बस्ती। अगर नगर पंचायत भानपुर और डूडा के साहबों, ठेकेदारों और नेताओं से यह पूछा जाए कि आखिर आप लोगों ने पिछले छह साल में नगर पंचायत वासियों के लिए कौन सा ऐसा विकास किया, जिसे जनता आप लोगों के न रहने पर याद रखे, और यह कहे, कि अमूक एडीएम, ईओ, जेई, ठेकेदार और नेताजी के कार्यकाल में अमूक विकास हुआ, सवाल उठ रहा है, कि क्या किसी एडीएम, ईओ, जेई, ठेकेदार और नेता ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिसे वह माडल के रुप में प्रस्तुत कर सकें? अगर प्रस्तुत कर सकते तो फिर 20 करोड़ कहां गया? क्या क्षेत्र में 20 करोड़ का कार्य दिखाई दे रहा है, अगर दिखाई दे रहा है, तो टूटी-फूटी सड़कें और जमींदोज हो चुकी नाला/नाली। ठेकेदारों और उनके नेता आकाओं के बार में माना जा सकता है, कि यह कभी आईडिएल नहीं बन सकते, क्यों कि इन्हें तो आईडिएल बनना आता ही नहीं इन्हें तो जनता को बेवकूफ बनाकर मलाई काटना आता है। वैसे भी मलाई यह लोग जनता के आईडिएल बनकर क्या करेगें? इन लोगों का आईडिएल जनता नहीं बल्कि लूटपाट करने वाले ठेकेदार और नगर पंचायत भानपुर को बर्बाद करने वाले ईओ और जेई होते है।
अभी तक आप लोगों ने इन लोगों के बड़े-बड़े कारनामें पढ़ और सुन चुके हैं, लेकिन आज हम आप लोगों को ऐसे कारनामें के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे नासमझी में नहीं बल्कि जानबूझकर करोड़ों का घोटाला किया गया, और करोड़ों के इस बंदरबांट में डूडा सहयोगी नहीं बल्कि मुख्य भूमिका नगर पंचायत भानपुर के प्रभारी एडीएम, ईओ, जेई और उन नेताओं की है, जिन्होंने इतने बड़े बंदरबांट की साजिश रची। पीडब्लूडी से लेकर नगर पंचायत भानपुर और प्रशासन तक को अच्छी तरह मालूम था, कि बस्ती से डुमरियागंज के सड़क के चौड़ीकरण करने का प्रस्ताव पीडब्लूडी की ओर से दो साल पहले शासन को भेजा जा चुका। इसके बावजूद घोटालेबाजों ने संगठित होकर भानपुर से सोनहा सड़क के दोनों ओर करोड़ों रुपये का इंटरलाकिगं लगा दिया। जबकि नगर पंचायत भानपुर अच्छी तरह जानती थी, जिस पटरी के दोनों ओर इंटरलाकिगं बिछाई जा रही है, वह परिसंपत्ति नगर पंचायत भानपुर की नहीं बल्कि पीडब्लूडी की है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि नगर पंचायत भानपुर ने पीडब्लूडी से बिना एनओसी लिए इंटरलाकिगं बिछाया कैसे? और प्रषासन ने कैसे इंटरलाकिगं बिछाने की अनुमति दी। प्रशासक के रुप में एडीएम साहब क्या कर रहे थे? क्यों नहीं इन्होंने बिना एनओसी के निर्माण कार्य का रोका, और क्यों फाइलों में इसकी मंजूरी दी गई। ध्यान देने वाली बात यह है, कि डूडा सीसी रोड बनाती है, इंटरलाकिगं रोड नहीं, इस लिए नगर पंचायत यह कहकर नहीं बच सकता कि इंटरलाकिगं डूडा ने बिछाया। सबसे अधिक हैरानी वाली बात यह है, कि 2025 में इंटरलाकिगं बिछाया गया, और 2026 में पीडब्लूडी ने उखाड़कर फेंक दिया। इतना ही नहीं रोड लाइट को भी पीडब्लूडी ने उखाड़कर फेक दिया। सवाल उठ रहा है, कि जब इंटरलाकिगं को उखाड़कर फेकना ही था, तो फिर बिछाया क्यों? और क्यों जनता की गाढ़ी कमाई का बंदरबांट किया और करने दिया? जनता की गाढ़ी कमाई का बंदरबांट करने का इससे बड़ा उदाहरण नगर पंचायत भानपुर में और नहीं मिल सकता। हालांकि इसके लिए जनता भी जिम्मेदार हैं। एक डीएम ने कहा भी था, कि जब तक जनता गलत चीजों का विरोध नहीं करेगी, उन्हें मालूम नहीं होगा, कि गलत हो रहा है, क्यों कि गलत सही काम जनता के सामने हो रहा हैं, और जनता के लिए ही हो रहा, ऐसे में अगर जनता विरोध नहीं करेगी तो जनता की गाढ़ी कमाई को लोग लूटेंगें ही। जनता की इसी कमजोरी का फायदा भ्रष्ट स्थानीय ठेकेदार और इनके आका किस्म के नेता उठाते है। अब आप लोग समझ गएं होगें, कि क्यों रुधौली की जनता से नेता और उनकी पत्नी को तीन बार हार का सामना करना पड़ा। लोगों का कहना है, कि भाजपा नेता और नेताजी के करीबी मनोज सिंह को इसकी भी जांच करवानी चाहिए, अगर इन्होंने नौगढ़वा और बेदौला सड़कों की तरह इसकी जांच नहीं कराई तो मान लिया जाएगा, कि इस बंदरबांट में वह भी षामिल है। अगर इन्हें भविष्य में नगर पंचायत भानपुर के चेयरमैन का चुनाव लड़ना है, तो जनता के बीच वफादारी दिखाने का इससे सुनहरा अवसर नहीं मिलेगा। अगर इन्हें क्षेत्र की जनता का हीरो बनना हैं, तो इन्हें इंटरलाकिगं की जांच अवश्य करानी चाहिए। जनता का दिल जीतना है, और बेहतर छवि बनानी हैं, तो इसके जांच की पहल मनोजजी को ही करनी पड़ेगी। अपनी छवि सुधारने का स्थानीय विधायक राजेंद्र चौधरी के लिए भी एक मौका/अवसर है। इसके साथ ही सपा से चेयरमैन का चुनाव लड़ने और चेयरमैन बनने का सपना देखने वाले एनपी सिंह, रामतीरथ यादव, राजकुमार सोनी और अंकित पांडेय के लिए भी इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा, सभी विपक्ष के लोगों को इसकी जांच कराने की मांग करनी चाहिए। लखनउ में बैठे और भ्रष्टाचार के खिलाफ से चुप रहने से कोई चेयरमैन की मलाई नहीं काट सकता, बार-बार कहा जा रहा है, कि चुनाव भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़कर और आवाज उठाकर ही जीता जा सकता है।
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