बस्ती। मिल हितैशियों ’चंद्रेश प्रताप सिंह’ व ’विकास सिंह’ ने मंडल आयुक्त से मांग की है कि डीएम एवं उप जिलाधिकारी, बस्ती सदर को निर्देशित कर स्वयं की देखरेख में नीलामी प्रक्रिया कराई जाए और मिल पुनः संचालन पर ठोस निर्णय लिया जाए, ताकि वर्षों से लंबित भुगतान हो सके, मिल की उपयोगी संपत्ति सुरक्षित रहे और क्षेत्र की बेरोजगारी दूर हो।
कहा कि चीनी मिल, वाल्टरगंज को वर्ष 2018 में बंद कर दिया गया था। वर्ष 2021-22 में मिल को पुनः चलाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर पूर्णतः मरम्मत कराई गई, आवश्यक उपकरण नए लगाए गए। इसके बावजूद मिल को आज भी “चलने लायक नहीं” बताकर बंद रखा गया है। यह स्थिति मिल प्रबंधन, प्रशासन और पूंजीपति हितों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मिल परिसर में करोड़ों रुपये मूल्य का अनुपयुक्त स्क्रैप, कबाड़, पुरानी मशीनरी और आईटी सामान बेकार पड़ा है। यदि इसका समय रहते मूल्यांकन कर पारदर्शी नीलामी कराई जाए तो इससे प्राप्त धनराशि से किसानों का गन्ना मूल्य और मौसमी कर्मचारियों का वेतन बकाया चुकाया जा सकता है। इसी मांग को लेकर दिनांक 29-05-2026 को चीनी मिल वाल्टरगंज के किसानों व श्रमिकों की ओर से आयुक्त महोदय, बस्ती मंडल, जिला अधिकारी, बस्ती तथा उप जिलाधिकारी, बस्ती सदर को संयुक्त रूप से मांग पत्र ज्ञापन सौंपा गया। हाल ही में तकनीकी एवं प्रशासनिक टीम द्वारा किए गए मुआयने में मिल प्रबंधन द्वारा केवल चयनित सामान दिखाया गया, जबकि वास्तविक अनुपयुक्त स्क्रैप को जानबूझकर छिपाया गया। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन और मिल प्रबंधन तंत्र पूंजीपतियों की गोद में बैठा है, जबकि किसान और कर्मचारी सड़क पर बकाया लेकर खड़े हैं। ’मिल पुनः संचालनरू’ मरम्मत के बाद मिल चलने लायक है। सरकार चाहे तो मिल तत्काल चल सकती है, जिससे क्षेत्र की बेरोजगारी का संकट दूर होगा। सरकार अपनी मंशा स्पष्ट करे और मिल पुनः शुरू कराए। ’पारदर्शी मुआयना व नीलामीरू’ मिल के अनुभवी तकनीकी कर्मियों और मौसमी कर्मचारी प्रतिनिधियों को शामिल कर मुआयना कराया जाए। ब्राउन शुगर, सीरा, ट्रैक्टर, हाइड्रा, बोलेरो, एम्बुलेंस, एम्बेसडर, जीप, हैवी-लाइट स्क्रैप ∼30 टन, अग्नि फार्मा स्क्रैप ∼20 टन, बगास के नीचे दबा स्क्रैप ∼10 टन, पुरानी चिमनी, क्रेन, ट्रिपलर, बीज मशीन, गन्ना डेवलपमेंट मशीन व कॉलोनी-गेस्ट हाउस-रेस्ट हाउस तक फैले कबाड़ व आईटी स्क्रैप का मूल्यांकन कर तत्काल नीलामी की जाए। ’उपयोगी संपत्ति की सुरक्षारू’ मिल की उपयोगी मशीनरी व कार्यशील उपकरण किसी भी दशा में नीलामीध्कटाई में न आने पाएं। इसका सत्यापन मौके पर तकनीकी टीम से कराया जाए। ’बकाया भुगतान में उपयोगरू’ नीलामी से प्राप्त सम्पूर्ण धनराशि को सर्वोच्च प्राथमिकता पर किसानों के गन्ना मूल्य और मौसमी कर्मचारियों के वेतन भुगतान में लगाया जाए।
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