शर्माजी के ओटी से निकला मरीज घर नहीं पीएम हाउस जाता!
-देश के यह पहले ऐसे डाक्टर होगें, जो हैं, तो आर्थो सर्जन लेकिन पैसा कमाने के लिए यह न्यूरो सर्जन बनकर करते आपरेशन, जाहिर सी बात मरीज तो मरेगा ही
-शर्माजी को ग्राम उमरी के बिरंगी लाल चौधरी का करना था रीढ़ के हडडी का आपरेशन और कर दिया नस का, नतीजा कुछ ही पलों में चौधरी साहब स्वग्रीय हो गए, खूब बवाल मचा
-मामला डीआईजी तक पहुंचा, शर्माजी तलब हुए, डीआईजी का पैर पकड़कर करने लगे बचाने की अपील, शर्माजी और स्व. बिरंगी लाल के पुत्र राजकुमार चौधरी उर्फ मंटू चौधरी से समझौता हुआ, पांच लाख देने को कहा, दिया एक लाख, चार लाख अभी तक नहीं दिया
-मंटू चौधरी ने जिले भर के लोगों से अपील की है, कि भूलकर कभी शर्माजी के पास आपरेशन कराने के लिए मत जाना नही ंतो पीएम हाउए जाना पड़ेगा
-इसके पहले इसी तरह की अपील डा, एसके गौड़, डा. रेनू राय के बारे में भी आमजन की ओर से की सोषल मीडिया पर की जा चुकी
-सवाल यह है, कि मरीज जाएं तो कहां जाए क्यों कि जो नाम वाला डाक्टर हैं, वह अपने नाम को बेच रहा, ऐसे लोगों के यहां मरीज जिंदा लौटेगा भी नहीं यह आनशंका बनी रहती
-अब हर कोई मरीज पैसे वाला तो होता नहीं कि फारचूनर उठाया और नोटों का बंडल रखा और मरीज को दिखाने/आपरेशन करने के लिए बड़े शहरों में चला गया
-अधिकांश खून चुसवा डाक्टर जिले के गरीब मरीजों का लाभ उठाकर तिजोरी भर रहें, इन पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि पैसे के चलते यह किसी गरीब मरीज की जान तक ले रहें
-इससे पहले शर्माजी पर हडडी का आपरेषन गलत स्थान पर करने का आरोप लग चुका, जिसे ठीक कराने के लिए मरीज के परिजन को लखनए ले जाना पड़ा
बस्ती। आज जिले के लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या डाक्टर्स को लेकर हो रही है। डाक्टर्स और मरीज के बीच में विष्वास का संकट खड़ा हो गया, हालत यह हो गई कि परिजन को डर लगा रहता हैं, कि नर्सिगं होम से उसका मरीज जिंदा होकर घर वापस आ भी पाएगा कि नहीं? क्यों कि कुछ ऐसे नामचीन डाक्टर्स हैं, जिनके ओटी से मरीज घर वापस नहीं जाता बल्कि उसे पोस्टमार्टम हाउस ले जाना पड़ता है। पल भर में अच्छा खासा जिंदा व्यक्ति स्वग्रीय हो जाता है। जाहिर सी बात है, कि ऐसे में मरीज और उनके परिजन को दुविधा में पड़ना लाजिमी है। जिन डाक्टर्स को जीवन देना चाहिए, अगर वह मौत दे रहें हैं, तो सवाल तो उठेगा ही। शर्माजी देश के पहले ऐसे डाक्टर होगें, जो हैं, तो आर्थो सर्जन लेकिन पैसा कमाने के लिए यह न्यूरो सर्जन बनकर आपरेशन भी करते है। जाहिर सी बात मरीज तो मरेगा ही। शर्माजी को ग्राम उमरी के बिरंगी लाल चौधरी के रीढ़ के हडडी का आपरेशन करना था, और इन्होंने न्यूरो सर्जन के रुप में नस का आपरेशन कर दिया, नस फट गई, और कुछ ही पलों में चौधरी साहब स्वग्रीय हो गए, खूब बवाल मचा। मामला डीआईजी तक पहुंचा, शर्माजी तलब हुए, डीआईजी का पैर पकड़कर रोने लगे और कहा साहब बचा लीजिए। फिर शर्माजी और स्व. बिरंगी लाल के पुत्र राजकुमार चौधरी उर्फ मंटू चौधरी के बीच काफी मान मन्नौवल के बाद समझौता हुआ, पांच लाख देने पर समझौता हुआ, लेकिन शर्माजी ने यहां पर भी ईमानदारी नहीं दिखाया, सिर्फ एक लाख दिया, चार लाख बाद में देने को कहा, जिसे अभी तक नहीं दिया। मंटू चौधरी ने जिले भर के लोगों से अपील की है, कि भूलकर कभी शर्माजी के पास आपरेशन कराने के लिए मत जाना नहीं तो पीएम हाउए जाना पड़ेगा। इसके पहले भी इसी तरह की अपील आमजन की ओर से सोशल मीडिया के जरिए डा, एसके गौड़ और डा. रेनू राय के बारे में भी की जा चुकी। सवाल यह है, कि मरीज जाएं तो जाएं कहां? क्यों कि जो नाम वाला डाक्टर हैं, वह अपने नाम को बेच रहा, ऐसे लोगों के यहां से मरीज जिंदा वापस लौटेगा भी नहीं यह आशंका परिजन को बनी रहती। अब हर कोई मरीज पैसे वाला तो होता नहीं जो फारचूनर उठाया, नोटों का बंडल रखा और मरीज को दिखाने/आपरेशन करवाने के लिए बड़े शहरों में चला गया। अधिकांश खून चुसवा डाक्टर जिले के गरीब मरीजों का लाभ उठाकर तिजोरी भर रहें, इन पर इस बात का कोई भी फर्क नहीं पड़ता कि यह लोग पैसे के चलते किसी गरीब मरीज की जान तक ले रहें। इससे पहले शर्माजी पर हडडी का आपरेशन गलत स्थान पर करने का आरोप लग चुका, जिसे ठीक कराने के लिए मरीज के परिजन को मरीज को लखनऊ ले जाना पड़ा।
अब हम आप लोगों को स्वग्रीय हो चुके के पुत्र मंटू चौधरी की जुबानी शर्माजी की करस्तानी बताते है। बताया कि शर्माजी से पिता के रीढ़ का आपरेशन करने के लिए सौदा हुआ। शर्माजी ने सौदेबाजी करने के पहले एमआरआई की रिपोर्ट देखकर बता दिया था, कि डिस-4 और डिस-5 में नस फंसी हुई है। घबड़ाने की कोई बात नहीं, मामूली सा आपरेशन हैं, हो जाएगा। इसी विष्वास के साथ परिवार आपरेशन कराने लिए तैयार हो गया। सवाल उठ रहा है, कि जब शर्माजी न्यूरो सर्जन नहीं हैं, तो कैसे इन्होंने न्यूरो का आपरेशन कर दिया। बहरहाल, पिता को ओटी में ले जाया गया, आपरेशन सुबह 10 बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक चला। अचानक शर्माजी बाहर आए और सारी बोलते हुए कहा कि नस फटने से पिता की मौत हो गई, अचानक मौत की खबर सुनकर परिवार में रोना-पिटना शुरु हो गया। नर्सिगं होम में खूब बवाल मचा। कहा कि शर्माजी ने हमको बरगलाकर आपरेशन कर दिया, कहा कि हम्हें क्या मालूम था, कि इनके पास न्यूरो की डिग्री नहीं हैं, और यह सिर्फ पैसा कमाने के लिए फर्जी डिग्री के सहारे न्यूरो का आपरेशन करते है। बताया कि बाद में पता चला कि इनके यहां के अधिकांश मरीज को घर नहीं बल्कि पीएम हाउस जाना पड़ता है। कहते हैं, कि सीएमओ और प्रशासन को भी इनकी डिग्री देखनी चाहिए, आखिर जब यह न्यूरो के डाक्टर नहीं हैं, तो फिर कैसे यह न्यूरो का आपरेशन कर रहे है। कहते हैं, कि जब तक बेईमान और चोर सीएमओ और संवेदनहीन प्रशासन रहेगा, तब तक उनके जैसे न जाने कितने को अपने पिता को खोना पड़ सकता है। इस लिए मैं निवेदन करता हुं कि कोई भी शर्माजी के यहां न तो इलाज कराने आए और न आपरेशन करवाने ही, नहीं तो किसी को पिता तो किसी को अपना पुत्र खोना पड़ सकता है। कहते हैं, कि ऐसे डाक्टर को तो फंासी की सजा होनी चाहिए। इनके पिता चीनी मिल में टरबाइन आपरेटर रहे।
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