बस्ती। भले ही चाहें बच्चों को विदेश में पढ़ाने का किसी का सपना टूूट गया हो, लेकिन 40 हजार वेतन पाने वाले पटटू बाबू ने लोगों को बता दिया, कि बच्चों को किस तरह विदेश में पढ़ाया जा सकता है, बस इसके लिए तो सबसे पहले चोरी बेईमानी करनी होगी, सरकार को धोखा देना होगा, राजस्व को चूना लगाना होगा, और उन ठेकेदारों के साथ सांठगांठ करनी होगी, तो चोरी छिपे टेंडर खरीदते हैं, और जिन्हें कम बिलो पर ठेका चाहिए। इतना ही नहीं किसी को आय से अधिक धन अर्जित करना है, तो उसके लिए भ्रष्ट नेताओं का सहारा लेना पड़ेगा। पीडब्लूडी के एसई कार्यालय में पिछले 16 साल से लगातार टेंडर बाबू रहे प्रभात कुमार उर्फ पटटू बाबू नेताओं के इतने चहेते हो गए थे, कि इन्हें उनके काउंटर से हटाने की कोई अधिकारी सोच भी नहीं सकता, अगर बृजनंदन पांडेय इनके भ्रष्टाचार की शिकायत उपर न करते तो कोई इन्हें हटा भी नहीं पाता, 16 साल तक यह टेंडर बाबू की कुर्सी को बपौती समझ रखा था। कुर्सी पर हटते ही इन्हें इतनी जोर का झटका लगा, कि तिलमिला उठें, इनके आका परेशान हो गए, कि अब कौन कमाई करवाएगा? इसके लिए एक साजिश रची गई, और साजिश के तहत प्रेमचंद्र को निशाना बनाया गया, उनकी षिकायत करवाई गई, क्यों प्रेमचंद्र इन लोगों के रास्ते का रोडा़ बन चुके थे। जिन ठेकेदारों को ठेका देने का आष्वासन दिया गया था, वह पटटू के हटते ही योजना फेल होती नजर आने लगी। शिकायत पर जब चीफ इंजीनियर ने जांच किया तो पटटू बाबू दोषी पाए गए, जिसके चलते इन्हें टेंडर बाबू के पद से हटा दिया गया, और जयहिंद बाबू को टेंडर बाबू बना दिया गया, जयहिंद को टेंडर के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी, बताते हैं, कि एओ प्रेमचंद्र सहयोग कर रहे थे, इसी बीच संजय पगार को एक टेंडर के मामले में अपात्र कर दिया गया, लोगों को लगा कि यह प्रेमचंद्र ने किया, इसी लिए इन्हें हटाने की साजिश रची गई। सवाल उठ रहा है, कि एक साल पहले प्रेमचंद्र गोरखपुर से तबादला होकर बस्ती आए थे, इन एक साल में इनकी कोई शिकायत नहीं हुई, लेकिन जैसे ही 26 मार्च 26 को पटटू बाबू हटे, वैसे ही प्रेमचंद्र की शिकायते होने लगी। लोगों का कहना है, कि अगर प्रेमचंद्र ने आय से अधिक धन अर्जित किया तो उसकी जांच होनी चाहिए, और कार्रवाई भी होनी चाहिए। लेकिन अगर पटटू से आय से अधिक धन अर्जित किया तो इनके खिलाफ भी जांच और कार्रवाई होनी चाहिए। कम से कम इंसाफ का तकाजा तो यही है। कहा जाता है, कि इससे पहले शिवकुमार चौधरी और राजीव कुमार एओ के पद पर बस्ती में 30 साल तक रहे, तो फिर क्यों नहीं इन दोनों की यह कह कर शिकायत की गई कि यह दोनों क्यों 30 साल से जमे हुएं है? इसी लिए बार-बार कहा जा रहा है, कि अगर षिकायत पारदर्षी और ईमानदारी से की गई होती तो कोई नेताजी पर सवाल नहीं उठाता। बृजनंदन पांडेय, संजय सिंह, प्रभात मिश्र, मुकेश पोददार सहित अन्य ठेकेदारों की ओर से की गई शिकायत में कहा गया कि माह फरवरी 26 में निर्माण खंड बांसी से संबधित एक रोड मरवटिया बैड़ाखोर के लिए टेंडर प्रकाषित हुआ। प्रभात कुमार उर्फ पटटू ने जानबूझकर उक्त टेंडर कुछ अनावष्यक मशीनरी की शर्त लगा दी। खासबात यह है, कि जो शर्त लगाई गई, वह टेंडर नोटिस में नहीं लिखा था। यह शर्त इस लिए लगाई गई, ताकि अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर मिल सके और इन्हें अपना 10 फीसद कमीशन मिल सके। इसी तरह जब भी इन्हें अपने किसी चहेते ठेकेदार को ठका देना होता तो चुपके से अनाष्वयक शर्त अंतिम समय में जोड़ देते। चूंकि इसकी जांच होती नहीं, इस लिए यह अपने मकसद में सफल हो जाते। ठेकेदार चिल्लाते रह जाते हैं, लेकिन कोई नहीं सुनता, आष्वासन तो सभी देते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करता, इस लिए नहीं करता, क्यों कि मामला या तो नेताजी लोगों का रहता है, या फिर चहेते ठेकेदार का। अब साजिश की ओर चलते हैं, टेंडर बाबू जयहिंद 22 जून 26 से लंबे अवकाष पर चले जाएगें, और रही बात एओ प्रेमचंद्र की तो इनका तबादला हो ही जाएगा, उसके बाद फिर पटटू बाबू और साजिश में शामिल ठेकेदारों की चांदी हो जाएगी। जिस तरह गैरों से मिलकर अपनों के खिलाफ सिर्फ और सिर्फ पैसे के लिए साजिश रची गई, उसके लिए पटटू जैसे लोगों को कोई माफ नहीं करेगा। लोग अपनों के लिए गैरों से लड़ जाते हैं, लेकिन यहां पर तो अपने ही अपनों को पटकनी देने के लिए गैरों से हाथ मिला रहे है।
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