बस्ती। कहना गलत नहीं होगा, कि डूडा, भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के लिए एक्सप्रेसवे बन गया, इस पर ठेकेदार रुपी चालक बिना परमिट और बिना डीएल के 140 की स्पीड से गाड़ी चला रहें है। बस इन्हें टोलटेक्स देना होता है, टोलटेक्स नामक कमीशन देने के बाद दुर्घटना और स्पीड पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इस एक्सप्रेस वे पर ही ठेकेदार नेताओं के पैड पर करोड़ों का काम लाते हैं, और लखनऊ से बस्ती नगर पंचायत के एनओसी से लेकर वाया डूडा कार्यालय तक पचपेड़ियां गाड़ी चलाकर पहुंचते है, और वहां करोड़ों का सौदा करते है। इस शानदार एक्सप्रेसवे पर हर ठेकेदार चलना अपनी शान समझता है, जो लखनऊ से करोड़ों का काम लाता है। इसी एक्सप्रेसवे पर चलकर अब तक न जाने कितने ठेकेदार कहां से कहां पहुंच गए। सवाल उठ रहा है, कि क्या डूडा बेलगाम घोड़े की तरह यूंही चलता रहेगा? आखिर यह विभाग इतना अनियत्रित क्यों हैं? जाहिर सी बात कि अगर यह विभाग अनियत्रित हैं, तो चाहें करोड़ों का बजट हो या गाड़ी दुर्घटना होना लाजिमी है। इस विभाग पर न तो अधिकारियों का कोई नियंत्रण है, और न नेताओं का, आखिर इतने महत्वपूर्ण विभाग को क्यों बेलगाम छोड़ दिया गया? क्यों नहीं बीडीए की तरह इसमें भी सदस्य नामित किए गए? भले ही इस विभाग की बागडोर एसडीएम राजेश यादव के पास हो, लेकिन उसका नियंत्रण कोई और करता है। अरबों रुपये के बजट वाले इस विभाग को भ्रष्ट बाबू और भ्रष्ट जेई चला रहे हैं, एसडीएम साहब के पास इतना समय नहीं रहता कि वह करोड़ों के प्रोजेक्ट की मानिटरिंग तक कर सकेे, भौतिक सत्यापन करना तो दूर की बात है। सच तो यह है, कि एसडीएम साहब को यह तक नहीं मालूम होगा, कि डूडा के कितने प्रोजेक्ट संचालित हो रहे हैं, और कहां-कहां निर्माण कार्य हो रहा है। नगर पंचायतों से अधिक डूडा में भ्रष्टाचार होता है, तभी तो बेैदोला की सड़क एक माह में और नौगढ़वा की पांच माह में टूट गई। एसडीएम साहब को तब सड़क टूटने की जानकारी हुई, जब मीडिया ने बताया। जांच के आदेश भी दिए, अब सवाल उठ रहा है, कि जो काम पीओ डूडा/एसडीएम को करना चाहिए, वह काम मीडिया कर रही है, अब आप लोग इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं, कि जिस विभाग के निर्माण कार्य को कोई देखने कोई नहीं आता है, और बिना सत्यापन और बिना मापी के लाखों रुपये का बिल बन जाता है, और भुगतान भी हो जाता हो, तो ठेकेदार जैसा चाहेगा वैसा निर्माण करेगा ही। यह वही विभाग हैं, जिसके जेई पर आवास के नाम पर 20 हजार से लेेकर 50 हजार तक का घूस लेने के प्रमाणित मामले सामने आ चुके है। नगर पंचायत भानपुर में डूडा के दीपक गौड़ नामक जेई थे, इनके भ्रष्टाचार और इनके तबादले को लेकर जैसे ही भाजपा के नितेश शर्मा ने अभियान चलाया और बस्ती से लेकर लखनउ तक लिखा-पढ़ी किया, वैसे ही भाजपा के भ्रष्ट नेता इनके पीछे पड़ गए, किसी तरह गौड़जी को भानपुर से हटना पड़ा, लेकिन उसके बाद विभाग ने इस भ्रष्ट जेई को भ्रष्टाचार करने का उपहार देते हुए जिलेभर का प्रभार दे दिया, अब इस जेई के अंडर में जिले के सभी जेई हैं, कहने का मतलब इस विभाग में जो जितना पड़ा भ्रष्टाचारी और कमाउपूत होता है, उसे सजा नहीं बल्कि उपहार दिया जाता है। इस जेई के भ्रष्टाचार की उच्च गुणवत्ता को देखकर सभी जेई के उपर की कुर्सी पर बैठा दिया गया। यह विभाग असल में ठेकेदारों, नेताओं और अधिकारियों के लिए सबसे बड़ा चारागाह साबित हो रहा है। खास बात यह है, कि जो ठेकेदार नगर पंचायत भानपुर का है, वही डूडा का भी है। यह वही विभाग हैं, जिसके कार्यालय में हिस्सा को लेकर अवर अभियंताओं और सुपरवाइजर में मारपीट हुआ, तहरीर दिया गया, पुलिस तक आई। अब आप समझ सकते हैं, कि जिस विभाग में कमीशन को लेकर आपस में मारपीट होता हो, उस विभाग में गुणवत्तापरक काम करना और करवाना कितना कठिन है। सच तो हैं, कि नगर पंचायतों में तो चेयरमैन की जिम्मेदारी हैं, लेंकिन डूडा में वह भी नहीं है। किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं, जिसकी जिम्मेदारी हैं, उसके पास समय का अभाव हैं, और इसी का लाभ डूडा के बाबू से लेकर जेई और ठेकेदार तक उठाते है। इस विभाग की खासबात यह है, कि इसमेे सबसे कम हिस्सेदार होते है। इसी लिए नेता और उनके ठेकेदार इस विभाग को टारगेट करते है।