बस्ती। नगर पालिका के ईओ और नगर पंचायत भानपुर के प्रभारी ईओ अंगद के सामने सबसे बड़ी चुनौती, नगर पंचायत भानपुर में व्याप्त भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों से निपटने की रहेगी। उससे बड़ी चुनौती 15 हजार मानदेय पाने वाले और दो लाख का मोबाइल लेकर चलने वाले एवं वाहन में हर माह 18 हजार का तेल भरवाने वाले अविनाश मिश्र उर्फ मंचल के भ्रष्टाचार को समाप्त करने की होगी, क्षेत्र की जनता कहती है, कि अगर ईओ साहब सिर्फ मंचल को ही काबू में कर लिए तो समझ लीजिए कि बहुत हद तक भ्रष्टाचार पर काबू पा लेगें, एक तरह से ईओ का भ्रष्टाचारियों के मुंह पर तमाचा लगाने जैसा होगा। नेता, ठेकेदार और अधिकारी भले ही मंचल से छुटकारा नहीं पाना चाहते, लेकिन क्षेत्र की जनता इनके साम्राज्य को समाप्त होते देखना चाहती हैं। मुख्यालय के अधिकारियों को भी मंचल के क्रिया कलापों की समीक्षा करनी चाहिए। अगर मुख्यालय के अधिकारी यह चाहते हैं, कि नगर पंचायत भानपुर में सरकारी धन का दुरुपयोग न हो, और काकस समाप्त हो, तो इसके लिए सबसे पहले मंचल को अन्य किसी नगर पंचायत में तबादला करना होगा, अगर नहीं चाहते तो जैसा चल रहा है, वैसा चलने दीजिए, कोई बात नहीं, जिस तरह पिछले छह साल से क्षेत्र की जनता इनके भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं, आगे भी रहेगी, जनता के उपर क्या फर्क पड़ता है, कि उसकी गाढ़ी कमाई को खुले आम मंचल जैसे लोग लूट और लुटवा रहे है। हालांकि इन्हें नगर पंचायत भानपुर से हटाना या फिर इनके भ्रष्टाचार को समाप्त करना ईओ के लिए आसान नहीं होगा, क्यों कि जैसे ही ईओ साहब इन पर लगाम लगाने का प्रयास करेगें, वैसे ही क्षेत्र के भ्रष्ट नेता, ठेकेदार और अधिकारी ईओ के पीछे पड़ जाएगें, तब ईओ को भी समझौता करना पड़ेगा, और तब इन्हें भी भ्रष्टाचारियों की टोली में षामिल होना पड़ेगा, इन्होंने जो थोड़ी बहुत इज्जत नगर पालिका में कमाया था, उसे इन्हें नगर पंचायत भानपुर में गंवाना पड़ेगा। इनके सामने सबसे बड़ी समस्या मंचल नहीं हैं, बल्कि वे लोग जो मंचल के पीछे खड़े हुएं है। मंचल के पीछे खड़े होने वालों के बारे में जनता को जानने का प्रयास करना चाहिए, और इनके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। मंचल के पीछे खड़े होने वालों को देख हैरानी होती है। ऐसे-ऐसे लोग इनके समर्थन में सामने आते हैं, जिनके बारे में कभी कोई सोच भी नहीं सकता। एक भ्रष्ट बाबू के बचाव में अगर इतने नामचीन लोग आते हैं, तो इनकी मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है। कहा भी जाता है, कि भ्रष्ट लोगों की पैरवी वही लोग करते हैं, जो खुद भ्रष्टाचार में लिप्त रहते है। मीडिया बार-बार यह कहती आ रही है, कि भ्रष्टाचार उजाागर करने के पीछे उसकी मंशा किसी भी भ्रष्टाचारी को सजा दिलाना नहीं बल्कि क्षेत्र की जनता को उनका असली चेहरा दिखाना हैं, बाकी जनता बहुत समझदार है। उसे मालूम हैं, कब और कहां किस पर चोट करना है। नगर पंचायत भानपुर क्षेत्र की जनता चाहती है, कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कम से कम उन नेताओं को तो सामने आना होगा, जिन्हें नगर पंचायत भानपुर का चेयरमैन बनना है। वैसे इस लाइन में बहुत से लोग खड़े हुए है। जब उनसे यह पूछा जाता है, कि जब आप भ्रष्टाचार के खिलाफ न तो बोल रहे हैं, और न लिखा पढ़ी कर रहे हैं, तो क्या लेकर आप चुनाव में जाएगंे? जबाव कहा जा रहा है, कि बिना भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाए कोई चेयरमैन नहीं बन सकता।
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