बस्ती। वैसे तो भाजपा नेता राजेंद्रनाथ तिवारी के लेटर पेैड के दुरुपयोग होने का खुलासा हो चुका है, लेकिन अब तो पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के भी लेटर पैड के दुरुपयोग होने की खबरें, लगातार आ रही है। चूंकि अब हरीशजी का कद काफी उंचा हो गया और इनके पैड को महत्व भी दिया जा रहा है, कहना गलत नहीं होगा, कि इनके पैड को सर्वोच्च प्राथमिकता षासन स्तर और मंत्रियों के द्वारा देने की जानकारी मिल रही है। अधिकतर पेैड का दुरुपयोग करने वाले वही लोग जो इनके आगे-पीछे लगे रहते है। यह लोग हरीषजी से पूरी कीमत सूदसमेत वसूल कर रहे हैं। सबसे अधिक पैड का दुरुपयोग/उपयोग डूडा में हो रहा है, चूंकि डूडा का कोई माई-बाप नहीं हैं, जो हैं, भी वह किराए के हैं, और किराए पर आने वाला कार्यो के प्रति कितना ईमानदार और सजग रहता है, अगर इसका सच देखना हो तो नगर पंचायत भानपुर में कराए जा रहे घटिया निर्माण के रुप में देखा जा सकता है। हरीषजी की बदनामी इस लिए हो रही है, क्यों कि यह माना जाता है, कि जिस नेता के पैड पर काम आता है, उसमें उसकी भी हिस्सेदारी रहती है। यह खुला खेल है। अगर क्षेत्र के विकास के लिए किसी नेता के पैड का उपयोग किया जाता है, तो जनता और मीडिया उसका खुलकर स्वागत करती हैं, लेकिन अगर धन का बंदरबांट करने के लिए किसी नेता के पैड का इस्तेमाल किया जाएगा तो उसके बदनामी के छीटें उस नेता पर भी पड़ेगें, जिसके पैड का दुरुपयोग/उपयोग किया गया। हालत यह है, कि अगर किसी नेता के पैड पर कोई ठेकेदार या फिर नेता का करीबी काम लाता है, तो उसका 70 फीसद कमीषन और जीएसटी में चला जाता है, काम लाने वाले को 100 रुपये का काम 30 रुपये में करना पड़ता है। जाहिर सी बात हैं, कि जो काम 30 रुपये में किया जाएगा, उसमें कैसे 100 रुपये वाली गुणवत्ता मिलेगी? पैड बेचने वाले नेता और काम लाने वाले ठेकेदार और नेताजी के करीबी भी यह बात अच्छी तरह जानते हैं, फिर भी पैड का खेल हो रहा है। इस पैड के खेल में हरीशजी या अन्य कोई नेता माने या न माने राजनैतिक और छवि का नुकसान तो नेता का ही होता है। यह भ्रष्टाचार ऐसा नहीं जिसे अंजाने में किया गया हो, बल्कि संगठित गिरोह की तरह भ्रष्टाचार हो रहा है। मीडिया का मानना है, कि अगर वाकई हरीशजी ने इसकी समीक्षा गहराई से कर ली तो उन्हें पता चलेगा कि उनकी छवि कोई और नहीं बल्कि उनके लोग ही खराब कर रहे हैं, उन्हें और उनके पैड को बेच रहे है। पैड बेचने का मतलब नेताजी को बेचने जैसा माना जाता है। हरीशजी के दिल में रहने वाले ही सबसे अधिक बदनामी कर रहे है। हरीशजी को एक बार इसका खामियाजा भुगतना भी पड़ा, अगर यह चाहते हैं, कि दूसरी बार न भुगतना पड़े तो पैड को तिजोरी में संभाल कर रखना होगा, और प्रयास करना होगा, कि पैड का उपयोग पीड़ितों और जरुरतमंदों के लिए हो। क्यों कि अब आप के पैड की कीमत किसी कैबिनेट मंत्री से कम नहीं है। अपने आसपास के लोगों पर कड़ी नजर रखिए हो सकता है, कि जिस पर आप सबसे अधिक भरोसा कर रहे हो, वही अपने लाभ के लिए आपकी छवि को खराब कर रहा है, आपके लेटर पैड को बेंच रहा है। यह लोग उन भ्रष्ट असली/नकली प्रमुखों और असली/नकली नगर पंचायत अध्यक्षों से भी ज्यादा घातक हैं, जिन लोगों के भ्रष्टाचार के कारण आप तीसरी बार सांसद नहीं बन पाए। यह सुझाव एक मीडिया कर नहीं बल्कि उन हजारों लोगों का हैं, जो आप को बिकते हुए और आपकी छवि को खराब होते नहीं देखना चाहते। यह लोग आप को उचाईयों पर देखना चाहते है। यह लोग आप से तो नहीं कह सकते, लेकिन मीडिया से अवश्य कहते है। हरीशजी अपने हजारों शुभचिंतकों की बात को अनसुना मत करिए। अगर आप एक बार उन कार्यो की समीक्षा कर ले, जो कार्य आपके लेटर पैड पर लाए गए हैं, सारी सच्चाई सामने आ जाएगी, इसकी शुरुआत नगर पंचायत भानपुर और इस क्षेत्र में डूडा से कराए गए कार्यो से करिए।