आखिर पुलिस क्यों आशीष श्रीवास्तव के हत्यारे को बचा रही
बस्ती। भले ही चाहें पैकोलिया पुलिस जितना भी यह कहे कि आशीष श्रीवास्तव की हत्या नहीं बल्कि उसकी मौत हैंगिगं से हुई हो, लेकिन पुलिस की यह थ्योरी पर न जाने क्यों कोई यकीन करने को तैयार नहीं। पुलिस न जाने उस वायरल वीडियो को संज्ञान में क्यों नहीं ले रही हैं, जो घटना के एक दिन पहले आषीष ने जारी था, वायरल वीडियो में आषीष श्रीवास्तव के मुंह पर लगे चोट इस बात की गवाही दे रहे हैं, कि सीताराम, हिमांशु, गिरजेश, सत्यम, पुष्पेंद्र, गोलू श्रीवास्तव के साथ मारपीट हुआ। मृतक आशीष श्रीवास्तव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर ग्रामीण सवाल उठा रहे है। पुलिस अगर वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करती तो सच्चाई सामने आती, लेकिन ठहरी पैकोलिया की पुलिस, यह जो चाहती है, वही करती है। इनका झुकाव हमेशा प्रतिवादी की ओर रहता है। जाहिर सी बात है, कि प्रतिवादी कभी नहीं चाहेगा कि उसका नुकसान हो, भले ही चाहे उसने वादी का नुकसान ही क्यो न किया हो, चूंकि वादी हमेशा कमजोर होता है, और प्रतिवादी मजबूत, इस लिए पुलिस भी मजबूत पक्ष की ओर खड़ी दिखाई देती है। क्यों कि उसे अच्छी तरह मालूम रहता है, कि कमजोर पक्ष की ओर खड़े रहने से नुकसान के आलावा उसके हाथ में कुछ नहीं आएगा। हत्या को आत्महत्या और आत्महत्या को हत्या बताना/साबित करना कोई पुलिस और वकील से सीखे। वैसे इस मामले में पैकोलिया पुलिस ने एक बार फिर अपना काम ईमानदारी से नहीं किया, इसी लिए उस पर तरह तरह के आरोप लग रहे है। जिस तरह आए दिन पैकोलिया पुलिस की कार्यषैली पर सवाल उठ रहे हैं, वह किसी भी एचएसओ के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता। गांव के लोगों का कहना है, कि पुलिस वाकई इस कांड के तह में जाना चाहती है, तो उस वायरल वीडियो को संज्ञान में लेना होगा। कहना गलत नहीं होगा, कि वायरल वीडियो में हत्या/आत्महत्या का रहस्य छिपा है। सीओ ने कहा कि उन्हें वायरल वीडियो की जानकारी नहीं हैं। उन्होंने वायरल वीडियो की जांच कराने की बात कही।
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