बस्ती। अगर रेडक्रॉस सोसाइटी बस्ती का संचालन सिर्फ आधा दर्जन लोग ही करेगें तो सवाल तो उठेगा ही? फिर उन 384 सदस्यों के होने का क्या मतलब? सालाना बेैठक न बुलाना और आधा दर्जन लोग मिलकर अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों का चयन कर लेने से सोसायटी का मकसद सफल नहीं हो सकता है। बार-बार एक ही स्थान पर निर्णय लेना यह साबित करता है, कि अन्य सैकड़ों सदस्यों का कोई मतलब नहीं। पहले बिना अध्यक्ष के इस्तीफा मंजूर के दूसरे अध्यक्ष को कुछ लोग मिलकर चुन लिया गया, जो अपने आप में ही सवाल खड़ा करता है। पहले अनियमित रुप से अध्यक्ष चुना गया और फिर अनियमित रुप से कार्यकारिणी का गठन किया गया। क्या यह मनमानेपन को नहीं दर्शाता है। जिन पदाधिकारियसें का चयन आम सभा की बैठक में होना चाहिए, अगर उसका चयन चंद लोग करते हैं, तो सवाल तो उठेगा ही, पता नहीं क्यों सबको साथ में लेकर चलने की प्रथा नहीं अपनाई जाती है? इस संस्था का चुनाव हुए लगभग दो साल हो गए, और अभी तक एक बार भी आम सभा की बैठक नहीं बुलाई गई, जब कि अब तक दो बार बैठक हो जानी चाहिए थी, लेकिन एक बार भी नहीं हुई, और नये अध्यक्ष का चयन भी हो गया और नई कार्यकारिणी का गठन भी हो गया, ऐसे अध्यक्ष होने और कार्यकारिणाी का सदस्य होने से क्या फायदा जिसका समर्थन 384 सदस्यों को मिला हो, इसका मतलब यह हुआ कि नई कार्यकारिणी को मात्र छह लोग ही मान्यता देते हैं, 378 लोग नहीं देते। एक ऐसी कार्यकारिणी के होने से क्या फायदा जिसकी विधिक मान्यता न हो। सदस्यों को आज तक समझ में नहीं आया, कि क्यों नहीं सबको साथ में लेकर चला जाता? और क्यों नहीं आम सहमति से पदाधिकारियों का चयन होता? क्यों इसका चयन कुछ खास लोग ही करते? आखिर इसके पीछे क्या मंशा है? वैसे भी कहा गया हैं, कि समाज सेवा के लिए पद का होना आवष्यक नहीं हैं, अगर इसके बाद भी लोग पद के लिए परेषान और लालायित रहते हैं, तो उनके परेषान होने की वजह समझ में आती। बार-बार कहा जाता है, कि रेडक्रास सोसायटी चंद लोगों की नहीं हैं, बल्कि उन लोगों की जिन्होंने इस संस्था को अपना बहुमूल्य समय दिया। यह रेडक्रास सोसायटी समाज सेवा के लिए जानी जाती है, न कि पद के लिए। अगर पद को आपस में ही बंाट लेना मकसद हैं, तो फिर चुनाव क्यों कराया गया? यह रेडक्रास सोसायटी चंद लोगों की नहीं होनी चाहिए, बल्कि सबकी होनी चाहिए। यही गलती प्रमोद चौधरी ने किया, और अब वही गलती बार-बार दोहराई जा रही है, जिसके चलते इस संस्था की छवि को नुकसान पहुंच रहा है, और इसके लिए उन लोगों को जिम्मेदार माना जा रहा है, जो बंद कमरे में जो चाहते हैं, वही करते आ रहे है।

कार्यकारिणी की बैठक एक नवंबर 2026 को आयोजित हो जाती है, और सदस्यों को पता ही नहीं चलता, उन्हें मीडिया के जरिए पता चलता है। यह भी अपने आप में हैरान करने वाली है। बैठक में संगठन के कार्यों को विस्तार देने, मानवता एवं समाजसेवा की भावना को बढ़ावा देने और जनहितकारी गतिविधियों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक में संतोष सिंह के ए.जी.एम पद से इस्तीफे के बाद उनके स्थान पर उमेश कुमार श्रीवास्तव को नया ए.जी.एम बनाए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

इसके साथ ही रेडक्रॉस की गतिविधियों को गति देने के लिए पांच उपसमितियों का गठन कर कार्यकारिणी सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। गठित उपसमितियों में चिकित्सा समिति का प्रभारी राहुल श्रीवास्तव, शिक्षा समिति का प्रभारी इमरान अली, आपदा प्रबंधन समिति का प्रभारी अशोक सिंह तथा महिला एवं बाल कल्याण समिति का प्रभारी मुस्लिमा खातून को बनाया गया। वहीं, यूथ एवं जूनियर रेडक्रॉस समिति की जिम्मेदारी उमेश कुमार श्रीवास्तव को सौंपी गई। इस प्रकार उमेश कुमार श्रीवास्तव को ए.जी.एम पद के साथ यूथ एवं जूनियर रेडक्रॉस समिति का प्रभार भी दिया गया। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने इन प्रस्तावों पर सर्वसहमति व्यक्त करते हुए उन्हें पारित किया। सचिव रंजीत श्रीवास्तव ने कहा कि उपसमितियों के गठन से स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, आपदा राहत, महिला एवं बाल कल्याण तथा युवाओं की सहभागिता के क्षेत्र में रेडक्रॉस की भूमिका और मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि रेडक्रॉस सोसाइटी का उद्देश्य जरूरतमंदों की सहायता करना और समाज में सेवा, सहयोग तथा मानवता की भावना को मजबूत करना है। नई जिम्मेदारियों के साथ संगठन की सामाजिक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।