कमालः ‘एसआईआर’ में वोट ‘कटे’, पंचायत में ‘बढ़े’

  • -इसे देखते हुए ‘एसआईआर’ का फारमूला ‘पंचायत’ चुनाव में भी ‘अपनाया’ जा ‘सकता, चुनाव आयुक्त ने इसका संकेत वीसी में अधिकारियों को दिया
  • -पंचायत चुनाव में अब 18 लाख 68 हजार 929 के स्थान पर पंचायत चुनाव में 19 लाख 58 हजार 332 मतदाता वोट करेगें, यानि 2021 के मतदाताओं की संख्या से 89403 अधिक मतदाता मतदान करेगें, इनमें सबसे अधिक 46711 पुरुष और 42692 महिला मतदाता, 4.78 फीसदी मतदाताओं की बृद्वि हुई
  • -पंचायत चुनाव में मतदाताओं का बढ़ना और विधानसभा चुनाव में घटना यह साबित करता है, कि बीलएल और अधिकारियों ने जो ईमानदारी एसआईआर में दिखाया, वह पंचायत चुनाव के मतदाता सूची में नहीं दिखाया
  • -प्रधानी और बीडीसी का चुनाव लड़ने और जीतने वालों ने जमकर बीएलओ से फर्जी मतदाता बढ़वाया और विरोधियों का कटवाया
  • -मतदाताओं के बढ़ने का रिकार्ड विकास खंड रामनगर ने बनाया, यहां पर रिकार्ड 11.11 फीसद वोटा बढ़े, जिसमें 9.43 पुरुष एवं 10.90 फीसद महिला वोटर्स बढ़े, जबकि किसी में 3.02 तो किसी ब्लॉक में 3.42 फीसद मतदाता बढ़े

बस्ती। एसआईआर की सफलता को देख इसका फारमूला पंचायत चुनाव के मतदाता सूची में भी अपनाया जा सकता है, इसका संकेत वीसी में चुनाव आयुक्त की ओर से अधिकारियों को दिया जा चुका है। कहा गया कि भले ही चुनाव की तिथि को आगे बढ़ाना पड़े, लेकिन पंचायत चुनाव में भी उसी तरह की मतदाता सूची तैयार होना चाहिए, जिस तरह विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हुआ। अगर चुनाव आयुक्त का फारमूला काम कर गया, तो न जाने कितने प्रधान और बीडीसी के प्रत्याशियों की फर्जी मतदाताओं के सहारे चुनाव जीतने की मंषा पर पानी फिर सकता है। मतदाताओं के बढ़ने का रिकार्ड विकास खंड रामनगर ने बनाया, यहां पर रिकार्ड 11.11 फीसद वोटर्स बढ़े, जिसमें 9.43 पुरुष एवं 10.90 फीसद महिला वोटर्स षामिल, जबकि किसी में 3.02 तो किसी ब्लॉक में 3.42 फीसद मतदाता बढ़े। यह कितनी हैरानी की बात हैं, कि एसआईआर में जहां बस्ती में तीन लाख से अधिक फर्जी वोट काटे गए, वहीं पंचायत चुनाव में 89403 मतदाता बढ़ाए गए। पंचायत चुनाव में अब 18 लाख 68 हजार 929 के स्थान पर 19 लाख 58 हजार 332 मतदाता वोट करेगें, यानि 2021 के मतदाताओं की संख्या से 89403 अधिक मतदाता मतदान करेगें, इनमें सबसे अधिक 46711 पुरुष और 42692 महिला मतदाता, 4.78 फीसदी मतदाताओं की बृद्वि हुई। पंचायत चुनाव में मतदाताओं का बढ़ना और विधानसभा चुनाव में घटना यह साबित करता है, कि बीलएलओ और अधिकारियों ने जो ईमानदारी एसआईआर में दिखाया, वह पंचायत चुनाव के मतदाता सूची में नहीं दिखाया। कहना गलत नहीं होगा कि पंचायत चुनाव के मतदाता सूची में बीएलओ और तहसील वालों ने जमकर मलाई काटा। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि पंचायत चुनाव में मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप बीएलओ और तहसील पर लगता रहा, लेकिन एसआईआर में एक भी यह शिकायत नहीं आया कि बीएलओ ने पैसा लेकर नाम काटा या फिर बढ़ाया। यह सच है, कि प्रधान और बीडीसी का चुनाव लड़ने और जीतने वालों ने जमकर बीएलओ से फर्जी मतदाता बढ़वाया और विरोधियों का कटवाया। जहां पर लाखों फर्जी वोट कटना चाहिए था, वहां पर कटने को कौन कहे, हजारों वोट बढ़ा दिया। 4.78 फीसद वोट बढ़ना इस ओर संकेत करता है, कि इस बार के पंचायत चुनाव में जमकर फर्जी मतदान होगा। बीएलओ ने जिससे अधिक पैसा पाया, उसका उतना अधिक वोट बढ़ाया और विरोधियों का काटा। वोट बढ़ाने और विरोधियों का वोट काटने का अलग-अलग रेट निर्धारित रहा। विरोधी और गांव वाले चिल्लाते रह गए, लेकिन पैसे के आगे किसी ने भी नहीं सुनी। पंचायत चुनाव में फर्जी वोट होने का खामियाजा कुल मिलाकर गांव वालों को ही भुगतना पड़ता है। फर्जी वोट डालने को लेकर हिंसा जैसा वातावरण रहता है। मारपीट की घटनाएं बढ़ जाती है। मुकदमों की संख्या बढ़ जाती, गांव का आपसी सौहार्द बिगड़ने लगता है।

1226 ग्राम पंचायत और 2959 मतदान स्थलों पर होने वाले पंचायत चुनाव में मतदातओं की जो स्थित सामने आई, उसके अनुसार 19 लाख 58 हजार 332 मतदाता चुनाव में भाग लेंगे, इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 10 लाख 36 हजार 290 और महिला मतदातओं की संख्या नौ लाख 22 हजार 042 है। हर्रैया के 88 ग्राम पंचायत में 143536, साउंघाट के 90 ग्राम पंचायतों में 146118, रामनगर के 81 ग्राम पंचायत में 146090, विक्रमजोत के 82 ग्राम पंचायतों में 124610, रुधौली के 77 ग्राम पंचायतों में 122341, कप्तानगंज के 53 ग्राम पंचायतों में 84261, बनकटी के 89 ग्राम पंचायतों में 129953, गौर के 110 ग्राम पंचायतों में 180359, परसरामपुर के 108 ग्राम पंचायतों में 171606, बस्ती सदर के 111 ग्राम पंचायतों में सल्टौआ के 107 ग्राम पंचायतों में 161153, कुदरहा के 77 ग्राम पंचायतों में 117022, बहादुरपुर के 89 ग्राम पंचायतों में 141183 एवं दुबौलिया के 64 ग्राम पंचायतों में 100670 मतदाता चुनाव में भाग लेगें। पंचायत चुनाव का एक सच यह भी है, कोई भी प्रत्याशी चाहे वह प्रधान का हो या फिर बीडीसी का ईमानदारी से चुनाव नहीं जीत सकता है। अगर मतदाता किसी ईमानदार को जीताना भी चाहे तो उसे ईमानदार प्रत्याशी नहीं मिलता, पहले तो अधिकांश ईमानदारी दिखाकर और बताकर वोट की भीख मांगते हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें मनरेगा और ग्राम निधि का जस्का लगता है, सारी ईमानदारी धरी की धरी रह जाती है, जो ईमानदार बनने का ढ़ोग रचतें हैं, वही सबसे बड़ा बेईमान निकलता। यह भी सही है, कि जब मतदाता दारु, मीट, मुर्गा और पैसे पर बिकेगा तो प्रधान कहां से ईमानदार होगें। जिस दिन मतदाता अपने वोट की कीमत समझ गया, उस दिन कोई भी बेईमान प्रत्याशी न तो प्रधान और न बीडीसी ही बन पाएगा।