बस्ती। कमीेशन के लालच में ‘एडी’ हेल्थ, जिला महिला अस्पताल के ‘सीएमएस’ डा. अनिल कुमार, पीओ ‘सीएल’ के शुभम अग्रवाल और फार्मासिस्ट शेलेंद्र राय ने मिलकर ‘कमिष्नर’ को ‘धोखा’ दिया। पीओ सीएल और सीएमएस को बचाने के लिए एडी हेल्थ ने फर्जी रिपोर्ट लगाकर शिकायत को निराधार बताते हुए मामले को निक्षेपित करने के लिए कमिष्नर को लिख दिया। कमिष्नर ने मामले को निक्षेपित भी कर दिया, इस तरह ईमानदार शिकायतकर्त्ता की हार हुई और बेईमानों की टोली की जीत हुई। जिस फर्म के मालिक शुभम अग्रवाल को और रिजेंट का फर्जी आर्डर देने और भुगतान करने वाले सीएमएस और बाबू को गबन के आरोप में जेल जाना चाहिए, उसे एडी हेल्थ ने भारी कमीशन लेकर बरी करवा दिया, इतना ही नहीं अवैध कारोबार चलता रहे, इसके लिए रास्ता भी साफ कर दिया। एडी हेल्थ और सीएमएस को आज नही तो कल न्यायालय में बताना होगा कि कैसे पीओ सीएल नामक फर्म को फर्जी तरीके से करोड़ों के रिजेंट आपूर्ति और भुगतान कर दिया, जिसका न तो पंजीकरण नंबर हैं, और न जीएसटी नंबर, यहां तक इसका न तो कोई स्थाई पता है, और न कोई मोबाइल नंबर। यह हम नहीं बल्कि फर्म का वह पत्र कह रहा है, जो इन्होंने सीएमएस को दिया। सवाल उठ रहा है, कि सीएमएस ने कैसे कंप्यूटर से निकाले गए ‘जय श्री श्याम  सर्विस’ नामक फर्म के मामूली लेटर पैठ पर बिना फर्म के प्रोपराइटर के हस्ताक्षर के इतना बड़ा ठेका दे दिया। इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हेल्थ विभाग में इससे पहले नहीं देखा गया। जो फर्जीवाड़ा जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डा. अनिल कुमार ने किया वही फर्जीवाड़ा हर्रैया के महिला अस्पताल की सीएमएस डा. सुशमा जायसवाल ने भी किया।

पीओ सीएल का फर्जीवाड़े का खुलासा कभी न होता अगर इसके शिकायतकर्त्ता उमेश गोस्वामी ने इस फर्जीवाड़े की शिकायत आईजीआरएस में न की होती, हालांकि इसकी शिकायत कमिष्नर से पत्रकार ने भी की, लेकिन उसे भी चौकड़ी ने मिलकर मामले को निक्षेपित करवा दिया, सवाल तो कमिष्नर साहब पर भी उठ रहे हैं, कि कैसे इन्होंने बिना जांच कराए और एडी हेल्थ के फर्जी रिपोर्ट को सही मानकर अपना मोहर लगा दिया? कैसे लिखकर दे दिया कि पीओ सीएल लैब के लिए आवष्यक रिजेंट की खरीद की कार्रवाई आवष्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए किया जाता है? क्या एडी हेल्थ साहब बताएगें कि वह कौन सा नियम हैं, जिसके तहत अवैध रुप से स्थापित पीओसीएल लैब से रिजेंट खरीद की जा रही है, क्या कोई शासनादेश हैं, और है तो फिर क्यों पीओ सिटी लैब से रिजेंट खरीद की जा रही है?, किस नियम के तहत एक सरकारी अस्पताल में दो प्राइवेट लैब का संचालन हो रहा है? जबकि पीओ सीएल के रिजेंट का दर शासन की ओर से निर्धारित ही नहीं है, क्यों आप लोगों के द्वारा कमिष्नर साहब को यह कर गुमराह किया गया, कि पीओ सीएल का रिजेंट पीओ सिटी से सस्ता हैं। सीएमएस साहब अगर आप को पीओ सीएल से ही सस्ता रिजेंट खरीदना हैं, तो क्या आप सोहन सिंह से उससे सस्ता दर में खरीद सकते हैं। सीएमओ साहब इस तरह तो कोई भी आकर कह देगा कि हम आप को दोनों लैब से सस्ता रिजेंट देगें तो क्या आप खरीद लेगें? आखिर टेंडर की भी कोई प्रक्रिया होती है, कि नहीं? इस पूरे मामले में भले ही पीओ सीएल के पार्टनर शेलेंद्र राय पर कोई कार्रवाई न हो, लेकिन सीएमएस और बाबू पर आज नहीं तो कल होना ही है। रही बात पीओ सीएल के शुभम अग्रवाल की तो इनका भी फर्म पीओ सिटी की तरह ब्लैक लिस्टेड हो सकता हैं, बस थोड़ा सा और इंतजार करिए। फिर आप की रोजीरोटी भी जाएगी, और जेल में भी नजर आएगें। जो पीओ सीएल के ‘जय श्रीष्याम सर्विस’ फर्म से सीएमएस जिला महिला अस्पताल को लिखकर दिया, और जिसकी प्रति लगाकर आप लोगों ने कमिष्नर को गुमराह किया, वही आपके लिए भविष्य में घातक साबित होगा। आपने सीएमएस को लिखा कि हम आपको सीएसआर के पैसे से जनहित के काम के लिए मार्डन पैथालाजी लैब दान में देना चाहतें, जिसकी लागत 35 से 45 लाख रुपया है। यहां तक तो मरीज हित में सीएमएस ने सही किया, लेकिन उसके बाद जो रिजेंट का आर्डर और करोड़ों का भुगतान किया, वह न तो मरीज हित में किया, और न नियम के तहत। सीएमएस साहब पूरी दुनिया को मालूम हैं, कि जो मशीने सीएसआर के पैसे से दान में दी जाती है, उसका कारोबार नहीं होता, पीओ सीएल ने अपने पत्र में यह कहीं लिखा लिखा कि वह मशीन के बदले रिजेंट का कारोबार करेगें, यह लिखकर भी नहीं दे सकते, क्यों कि नियम ही नहीं है। दोनों अस्पतालों के सीएमएस ने मिलकर सीएसआर के पैसे से कमीशन ले रहे हैं, कोई पार्टनर बना हुआ है, तो कोई फिक्सड कमीषन ले रहा है। सीएमएस साहब एक करोड़ की मशीन को दान में देने वाले फर्म का सालाना टर्नओवर 100 करोड़ होना चाहिए, तभी वह उसमें से 15 फीसद प्राफिट कमा सकता है, और उसमें से तीन फीसद यानि 30 लाख तक का दान दे सकता है। लेकिन यहां तो एक करोड़ का दान दिया गया, इसके लिए आईटी का 12जी भी फर्म को देना होता है। तभी डीएम संतुति देते है? सीएमएस क्या पीओ सीएल का सालाना कारोबार 100 करोड़ का है, अगर नहीं हैं, जबाव देने के लिए तैयार रहिए।