अयाश कथित विधायक की पहली पंसद बनी नाबालिग लड़कियां!
-कथित विधायक भतीजी पर इतना दिवाना हो गए थे, कि उसके लिए लखनउ में फलैट खरीदकर दिया, ताकि लखनउ एयरपोर्ट से उतरते ही नाबालिग माशुका के पास जा सके
-पहले तो विधायकजी ने चाची को प्लेन का टिकट देकर मुंबई बुलाता रहा, लेकिन जैसे ही मन भर गया, भतीजी को बुलाने लगा
बस्ती। मनी और पावर किस तरह लोगों को इंसान से हैवान बना देता है। अगर, इसका सच किसी को देखना है, तो वह महाराष्ट के कल्याण से कथित विधायक और बड़े कारोबारी विनोद पाटिल के रुप में देख सकता है। मनी और पावर अच्छे-खासे व्यक्ति को दुराचारी, बलात्कारी, व्यभिचारी और भ्रष्टाचारी बना देता है। ऐसे लोग सिर्फ मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में नहीं मिलेंगे बल्कि बस्ती जैसे छोटे शहरों में भी मिलेंगे। कौन नहीं जानता कि कौन सा नेता बस्ती से प्लेन से मुंबई मौजमस्ती करने जातें हैं। ऐसे लोग कैबरे डांस और महंगी दारु के बहुत सौकिन होते हैं। ऐसे लोगों का षौक बस्ती में भी एक कार्यक्रम के दौरान जिले की जनता देख चुकी है। बहरहाल, हम बात कर रहे थे, कथित विधायक विनोट पाटिल के अयाशी की। महिला ने बताया कि कथित विधायकजी को नाबालिग लड़कियां बहुत पंसद है। इसके लिए यह कोई भी कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं, तभी तो जब इनका मन बलात्कार की षिकार विधवा से भर गया तो इन्होंने विधवा की 15 साल की भतीजी को पैसे के बल पर अपना षिकार बनाया, विधायकजी भतीजी पर इतना दिवाना थे, कि इन्होंने लखनउ में एक करोड़ का फलैट लेकर दे दिया ताकि जब भी वह मुंबई से आए तो उन्हें मौजमस्ती के लिए बस्ती ना जाना पड़े, लखनउ एयर पोर्ट से सीधा फलैट में पहुंच जाए। मामला वहां फंसा जब विधायकजी ने चाची को छोड़कर उसकी भतीजी पर डोरे डालने लगे। विधायकजी कुछ समय तक दोनों को प्लेन से मुंबई बुलाते थे, तब इसकी जानकारी विधायकजी की पत्नी सुषमा पाटिल और उनके भाई धर्मराज पाटिल को नहीं थी, लेकिन जैसे ही चाची ने गर्भवती होने की बात विधायकजी, उनकी पत्नी और भाई को बताया तो तूफान आ गया। बहरहाल, ऐसे मौके पर पत्नी ने दुराचारी पति का साथ दिया, और चाची को फोन पर ही कहा कि अगर फिर परेषान किया तो जान से मरवा देंगे। जब चाची ने यह देखा कि उसका तो विधायकजी ने सबकुछ छीन लिया तो उसने आवाज उठाना प्रारंभ कर दिया, चाची का कहना है, कि उसे कथित विधायकजी से उतनी षिकायत नहीं हैं, जितना भतीजी से। कहना गलत नहीं होगा कि ताली दोनों हाथों से नहीं बजती। सच तो यह है, कि चाची और भतीजी दोनों को चमक-धमक वाली दुनिया चाहिए था, जो उसकी गरीबी नहीं दे पाती। ऐसे में जब कोई विधायकजी जैसा रसिक व्यक्ति मिल जाएगा तो फिसलना लाजिमी है। विधायकजी ठहरे पैसे वाले और रसिक मिजाज के, इस लिए उन्होंने समय गवाएं बिना भतीजी को जाल में फंसा लिया, या यूं कहिए कि भतीजी खुद विधायकजी के जाल में फंसना चाहती थी, लेकिन चाची रोड़ा बनी हुई थी, जैसे ही चाची का रास्ता साफ हुआ, वैसे ही भतीजी ने अपना काम कर दिया, लेकिन भतीजी को षायद यह नहीं मालूम कि जिस दिन विधायकजी का उससे मन भरा तो उस दिन उसे भी दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल फेंकेगे। दुनिया में ना तो कथित दुराचारी, व्यभिचारी, बलात्कारी और भ्रष्टाचारी विधायक और ना ही चाची और भतीजी जैसे लोगों की कमी है। कमी है, तो सिर्फ चरित्रवान लोगों की। जो चिराग लेकर ढूढ़ने पर भी नहीं मिलते।
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