बस्ती। भाजपा के राष्टीय महामंत्री बनने के बाद हरीश द्विवेदी ने पहली बार अपने मन की बात करते हुए कहा कि 2024 के चुनाव में भाजपा के बड़े नेता का फोन आया, कि सीट बदल दो नहीं तो हार जाओगे, क्यों कि बस्ती की सीट टफ हो गई। जबाव में कहा कि बस्ती मेरी कर्मभूमि हैं, और मुझे यहां के लोगों के साथ रहना हैं, भले ही चाहें हारुं या जीतू, लेकिन बस्ती वालों को छोड़कर कहीं और नहीं जाउगंा। कहा कि मैं चाहें जितना उपर पहुंच जाउं, लेकिन बस्ती की जनता को छोड़कर कहीं और नहीं जाउगंा। कहा कि सोचा था, कि तीसरी बार जब एमपी बनूगां तो अधूरे कार्यो को पूरा करुंगा। लेकिन मैं वादा करता हूं कि 2029 से पहले जितने भी अधूरे कार्य हैं, उसे पूरा करुं। उन्होंने श्रीराम चौहान को अपना अभिभावक बताते हुए कहा कि इन्होंने हर कदम और हर मोड़ पर हमारा साथ दिया, चलने का सही रास्ता बताया। मार्गदर्शक की भूमिका निभाया। पहली बार खुलासा करते हुए कहा कि कुछ लोग हमारे बहुत करीबी है, और मैं चाहता हूं, कि वह हमसे दूर रहे, ताकि उनपर या हमपर कोई आरोप न लगें, और न कोई गलत संदेश ही जाए। जो लोग करीब हैं, उन्हें अच्छी तरह से मालूम हैं, कि वे लोग हमारे दिल के कितने करीब है। जिन्हें मैं नमस्ते का जबाव नहीं देता, समझ लीजिए कि वही हमारे दिल के करीब है। इसी बात पर जोर का ठहाका लगा। कहा कि पहले 50 की भीड़ भी जुटा पाना मुस्किल था, क्यों तक न तो सरकार थी, और न पार्टी मजबूत स्थित में थी। महौल भी आज के जैसा नहीं था, कहा कि इतना अवष्य हैं, कि उन्हें जो भी काम दिया गया, उसे पूरा करने का भरसक प्रयास किया, जिसके चलते शीर्ष नेतृत्व का उनपर विष्वास बना रहा, जिसका परिणाम महामंत्री बनना है। कहा कि जमीन से संघर्ष करके आज इस मकाम तक पहुंचा हूं। इनके करीबियों का कहना है, कि इससे पहले कभी भी हरीषजी ने मन की बात इस तरह से नहीं की। मन की बात कहते समय कहीं भी अहंकार नहीं झलका। जिस तरह इन्होंने लखनऊ के अपने भाषण में मोदीजी का नाम 88 बार लिया और अंत में योगीजी का नाम लिया, ठीक उसी तरह यहां पर अंत में ही योगीजी का नाम लिया, वह भी चलते-चलते। इसे एक षीर्ष नेतृत्व के रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। लोगों का कहना है, कि भले ही हरीशजी राष्टीय महामंत्री बन गए, लेकिन इसकी असली परीक्षा 2027 के चुनाव में इनकी होगी। बस्ती के लिए इन्हें अलग से समय देना होगा, क्यों कि अगर पांचों सीट भाजपा नहीं जीती तो सवाल हरीशजी पर भी उठेगा, फिर सचेता जा रहा है, कि अगर पांचों सीटे जीतना है, तो गुटबाजी को समाप्त करना होगा, क्यों कि बिना गुटबाजी समाप्त किए और सभी को एक छत के नीचे जाए बिना 2017 की स्थित को वापस नहीं लाई जा सकती है। हरीश द्विवेदी और उनकी टीम को यह नहीं भूलना चाहिए, कि देषभर के लोगों की निगाहें 2027 में बस्ती के परिणाम पर लगी रहेगी।
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