बस्ती। कोई माने या न माने, लेकिन सच तो यही है, कि आज बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, जिले के ही नहीं बल्कि देषभर के उन नेताओं के लिए रोल माडल बन गए, जो अपना सपना पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे है। भाजपा के राष्टीय महामंत्री बनकर इन्होंने बता और दिखा दिया, कि अगर किसी के भीतर संघर्ष करने की क्षमता है, तो उसके सपने को साकार करने से कोई रोक नहीं सकता। महामंत्री बनकर एक तरह से इन्होंने उन नेताओं को भी जबाव दे दिया, जो यह कह रहे थे, कि अब तो मंडल का एक मात्र नेता मैं ही हूं। यह उन लोगों के लिए भी एक जबाव हैं, जो दूसरों को नीचा दिखाने में विष्वास रखते हैं। कौन नहीं जानता कि हरीश द्विवेदी का बघिया उखाड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा, लखनउ से लेकर दिल्ली तक विरोध किया, और यह जताने और बताने का प्रयास किया कि एक व्यक्ति के चलते जिले में भाजपा धरातल पर जा रही है। जिस व्यक्ति के बारे में यह सबकुछ कहा गया, वह आज बुलंदियों को छू रहा है, और विरोध करने वाले कहां यह वही जाने। इसकी समीक्षा उन लोगों को करनी चाहिए, जो विरोध करने और पटकनी देने में यकीन रखते है। महामंत्री बनने से उन युवा और कर्मठी कार्यकर्त्ताओं में एक उम्मीद जगी है, कि पार्टी कार्यकर्त्ताओं को उनकी मेहनत का फल आज नहीं तो कल देती है। कमियां किसके भीतर नहीं होती, अगर ऐसा नहीं होता तो हरीश द्विवेदी नहीं हारते। वही व्यक्ति महान होता है, जो कमियों से सीख लेता है, और उसे सुधारने का प्रयास करता है। जो लोग हरीष द्विवेदी की इस उपलब्धि को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, उन्हें एक बार फिर से विचार करना होगा, और यह सोचना होगा, कि उनके जिले का कोई नेता राष्टीय महामंत्री बना है। इसी तरह अब हरीश द्विवेदी को भी बड़पन दिखाना होगा, और सबकुछ भूलकर पार्टी के हित में जुट जाना होगा, यह नहीं सोचना होगा, कि किसने उनका विरोध किया और किसने उन्हें हैटिक लगाने से रोका। जो लोग दूसरे को आका मानकर चल रहे थे, और यह सोच थे कि जब तक यह सूबे के मुखिया है, उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। सबसे अधिक झटका उन्हीं लोगों को ही लगा है, जो मुखिया के रहते अपने आपको सबसे अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे थे, वही लोग अब असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हालांकि ऐसी बात बिलकुल नहीं होनी चाहिए, लेकिन इतना जरुर हैं, कि जो लोग सच को स्वीकार कर लेते हैं, वही आगे बढ़ते हैं, और उन्हीं लोगों के सपने भी साकार होते है। राजनीति में विरोध होना या करना कोई बुरी और नई बात नहीं हैं, लेकिन जब विरोध व्यक्तिगत हो जाता है, तो बुरी बात हो जाती है। मिटा देगें, बर्बाद कर देगें, कैरियर चौपट कर देगें, जैसी भाषा का राजनीति में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। अगर इसी तरह व्यक्ति के चाहने और कहने से लोग बर्बाद और मिटते रहे तो फिर कोई सुरक्षित ही नहीं रहेगा। इंसान अगर इंसान रहे तो ज्यादा अच्छा, भगवान न बने। देश की राजनीति में कितना बदलाव होगा, यह तो नहीं मालूम, लेकिन जिले की राजनीति में बदलाव होने की अवष्य संभावना जताई जा रही है। अब उन्हीें लोगों का राजनैतिक भविष्य उज्जवल नजर आ रहा है, जो पार्टी को मजबूत करने की दिषा में अग्रसर है। कहना गलत नहीं होगा, कि उन्हीं लोगों को 2027 में मौका मिलेगा जो पार्टी के प्रति वाकई निष्ठा रखते है। अब लोगों को नेताओं का नहीं जनता का हीरो बनना होगा। यह भी सही है, कि बिना गाड फादर के कोई आगे नहीं बढ़ सकता। इसका एहसास लोगों को हरीष द्विवेदी के महामंत्री बनने के बाद हो गया, अगर कोई सिर्फ गाड फादर पर ही निर्भर रहेगा, तो उसका भविष्य उज्जवल नहीं होगा, गाड फादर भी तभी मदद करेगें, जब काबिलियत होगी। यह भी सही है, कि अब लोग हरीष द्विवेदी को गाड फादर बनाने वालों की लाइन लग जाएगी। गाड फादर के पीछे भागने के बजाए अगर जनता के बीच जाए तो बेहतर होगा। कोई भी पार्टी और नेता उस व्यक्ति की उपेक्षा नहीं कर सकता जो जनता का हीरो होता। हरीष द्विवेदी ने बता दिया कि पद के बिना भी उचाईयों को छुआ जा सकता है।