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‘सरकार’ और ‘अधिकारियों’ के बीच ‘समन्यव’ रहना ‘चाहिए’ यशकांत सिंहबस्ती। जिलाधिकारी कार्यालय बस्ती में भारतीय जनता पार्टी बस्ती का एक प्रतिनिधिमंडल डीएम कृतिका ज्योत्सना से शिष्टाचार भेंट कर जिले से जुड़े विभिन्न समसामयिक, जनहित एवं कानून-व्यवस्था से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने आमजन से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए...
‘धौरहवा’ के ‘सौरभ सिंह’ बने ‘गांव’ के ‘आईडिएल’बस्ती। कौन कहता, गांव की मिटटी में पले पढ़े लोग आसमान को नहीं छू सकते। कहतें हैं कि मेहनत करने वालों की सफलता कदम चूमती हैं। जरूरत संसाधनों की नहीं दृढ़ ईच्छा शक्ति की होती है। अगर ऐसा नहीं होता तो बहादुरपुर ब्लाक धौरहरा गांव के सौरभ सिंह गांव वालों के रोल माडल नहीं बनते। इन्होंने अपने को इतना तैयार और मज...
अपनी ‘आदतों’ से ‘बाज’ नहीं आ ‘रहे’ं, ‘सिंकदरपुर’ के ‘चौकी इंचार्ज’!बस्ती। चौकी इंचार्ज साहब लोग अपने घर की महिलाओं की तो खूब इज्जत करते, लेकिन न जाने क्यों अन्य महिलाओं की इज्जत नहीं करते? शायद ऐसे चौकी इंचार्ज साहब लोगों को यह नहीं मालूम कि घर की महिलाओं की इज्जत करना कोई नहीं देखता, लेकिन अगर अन्य महिलाओं को अपमानित करेगें तो उसे पूरा समाज देखेगा...
हे, ‘भगवान’ अगले ‘जन्म’ में मोहे ‘शिक्षक’ न ‘बनाना’बस्ती। अगर कोई शिक्षक यह भगवान से प्रार्थना करें, कि उसेे अगले जन्म में चपरासी बना देना लेकिन शिक्षक न बनाना। तो शिक्षकों का दर्द समझा जा सकता है। शिक्षकों ने इस शिक्षक को बच्चों को पढ़ाकर योग्य बनाना था, उसे बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करना और वोटर्स को तलाशना पड़ रहा है। जो काम कोई नहीं कर सकता,...
‘लेखपाल’ अब ‘फीता’ नहीं ‘मशीन’ लेकर ‘जाएगें’!बस्ती। योगीजी ने एक ऐसा एतिहासिक निर्णय लिया है, जिसका इंतजार कई दषकों से काष्तकार और भू स्वामी कर रहे थे। इस एतिहासिक निर्णय से लेखपालों की मनमानी और उनके द्वारा जमीनों की पैमाईश में की जा रही धांधली तो समाप्त होगी ही, अलबत्ता जिस पैमाईश के लिए काष्तकार तहसीलों और लेखपालों का महीनों चक्कर लगाते थे, अब प...
‘गुरुजी’ पढ़ाना ‘छोड़िए’, ‘जाइए’ कुत्ता ‘पकड़िए’बस्ती। जिले के हजारों गुरुजी के लिए खुश करने वाली खबर कहें या अपमानित होने वाली। अब उन्हें बच्चों को पढ़ाना नहीं पड़ेगा, बल्कि कुत्ता पकड़ना होगा। गुरुजी बच्चों को पढ़ाने के बजाए अब कुत्ता पकड़ेगें। यह हम नहीं बल्कि सरकार कह रही है। अगर नहीं पकड़े तो निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है। सवाल उठ रहा है, बच्चों को...
‘पत्रकारों’ से जुड़ी ‘समस्याओं’ को लेकर ‘ग्रापए’ निरंतर ‘मुखर’ रहाःश्री तिवारीबस्ती। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के संस्थापक बाबू बालेश्वर लाल की जयंती गुरुवार को टाटा मोटर्स के गोटवा के सभागार में मनाई गई। संस्थापक के जीवन और संगठन को लेकर किए गए संघर्ष को याद किया गया। गोष्ठी के मुख्य अतिथि संगठन के प्रदेश महामंत्री डॉ संजय द्विवेदी रहे। अध्यक्षता जि...
‘जाते-जाते’ तुमने कैसा ‘देश’ का हाल ‘बनाया’बस्ती। कवि साहित्यकार और डाक्टर वीके वर्मा ने बीते साल की बिदाई और नए साल का आगमन पर कविता के जरिए संदेष दिया है। जब जाना तय है तो जाओ, पर जाते क्षण भी हरशाओ, एक साल में जाना ही था, मत आँखों में आँसू लाओ। कभी हँसाया कभी रुलाया। अपना हर जलवा दिखलाया, लेकिन जाते-जाते तुमने कैसा देश का हाल बनाया। सन् पच्चीस क...
‘संविधान’ के ‘नाम’ पर ‘अत्याचार’ कब ‘तक’?बस्ती। श्री राजपूत करणी सेना के पूर्वांचल प्रवक्ता पूर्वांचल प्रवक्ता चंद्रेश प्रताप सिंह का कहना है, कि उत्तर प्रदेश में पुलिस की 32,000 भर्ती निकली है, लेकिन उसकी आयु सीमा देखकर आँखों में आँसू आ जाते हैं। सामान्य वर्ग और ईडब्ल्यूएस के गरीब युवाओं के लिए आयु सीमा मात्र 18 से 22 वर्ष, जबकि ओबीसी और एससीएसटी...
केस’ दर्ज ‘करने’ को ‘सूद’ पर लिया ‘छह हजार’बनकटी/बस्ती। अगर किसी घायल परिवार को मुकदमा दर्ज कराने के सूद पर पैसा लेना पड़े तो आप समझ सकते है, कि जिले में भ्रष्टाचार किस सीमा तक पहुंच चुका है। एक सप्ताह पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने योगीजी से कहा था, कि योगीजी जाकर देखिए आप के राज में पीड़ित परिवार का मुकदमा तब लिखा जाता है, ज...