बस्ती। पत्रकार कहीं भी सुरक्षित नहीं है। गांव से गढ़ी तक कस्बे से लेकर शहर तक पत्रकारों के लिए असुरक्षा का माहौल है। कहने को तो पत्रकार हित ओर उसकी सुरक्षा के लिए दर्जनों से संगठन हैं, लेकिन जब कोई बात हो जाती है, तो मदद करने को कोई  सामने तक नहीं आते, यहां तक कि पत्रकार की समस्या और उनके साथ होने वाली घटना को ही मीडिया स्थान नहीं देतें, ऐसे में सवाल उठ रहा है, कि आखिर पत्रकार जाए तो जाए कहां। पत्रकार रोहित कुमार, परवेज आजम, बालकृष्ण सहित अन्य ने लालगंज थाने में एक तहरीर दी है। जिसमें उन लोगों को सुनियोजित मरीके से पत्रकारिता के कार्य में बाधा डालना, गाली गलौज करना, धमकी देना, साक्ष्य को नष्ट करना और संगठित होकर मारपीट करने के मामले में झिन्ना चौधरी पुत्र गापोली, महेंद्र चौधरी पुत्र वीरेंद्र चौधरी, रंजीत नाई पुत्र रंगीलाल और अमन चौधरी पुत्र राम प्रकाश सभी निवासी बघाड़ी थाना लालगंज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा गया है। कहा गया कि ज बवह लोग दुर्घटना से संबधित समाचार संकलन करने पीएचसी बनकटी गए, तो वहां पर हम लोगों के दुर्व्यव्यहार किया गया। अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, दबाव बनाकर मोबाईल से डिजिटल साक्ष्य नष्ट करवाए गए। पत्रकारों के साथ अमूमन इस प्रकार की जो घटनाएं होती है, उसमें काफी हद तक पत्रकार ही जिम्मेदार होते है। अगर कोई नहीं बताना चाहता या फिर नहीं कहना चाहता तो उसे मजबूर नहीं करना चाहिए। जहां पर मजबूर किया गया वहीं पर इस तरह की घटनाएं सामने आती है। पत्रकारों को बहुत ही संयम रखना चाहिए। दादागिरी या फिर पत्रकार होने का धौंस नहीं जमाना चाहिए, पत्रकार वही है, जो अपना काम निकालकर चुपचाप निकल जाए। पत्रकारों को यह नहीं भूलना चाहिए, कि अब पहले जैसा समय नहीं रहा, अब कोई पत्रकार से डरने वाला नहीं है।