कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला कुंभ की तर्ज पर होगा मेला, आयेंगे मुख्यमंत्री

मेला में 40 लाख श्रद्धालु आने की संभावना, सुरक्षा के लिए क्षेत्र में 25 थाने, डिजिटल कंट्रोल रूम,तीसरी आंख की नजर में होगा मेला

ओमप्रकाश गौतम
गढ़मुक्तेश्वर: पौराणिक कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला को हर साल से बेहतर कुंभ मेला की तर्ज पर आयोजित किए जाने का प्रयास है। मेला में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं मेला को शांति पूर्ण ढंग से संपन्न कराए जाने के लिए 25 थाने बनाए जा रहे है। मेला क्षेत्र के खादर में कच्ची एक्सप्रेसवे बनाई गई है। मेला शुरू होने के एक सप्ताह पहले ही खादर में तंबू नजर आने लगे है। 

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गढ़ गंगा स्नान मेला का इतिहास
साढ़े पांच हजार साल पहले हुए कौरव पांडवों के महाभारत युद्ध के नरसंहार में सैकड़ों परिजन मारे गए तो युद्ध के बाद पांडवों का मन अशांत रहने लगा। पांडवों को विद्वान पंडितों ने पितृ शांति के लिए पूजा अर्चना की सलाह दी। भगवान श्री कृष्ण पांडवों को लेकर गढ़ गंगा के किनारे रेत के मैदान में पहुंचे और एक पखवाड़ा पड़ाव डालकर बताए तिथिवार संस्कारों को पूरा किया था। मेला का महत्व परिजनों की आत्मशांति के लिए चतुर्दशी को दीपदान पिंडदान किया था। 

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मेला को भव्य और धार्मिक बनाया जा रहा
गंगा स्नान मेला किसान मेला के रूप में भी विख्यात है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने मेला की भव्यता के साथ धार्मिक बनाए जाने के आदेश दिए है। मेला के मुख्य सदर में  बाजार की सड़क पर बिजली के खंभों पर फोकस लाइट में त्रिशूल डमरू साफ तौर पर अपनी छटा बखरेंगे। 

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गंगा मेला के होते है पांच में

​​​​पौराणिक गंगा मेला के पांच चरण में तिथिवार होते है। छठ    पर गंगा स्नान कर सूर्य का जल दिया जाता है। गोपाष्टमी को गंगा स्नान कर गऊ पूजा,एकादशी देव उठान को मेला का विधिवत उद्घाटन कर  गंगा स्नान कर हवन पूजा के बाद गंगा आरती तथा चतुर्दशी को मेला का महत्वपूर्ण गंगा स्नान कर एक वर्ष की अवधि में दिवंगतों को दिए लगाए जाते है तथा अगले दिन पूर्णिमा को गंगा स्नान कर श्रद्धालु लौटते है। प्राचीन गंगा स्नान मेला पौराणिक है मगर समय समय पर परंपरा को छोड़ बदलाव भी हो रहे है।

मेला में 25 थाने 30 मचान से होगी सुरक्षा

गंगा किनारे जंगल में आयोजित गंगा मेला में 25 थाने बनाए जा रहे है। गंगा किनारे के अलावा मेला क्षेत्र में   25 फुट ऊंचे मचान पर पुलिस निगहबानी करेंगी। 

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मेला में आयेंगे सूबे के मुख्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के दूसरे काल खंड का अंतिम चरण में है। अगले साल विधान सभा चुनाव होने है। जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा नागर और विधायक हरेंद्र सिंह तेवतिया ने बताया कि मुख्यमंत्री से भेट कर मेला के लिए आमंत्रण किया गया है। 

मुख्यमंत्री की घोषणा परवान नहीं चढ़ी
भाजपा उम्मीदवार कमल सिंह मलिक की चुनावी सभा में आए योगी आदित्य नाथ का 2017 के विधान सभा चुनाव में हेलीकॉप्टर नहीं उतरने दिया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद 5 जुलाई 2017 को गढ़ बृजघाट आए और गढ़ गंगा मेला को राजकीय मेला का दर्जा दिया तथा 2018 को मेला स्थल में पहुंचकर उद्घाटन कर अमरोहा के तिगड़ी ओर गढ़ गंगा मेला को जोड़ने के लिए गंगा पुल बनाए जाने की घोषणा की थी। 2025 पीछे साल भी मुख्यमंत्री मेला में आए और गंगा पुल बनाए जाने की घोषणा को गई। देश प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन की सरकार में गंगा पुल,घाट,नहीं बन पाई।