बरेली।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वाधान में आयोजित हुआ महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम 

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संतुलन समग्र महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य को पहचानता है।स्वाभिमान जैसे वार्षिक अभियान को आयोजित करके इसे प्राप्त करने का प्रयास करता है, जो न केवल संवेदना को उत्पन्न करता है, बल्कि नारी शक्ति का  उत्सव भी मनाता है। इस अभियान के तहत, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय के साथ मिलकर बरेली शाखा ने महात्मा ज्योतिबा फूले रोहिलखंड विश्वविद्यालय के एम0बी0ए0 ऑडिटोरियम में एक जागरूकता पैदा करने वाला कार्यक्रम आयोजित किया।

एक माह चलने वाला यह अभियान, महिलाओं को संपूर्ण रूप से सशक्त बनाने के अपने उद्देश्य के साथ, एक आदर्श महिला के बारे में सामाजिक मान्यताओं का खंडन करता है। और इसके साथ महिलाओं की खोई हुई गरिमा और उनके द्वारा दिए गए महान योगदानों पर चर्चा भी करता है। इस वर्ष इसका लक्ष्य एक महिला द्वारा अपने जीवन के चुनौतीपूर्ण रास्तों को समाज के समक्ष लाना है और समाज की मानसिकता में बदलाव लाने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाना है। कैसे प्राचीन नारी आध्यात्मिक मार्ग के माध्यम से विजयीशील रही और कौन से गुण ऐसी प्रतिष्ठित महिला का निर्माण करते हैं।

यह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति के0पी0 सिंह, महिला समन्वयक प्रो0 संतोष अरोड़ा, प्रो0 इंदरप्रीत कौर, बरेली कॉलेज शिक्षा विभाग प्रो0 दीप्ति जौहरी, वेदांत हॉस्पिटल से पैथोलॉजिस्ट हेमपंत, महिला आयोग से डिप्टी डायरेक्टर नीता अहिरवार, डॉ0 प्रिया सक्सेना, डॉ प्रतिभा सागर, प्रो0 तृप्ति खरे, प्रो0 रश्मि अग्रवाल, प्रो0 नलिनी श्रीवास्तव, प्रो0 सुधीर कुमार वर्मा, प्रो0 ए0 के0 सिंह, प्रो0 पी0 वी सिंह उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सर्व श्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी रुचिका भारती ने बताया कि आज महिलाएं बाहरी रूप से चाहे कितनी भी सशक्त क्यों न हो गई हो लेकिन आध्यात्म  को जीवन में उतरे बिना पूर्ण रूप से सशक्तिकरण हो ही नहीं सकता।अभियान के संस्थापक व संचालक दिव्य गुरु सर्व श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा 21वीं सदी की वैदिक नारीयों का निर्माण करने और आज की महिलाओं को यह एहसास कराने के लिए दी गई विचारधारा है कि शक्ति उनके भीतर ही विद्यमान है। बस इसे जागृत करने की आवश्यकता है, जिसे आत्म जागृति ब्रह्मज्ञान के माध्यम से प्राप्त भी किया जा सकता है। झाँसी की रानी, ​​मीरा इत्यादि प्रतिष्ठित महिलाओं की बायोपिक्स का वर्णन। जिन्हें क्षेत्रीय नृत्य रूपों के माध्यम से अपनी खुद की रानी बनाई। प्राचीन काल में वैदिक महिलाओं के मतभेदों को चित्रित करने वाले डिजिटल यात्रा वृतांत की स्क्रीनिंग और अब इस विचार का वर्णन करने हेतु कुछ अन्य उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। 

यह अभियान हर साल गति पकड़ते जा रहा है, जिसका लक्ष्य 'महिला सशक्तिकरण' शब्द को फिर से परिभाषित करना और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना है। बरेली  के कार्यक्रम में  200 लाभार्थियों की भागीदारी देखी गई। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी सामाजिक-आध्यात्मिक संगठन है जो मनुष्य में जागृति के माध्यम से वैश्विक शांति के अपने उद्देश्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्व में शांति और सद्भावना स्थापित करने के अपने मिशन में, संगठन समग्र कल्याण जैसे गरीबों की शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, नशा उन्मूलन, कैदियों के सुधार और पुनर्वास, प्रकृति संरक्षण और विकलांगों के सशक्तिकरण जैसे विविध सामाजिक क्षेत्रों में लगातार काम करने का प्रयास करता है।