‘मंत्री’ ने कहा कि ‘खाद’ की ‘कालाबाजारी’ हो रही, ‘सांसद’ ने कहा नहीं हो ‘रही’!

बस्ती। जनप्रतिनिधियों को धान और खाद के घोटालेबाज इतना प्रिय होते हैं, कि सांसद से लेकर विधायक तक इनके पक्ष में खड़े नजर आते है। भले ही किसान चाहें जितना चिल्लाता और रोता रहे, लेकिन माननीयों के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता, मानो इन्हें किसानों ने नहीं बल्कि घोटालेबाजों ने सांसद और विधायक बनाया हो। मंडल का किसान एक-एक बोरी खाद के लिए घंटों लाइन में लगा रहता, एक-एक बोरी के लिए रोता है, फिर भी उसे खाद नहीं मिलता, खाद की कालाबाजारी करने वाले खुले आम गोरखधंधा कर रहे हैं, लेकिन न जाने क्यों माननीयों को गांरखधंधा दिखाई नहीं देता, डेली हजारों बोरी खाद बार्डर पार होती है, लेकिन न तो सांसद और न विधायक ही बोलते नजर आते। यह लोग किसानों के प्रति इतना संवेदनहीन और खाद की कालाबाजारी करने वालों के संवेदनशील हो गए हैं, कि यह मंत्री तक को झूठा साबित करने में लगें रहते हैं। कृषि मंत्री कह रहे हैं, कि जनपद सिद्धार्थनगर में खाद की कालाबाजारी हो रही, खाद बार्डर पार नेपाल जा रहा हैं, लेकिन सांसदजी का बयान आता है, कि कोई कालाबाजारी नहीं हो रही हैं, अब या तो मंत्रीजी सही है, या फिर सांसदजी। मंत्रीजी को इस लिए किसान सही मान रहा है, क्यों कि उन्होंने सिद्धार्थनगर के जिला कृषि अधिकारी मो. मुजम्मिल और अपर जिला कृषि अधिकारी को खाद की कालाबाजारी के आरोप में निलंबित कर दिया, क्या इसके बाद भी सांसदजी यह कहेगें कि खाद की कालाबाजारी नहीं हो रही है? यह वही सांसद हैं, जिनके रहते जनपद सिद्धार्थनगर में प्रदेश का सबसे बड़ा धान का घोटाला हुआ, पीसीएफ के डीएस और एआरएम तक को निलंबित होना पड़ा, अगर किसी जनपद में धान का इतना बड़ा घोटाला और खाद की कालाबाजारी होती है, तो इसके लिए जिले के सभी जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार माना जाता है। किसानों का दावा हैं, कि अगर पालजी और अन्य विधायक चाह लिए होते तो धान का इतना बड़ा घोटाला और खाद की कालाबाजारी नहीं हो पाती? धान के सबसे बड़े घोटालेबाज पीसीएफ के डीएस अमित चौधरी को तो सांसदजी का खास हमदर्द बताया जाता है। पालजी आपके जिले का किसान जानना चाहता हैं, कि आखिर क्यों आप घोटालेबाजों के साथ खड़े रहते, अगर आप के रहते आप के जिले में सबसे बड़ा धान घोटाला होता, खाद की कालाबाजारी होती, टेंडर में धांधली होती है, सरकारी धन का दुरुपयोग होता तो क्या आपकी जिम्मेदारी इसे रोकने की नहीं बनती? आखिर आप एक सांसद हैं, जनता आप से हर मामले में ईमानदारी की अपेक्षा करती, वरना आपके सांसद होने का क्या मतलब? भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक दहाड़ने वाले शोहरतगढ़ के विधायक विनय वर्मा भी न जाने क्यों धान घोटाला और खाद की कालाबाजारी के मामले में चुप रहे, अपने निधि की जांच को लेकर यह सदन में बोल सकते हैं, और इसके लिए कमिश्नर को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं, लेकिन खाद की कालाबाजारी को लेकर सदन में नहीं बोल सकते। हालांकि यह कई बार ‘दिशा’ की बैठक और सर्किट हाउस में टेंडर माफिया और पीडब्लूडी के एक्सईएन की क्लास ले चुके है। लेकिन इनका खाद की कालाबाजारी को लेकर अपेक्षित आवाज न उठाना चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसा लगता है, कि मानो सिद्धार्थनगर के अधिकांष जनप्रतिनिधियों का घोटालेबाजों और खाद की कालाबाजारी करने वालों का आर्शिवाद प्राप्त हैं। इन लोगों की खामोशी का मतलब जिले की जनता चुनाव में चंदा लेना मान रही हैं। कहती है, कि लगता ही नहीं इस जिले में सांसद जगदम्बिकापाल और विधायक विनय वर्मा जैसे जनप्रतिनिधि को वहां की जनता ने चुना। जनपद सिद्धार्थनगर के खाद के रिटेलर्स चिल्लाते रह गए कि जब उन्हें होलसेलर्स ही 290 रुपया बोरी दे रहा है, तो वह कहां से 266 में बेचेगें, अगर उन्होंने 300 रुपये में बेच दिया तो कौन बुरा किया, लेकिन जिला कृषि अधिकारी उन होलसेलर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया, जिसने हम लोगों से प्रति बोरी 26 रुपया अधिक लिया, वहीं पर आठ रुपया अधिक लेने वाले 56 रिटेलर्स का लाइसेंस निलंबित कर दिया, बहाल भी नहीं किया, जब कि इसे लेकर रिटेलर्स ने धरना-प्रदर्शन तक किया। कहा कि डीओ ने संगठन को कमजोर करने के और अपनी कमियों को छिपाने के लिए रिेटेलर्स को बलि का बकरा बनाया। लेकिन खुद की गर्दन फंस गई।  इन्हें क्या मालूम था, कि होलसेलर्स प्रेम इन्हें ले डूबेगा। इन लोगों का कहना है, कि चूंकि होलसेलर्स अधिकारियों और नेताओं को चंदे के रुप में मोटी रकम देते हैं, इस लिए इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, यह भी कहना है, कि समिति के सचिव लोग खुले आम प्रति बोरी 40 रुपया अधिक लेकर बेच रहे, लेकिन इनकी जांच नहीं होती। अगर सांसदजी और विधायकगण होलसेलर्स प्रेम में न फंसे हुए होते और रिटेलर्स की आवाज को सुन लिए होते तो खाद की कालाबाजारी नहीं होती, और न दो अधिकारी ही निलंबित होते। देखा जाए तो जनपद सिद्धार्थनगर में सबसे अधिक भ्रष्टाचार के मामले में विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई होती, यह इस बात का सबूत हैं, यहां के अधिकंाश नेता भ्रष्टाचारियों का साथ और उनका बचाव कर रहे है।