बस्ती। पैसे के लालच में खैर स्कूल के प्रधानाचार्य एक ऐसे अनुचर मोहम्मद सलीम को वेतन दे रहे हैं, जो जेल में बंद है। इसे न्यायालय की ओर से दस साल से अधिक सजा सुनाई जा चुकी है। नियमानुसार ऐसे कर्मचारी को त्वरित बर्खास्त करना चाहिए, लेकिन बर्खास्त न करके निलंबित किया गया, ताकि आधा वेतन मिलता रहे। डीआईओएस को जब इसका पता चला तो उन्होंने प्रधानाचार्य फैज आजम अंसारी को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि जिसे बर्खास्त करना चाहिए था, उसे क्यों निलंबित किया गया, और क्यों नौ माह बाद अनुमोदन मांगा गया, और किस आधार पर वेतन दिया जा रहा है। इसकी षिकायत प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने सीएम से करते हुए जांच कराने और प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी गई कि अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो मामले को हाईकोर्ट में ले जाया जाएगा। जिन बिंदुओं पर डीआईओएस ने नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा है, उनमें कहा गया है, कि 11 नवंबर 25 को जब आप ने अनुचर को निलंबित कर दिया तो क्यों नहीं निलंबन का अनुमोदन लिया गया, कहा कि जब आप को मालूम था, कि न्यायालय ने सजा सुना दिया, और यह दस साल से अधिक का है, तो क्यों नहीं उसे बर्खास्त किया, और क्यों 14 दिन बाद उसे निलंबित किया? क्यों डीआईओएस से निलंबन का अनुमोदन बिलंब से मांगा गया? निलंबन के नौ माह बाद क्यों अनुमोदन की मांग की गई? आप द्वारा बताया गया, कि बर्खास्त कर दिया गया, लेकिन क्यों नहीं बर्खास्तगी की पत्रवाली डीआईओएस कार्यालय को उपलब्ध कराई गई। अनुचर के मामले में प्रधानाचार्य पूरी तरह फंसे हुए है, और अगर स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा तो डीआईओएस की ओर से इनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।