हापुड़ न्यूज़ 

 गढ़मुक्तेश्वर: त्योहारों का सीजन आते ही मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। बाजारों में घटिया मावा, सिंथेटिक दूध और हानिकारक रंगों से बनी मिठाइयां खुले तौर पर बेची जा रही हैं। आरोप है कि फूड विभाग इस दौरान आंखें बंद किए बैठा रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार से करीब एक महीना पहले ही खाद और केमिकल से मिलावटी मावा तैयार करने का काम शुरू हो जाता है। इसकी वजह से हर साल हजारों लोगों की सेहत से खिलवाड़ होता है।

छापेमारी सिर्फ खानापूर्ति?
ग्रामीणों का आरोप है कि फूड विभाग त्योहारों के समय ही अचानक सक्रिय होता है। मिठाई की दुकानों पर छापे मारे जाते हैं, सैंपल भरे जाते हैं, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होती। 
"त्योहार आते ही विभाग के पास 'चढ़ावा' पहुंच जाता है और सैंपल ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। फिर वही मिलावटी सामान दुकानों पर बिकता रहता है" - स्थानीय लोगों ने कहा।

सेहत पर भारी असर
शहर में मिलावटी मिठाइयां खाने से उल्टी, दस्त और अन्य बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। कई बार मरीजों को अस्पतालों में भी सही इलाज नहीं मिल पाता। गंभीर मामलों में मौत तक हो जाती है, फिर भी दुकानदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

लोगों ने मांग की है कि फूड विभाग त्योहारों तक सीमित न रहकर सालभर सख्त निगरानी करे और दोषी दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों की जान से खिलवाड़ रुक सके।

मनजीत सिंह कि रिपोर्ट