पहले बीएसए, अब हेडमास्टर और प्रधान पर लगा रसोईया की इज्जत लूटने का आरोप
-गाय गोरु चलाने वाले अगर चिल्लाने पर मदद को न पहुंचते तो महिला रसोईया की इज्जत लूट ली जाती
-दोनों ने साड़ी खोलने को कहा, जब नहीं खोला तो ब्लाउज फाड़ दिया, भागकर किसी तरह बचाई लाज, घटना कम्पोजिट प्राथमिक विधालय बैरीखाला गौर में 16 मई 25 को दिन में डेढ़ बजे हुई
-पीड़ित महिला पहले दुबौला चौकी गई, महिला की नहीं सुनी गई, फिर वह कप्तानगंज थाने गई, वहां भी तहरीर दिया, लेकिन उसे डस्टबिन में डाल दिया गया, बीएसए के पास फरियाद लेकर गई, कुछ नहीं किया, एसपी के पास गई
-इस विधालय में 14 साल तक बच्चों को खाना बनाकर खिलाने वाली रसोईया के पति विकलांग, दो लड़की और एक बेटा, दो हजार में महिला परिवार को पाल रही थी, घटना के बाद मारे शर्म के महिला न तो घर से बाहर निकल रही, और न स्कूल ही जा रही
बस्ती। अब तो दो हजार मानदेय पाने वाली महिला रसोईयों की इज्जत भी सुरक्षित नहीं रह गई। महिला शिक्षिका पहले से ही असुरक्षित महसूस कर रही है, और अब रसोईयों की इज्जत भी सुरक्षित नहीं रह गई। जिस भी बीएसए, हेडमास्टर और प्रधान ने चाहा, उसी ने रसोईया पर हाथ डालना चाहा। इससे पहले बीएसए पर एक रसोईया की इज्जत पर हाथ डालने का आरोप लग चुका है। वही आरोप विधालय के हेडमास्टर और गांव के प्रधान पर एक अन्य रसोईया ने लगाकी सनसनी फैला दिया। बकौल रसोईया दोनों अपनी मकसद में सफल भी हो जाते हैं, अगर उसके चिल्लाने पर गाय गोरु चराने वाले मदद के लिए न पहुंचते। जब तक मदद के लिए तब तक ब्लाउच को फाड़ा जा चुका था, साड़ी खोलने की तैयारी हो रही थी, वह तो भला हो जानवर चराने वाले दो तीन व्यक्तियों का जिन्होंने एक महिला को बेआबरु होने से बचा लिया। हेडमास्टर और प्रधान पर आरोप हैं, इन दोनों ने एक ऐसी महिला रसोईया के इज्जत पर हाथ डालने का प्रयास किया, जिसका पति विकलांग हैं, और जिसके दो बेटी और एक बेटा हैं, और महिला पर परिवार चलाने की जिम्मेदारी है। महिला ने रोते हुए बताया कि वह ब्राहृमण परिवार की बहु हैं, पति विकलांग हैं, कुछ कमा नहीं सकते, बेटे और बेटियों का बोझ उनपर है। किसी तरह दो हजार में वह परिवार का भरण-पोषण पिछले 14 साल से करती आ रही है। कहती है, कि जब से उसके साथ में घटना हुई, तब से वह मुंह पर कपड़ा रखकर बाहर निकलती है। बताया कि 16 मई 25 को प्रधान और हेडमास्टर विधालय में मौजूद थे, जैसे ही वह बच्चों को खिलाकर घर जाने के लिए तैयार हुई, तो प्रधान और हेडमास्टर ने रुकने को कहा, वह रुक गई, उसे सपने में भी यह उम्मीद नहीं थी कि रोकने के पीछे दोनों की इतनी घृणित मंषा भी हो सकती है। दोनों लोग एक कमरे में ले गए, और वहां पर अष्लील हरकते करने लगें, वस्त्रहीन करने की नीयत से हमला किया, विरोध करने पर गाली देते हुए मारा पीटा और ब्लाउज फाड़ दिया, इसी बीच उसके चिल्लाने पर जानवर चराने वाले दो तीन लोग मदद के लिए पहुंच गए। महिला का कहना है, कि वह मदद मांगने के लिए पहले दुबौला चौकी गई, महिला की नहीं सुनी गई, फिर वह कप्तानगंज थाने गई, वहां भी तहरीर दिया, लेकिन उसे डस्टबिन में डाल दिया गया, बीएसए के पास फरियाद लेकर गई, कुछ नहीं किया, एसपी के पास गई। बीएसए के सीयूजी 9453004117 और हेड मास्टर के 9628722285 पर पक्ष लेने का प्रयास किया, लेकिन रिसपांस नहीं मिला, रिसपांस मिलने पर पक्ष छाप दिया जाएगा। प्रधान उमेश चंद्र ने बताया कि आरोप पुरी तरह बेबुनियाद हैं, जिस समय का महिला ने घटना का जिक्र किया, उसके कई घंटा पहले वह अपने मित्र के साथ वाल्टरगंज में रिष्ता देखने गए थे, कहा कि चूंकि बच्चों की संख्या कम हो रही थी, और डीएम साहब का आदेश भी हैं, कि अगर बच्चे कम है, और रसोईया अधिक हैं, तो छटनी किया जाए, इसे देखते हुए हेडमास्टर ने रसोईया को कल से आने के मना कर दिया। अगर आरोप सही है, तो बहुत ही गंभीर विषय हैं, और अगर आरोप गलत हैं, तो सारा दोष महिला का माना जाएगा। वैसे भी प्रधान कह चुके हैं, कि वह किसी भी जांच का सामना करने को तैयार है। महिला ने हेडमास्टर और प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
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