बस्ती। नगर पंचायत भानपुर में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े करने वाले और सिर्फ ग्राम बेदौला और नौगड़वा की सड़कों की जांच कराने वाले भाजपा नेता और ठेकेदार मनोज सिंह पर ही सवाल उठ रहे हैं, कहा जा रहा है, अगर भाजपा नेता को घटिया गुणवत्ता वाली सड़कों की जांच करानी  ही थी, तो क्यों नहीं जगदीषपुर उर्फ नौगढ़वा में नाला निर्माण जिसमें भारी अनियमितता की गई, तहसील से फायर स्टेशन मोड़ तक नाला निर्माण मेसर्स अभिमन्यू वैष्य के द्वारा कराए गए निर्माण, भानपुर एसबीआई के सामने तहसील तक घटिया नाला निर्माण को मेसर्स ओजस कांस्टक्षन और चौथे घटिया नाला निर्माण  भानपुर काली मंदिर से नौगढ़वा मार्ग, बन मोहल्ला तक यह निर्माण मेससे बवंडली सिंह के द्वारा कराया गया, की भी जांच कराने को लिखना चाहिए था? अगर मनोज सिंह वाकई नगर पंचायत भानपुर में हो रहे घटिया निर्माण करने वाली फर्मो और उसके ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करवाना और ब्लैक लिस्टेड करवाना चाहते हैं, तो इन्हें उक्त चार नाला निर्माण की जांच करने को भी लिखना चाहिए था, सिर्फ दो सड़कों की जांच कराने और अन्य की न कराने से पता चलता हैं, कि इसी बहाने यह अपनी छवि को सुधारना चाहते हैं। सवाल तो यह भी उठ रहा है, कि मीडिया में आने के बाद क्यों जांच करवाई जा रही? क्यों नहीं इससे पहले जांच के लिए लिखा गया? ऐसा भी नहीं कि इन्हें दोनों घटिया सड़कों की जानकारी इन्हें न हो। अगर कोई ठेकेदार एक दूसरे ठेकेदार की सड़कों की जांच कराता है, तो सवाल तो उठेगा ही। क्षेत्र की जनता में इस शिकायत को लेकर कानाफूसी हो रही है, और कहा जा रहा है, कि अब तो ठेकेदारों में जंग छिड़ने जा रहा है। शिकायत करने और जांच कराने की बाढ़ सी आ जाएगी, एक ठेकेदार दूसरे ठेकेदार के दुष्मन बन जाएगें, यह पहली बार देखा गया कि एक ठेकेदार ने दूसरे ठेकेदार के कार्यो की जांच करवा रहा है। जांच कराने का यह निर्णय किसका होगा, यह तो नहीं मालूम, लेकिन इससे ऐसी दुष्मनी का आगाज होगा, जिसकी चपेट में पता नहीं कितने लोग आ सकते है। मनोज सिंह और इनके आका को यह नहीं भूलना चाहिए कि एक जैसा दिन कभी भी किसी का नहीं होता, यह इन दोनों से अधिक कोई नहीं जानता। ठेकेदारों में अगर एकता देखनी हो तो आरईडी और पीडब्लूडी के ठेकेदारों में देखा जा सकता है। यह लोग आपस में खूब लड़ते हैं, लेकिन एक दूसरे का नुकसान नहीं करते हैं, इनकी लड़ाई अधिकारियों से हो सकती है, लेकिन ठेकेदारों से कभी नही। नगर पंचायत भानपुर के लोगों को यह बताने की आवष्यकता नहीं हैं, कि कौन ठेकेदार गुणवत्तापरक कार्य करवा रहा है, और कौन गुणवत्ताहीन। अभी भी समय हैं, और अगर समय रहते इसे नहीं संभाला गया तो फिर शिकायतों का दौर शुरु हो जाएगा, षिकायत करने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए, कि एक ठेकेदार दूसरे ठेकेदार की अच्छाईयों और बुराईयों से पूरी तरह वाकिब होता है। जो मजा और लाभ एकता में हैं, वह बिखराव में नहीं। इस लिए अगर पैसा कमाना है, तो एकता बनाए रखना होगा, वरना कार्रवाई का दंश झेलने को तैयार रहिए। चीजें अभी आउट आफ कंटोल नहीं हुई। समझदारी डैमेज को कंटोल करने में हैं, न की डैमेज करने में। कोई ठेकेदार यह नहीं कह सकता कि उसने नगर पंचायत और डूडा को न लूटा हो। जिसको जहां मौका मिला उसने मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। कहने का मतलब अगर पिछले छह साल में 20 करोड़ में से लगभग 12-15 करोड़ करोड़ का बंदरबांट हुआ तो यह धन किनके जेबों में गया, जाहिर सी बात हैं, कि अधिकांश धन ठेंकेदारों और उनके आकाओं के जेबों में गया होगा, और जब हमाम में सभी नगें हैं, तो शिकायत कैसी? जिस तरह पहले मिल बैठकर खाते थे, आगे भी खाते रहिए। लेकिन यह तभी होगा, जब ठेकेदारों में एकता होगी। मीडिया से मत डरिए, और जब अभी तक नहीं डरे तो अब क्यों डर रहे हैं? जब कि आप लोग आर्थिक और राजनेैतिक रुप से मजबूत हो चुके हैं, बड़ी से बड़ी जांच को प्रभावित करने में आपकी और आपके आका के पास क्षमता है। मीडिया के लिखने से क्या होता?