इस तस्वीर को देखकर कुछ ख्याल आया
यह तस्वीर अपने आप में नरेंद्र मोदी की कितनी बड़ी हार है. जिंदगी के कितने ही साल जिस आदमी को खत्म करने में, उसके ख़िलाफ़ अनर्गल झूठ बोलने में, उसके परिवार के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार करने में, उसके ख़िलाफ़ षड्यंत्र रचने में, उसको मटियामेट करने में लगा दिए.
वो आज उनके सामने बैठा है - उन्मुक्त, बेफिक्र, बेख़ौफ़ और मुस्कुरा रहा है.
मोदी को ज़रूर लगता होगा उनकी सारी मेहनत धरी की धरी रह गई
शायद उनको कहीं ना कहीं सच की ताक़त का एहसास होता होगा, समझ आता होगा कि लाखों करोड़ों खर्च करने के बाद भी आख़िर क्या हुआ!
आज उनका चेहरा बेरंग है, हँसी ग़ायब है, और जिसको नेस्तनाबूद करने में सारी ताक़त झोंक दी वो सामने बैठ कर हँस रहा है!
सुप्रियां श्रीनेत
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