पहले ‘विशाल चौधरी’, अब ‘बृजेश चौधरी’ पर ‘मुकदमा’!
-किसको-किसको छुड़ाने जाएगें संजय चौधरी
बस्ती। कहा भी जाता है, कि सोशल मीडिया पर खासतौर पर लाइव पर आकर अपनी बात कहने के तरीके को जिस किसी ने इस्तेमाल किया, समझो वह कानूनी शिंकजे में फंसा। जिस तरह सोशल मीडिया पर अपनी बात कहने का जो चलन निकल पड़ा हैं, उसका खामियाजा भी उसी को भुगतना पड़ता जो सोशल मीडिया का दुरुपयोग/उपयोग करते है। सोषल मीडिया एक तरह से उन लोगों के लिए हानिकारक साबित होता जा रहा है, जो लोग जोष में आकर अनापशनाप टिपणी करते हैं, एक तरह से आप सबूत दे रहे हो कि हमने आप को अपषब्द कहा। इसी आधार पर रोज न जाने कितने मुकदमें कायम हो रहे है। इसी लिए समझार व्यक्ति कभी भी सोशल मीडिया पर कोई टिपणी नहीं करता। जिसने भी टिपणी किया, समझो वह फंस गया। अगर दो दिन में एक ही व्यक्ति के द्वारा सोशल मीडिया पर टिपणी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराता है, तो समझ लेना चाहिए, कि आप गलत कर रहे हों। सोशल मीडिया पर कमेंट करने का मतलब अपने आप को कानून के दायरे में लाने जैसा माना जाता है। 18 दिसंबर 25 को भूपेन्द्र कुमार पाल पुत्र राघवेन्द्र पाल निवासी तेनुआ थाना लालगंज ने कोतवाली में विशाल चौधरी नामक व्यक्ति पर पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिपणी के आरोप में मुकदमा कायम कराया था, 19 दिसंबर को भूपेंद्र कुमार पाल ने सरदार सेना के बृजेश चौधरी के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक अत्यंत भड़काऊ पोस्ट करने और खुलेआम सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने, सड़कों पर उतरने तथा देख लेने जैसी धमकियाँ देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। कहा गया कि इस प्रकार की पोस्ट से क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है तथा मुझे एवं मेरे परिवार को गंभीर जान-माल की क्षति होने की प्रबल आशंका है, जिसके चलते मैं मेरा मेरा परिवार अत्यधिक भयभीत एवं मानसिक रूप से व्यथित है। इसी बृजेश चौधरी को कोतवाली से छुड़ाने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी रात में चौधरियों का नेता बनकर कोतवाली पहुंच गए, और छुड़ा भी लाए, लेकिन इसके बाद बृजेश चौधरी ने जो टिपणी किया, वह बृजेश चौधरी को भारी पड़ने वाला है। पंकज यादव लिखते हैं, कि पंकज चौधरी का प्रदेश अध्यक्ष बनना और संजय चौधरी का उनके अतिकरीब होना भविष्य में विधायक की रेस में आगे होने के नाते बृजेष चौधरी की आड़ में संजय चौधरी का वौधरी वोट को अपनी तरफ मोड़ने की राजनीति है। राना दिनेश प्रताप सिंह लिखते हैं, कि किसी की भी मदद करने में जाति और पार्टी से उपर उठकर होनी चाहिए, बस जिसकी मदद की जाए वो सत्य के रास्ते पर हो। बृजेशजी ने कोतवाली से छूटने के बाद जो प्रतिक्रिया दिया, वह स्वागत योग्य है। आनंद उपाध्याय लिखते हैं, जो समीकरण संजय चौधरी लगा रहे हैं, आज की घटना से सब समझ में आ रहा, एक तो आप को भाजपा से टिकट मिलना नहीं, और अगर बाईचांस मिल भी गया तो जीतना नही, यही मेरा समीकरण है, क्यों कि मैं भी रुधौली का हूं। शोभानाथ यादव लिखते हैं, कि अब अगले विवाद की बारी है। जिला पंचायत अध्यक्ष क्यों बृजेश पटेल के समर्थन में उतरे, जब कि यह भाजपाई है। भाजपा के सुनील सिंह लिखते हैं, कि भाजपा के पूर्व राष्टीय मंत्री एवं असम प्रभारी हरीश द्विवेदी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक टिपणी करने वाले व्यक्ति की गैरकानूनी तरीके से मदद करने वाले बृजेश पटेल जब अपने ही आपराधिक मामलों में पुलिस द्वारा कोतवाली में बैठाया गया, तो उनके समर्थन में जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी का पहुंचना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। पार्टी की विचारधारा और अनुषासन के साथ विष्वासघात और गददारी करने वाले ऐसे लोगों को समय आने पर जनता लोकतांत्रिक और सवैधानिक तरीके से करारा जबाव देगी। सुधांशु लिखते हैं, कि हरीश द्विवेदी के खिलाफ की गई अभद्र टिपणी एक सोची समझाी साजिश का हिस्सा है। यदि जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरीजी वास्तव में ऐसे लोगों का समर्थन कर रहे हैं, तो यह अत्यंत दुर्भायपूर्ण है। कहते हैं, कि कार्यकर्त्ता अपने नेता के मान और सम्मान से कोई समझौता नहीं करेंगे।
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