं होने दिया। इन्होंने पत्नी के नाम मड़वानगर में दो कीमती प्लाट भी खरीदा, जिसकी बाजार दर एक करोड़ से अधिक है। खास बात यह है, कि मानव संपदा पोर्टल पर पटटू बाबू ने इस संपत्ति का जिक्र ही नहीं किया। इतना ही नहीं पटटू बाबू ने तो न जाने कितनी दौलत कमाई होगी, लेकिन इन्होंने अपने भाई को एसई के यहां ‘सी’ श्रेणी के ठेकेदारी का पंजीयन करवा कर उसे भी मालामाल कर दिया, अब जरा अंदाजा लगाइए कि पीडब्लूडी का एक आम ठेकेदार ठेका पाने के लिए 30 से 40 फीसद बिलो दर डालता है, तब जाकर उसे ठेका मिलता है, लेकिन पटटू बाबू की मेहरबानी से इनके ठेकेदार भाई सत्य प्रकाश के फर्म प्रकाश टेडर्स को संतकबीरनगर और सिद्वार्थनगर में करोड़ों का ठेका कभी 1.10 फीसद, तो कभी 1.55 फीसद, तो कभी 1.60 फीसद, तो कभी 2.20 फीसद बिलो पर मिला। असल में दिखाने के लिए भले ही पंजीकरण भाई के नाम हो, लेकिन फर्म को पटटू ही संचालित करते है। अब इन्होंने अपने भाई से 10 फीसद कमीशन लिया होगा कि नहीं, यह नहीं मालूम, लेकिन इन्होंने सरकारी धन का नुकसान करके भाई को लाभ अवष्य पहुंचाया। नियमानुसार कोई भी कर्मचारी अपने परिवार के सदस्य का पंजीकरण उस विभाग में नहीं करा सकता, जिस विभाग में वह नौकरी करता हो। प्रेमचंद्र की शिकायत करने वाले अपना दल के प्रदेश सचिव एवं ठेकेदार संजय सिंह पगार पर कभी न अगुंली उठती, अगर वे षिकायत में पारदर्षिता रखते, उन लोगों की भी षिकायत करते जिन्होंने अपनी पूरी नौकरी इस कार्यालय में बिता दिया। असल में प्रेमचंद्र के साथ पटटू की भी आय से अधिक धन अर्जित करने के मामले में जांच होनी चाहिए।