बस्ती। भाजपा के विधायक अजय सिंह के जिस मंच की शोभा भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष एवं राम जन्म भूमि में अहम भूमिका निभाने वाले और पार्टी के लिए जीवन खपाने वाले ‘सुरेंद्र कुमार सिंह’ को बनना चाहिए था, उस मंच की षोभा ‘रणजीत सिंह उर्फ खनन सिंह’ नामक हिस्ट्रीशीटर ने बढ़ाया। सवाल उठ रहा है, कि जब भाजपा के मंच पर अपराधी जैसे लोग विराजमान रहेगें, तो उस पार्टी का कल्याण कैसे 2027 में होगा? यह सवाल उन बड़े-बड़े नेताओं के लिए हैं, जो अपने भाषणों में यह कहते हुए नहीं थकते कि कार्यकर्त्ता पार्टी की रीढ़ होता है, और कार्यकर्त्ता का स्थान मंच के सामने लगी कुर्सी पर नहीं बल्कि मंच पर होना चाहिए। सवाल उठ रहा है, कि मंच पर अपराधी को बुलाया किसने और बैठने दिया किसने? वह तो अपने आप तो बैठा होगा नहीं? क्या विधायकजी को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रुप में यह नहीं मालूम था, कि उनके मंच को एक ऐसा अपराधी जिसके खिलाफ दुबौलिया थाने में डकैती, एससीएसटी एक्ट और घर फूकने जैसे अन्य गंभीर धाराओं में आठ मुकदमा दर्ज हो, और तीनों पुत्र के नाम भी मुकदमा दर्ज हो और जिसका हिस्ट्रीशीटरसंख्या 274 और गैंगस्टर 104/98 हो, वह मंच को साझा कर रहा है। क्या पार्टी के खाटी कार्यकर्त्ता अब यह समझ ले कि उनका मान और सम्मान एक हिस्ट्रीशीट के सामने कुछ भी नहीं? उनका स्थान मंच नहीं बल्कि सामने वाले प्लास्टिक की कुर्सी पर है। अब जरा उस खाटी कार्यकर्त्ता से के दिल से पूछिए जो तब से पार्टी का झंडा लेकर घूम रहा है, जब झंडा लेकर चलने और दरी बिछाने वाला कोई नहीं था।

अवसर था विद्युत उपकेंद्र दुबौलिया पर पांच एमवीए के नए ट्रांसफार्मर के लोकार्पण का। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। किंतु एक दृश्य लोगों के मन को भीतर तक उद्वेलित कर गया। जिस राजनीतिक दल ने अपने संगठन की नींव समर्पित कार्यकर्ताओं के त्याग, तपस्या और अनुशासन पर रखी, जिस दल की पहचान सिद्धांतों और स्वच्छ राजनीतिक संस्कृति से रही है, उसी दल का एक वरिष्ठ एवं निष्ठावान कार्यकर्ता मंच से दूर एक साधारण प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा रहा। दूसरी ओर मंच पर वह व्यक्ति सम्मानपूर्वक विराजमान था, जिसका अतीत कभी गंभीर आपराधिक प्रकरणों, गैंगस्टर  हिस्ट्रीशीटर डकैती और यंहा तक किसी गरीब की छोपड़ी जलाने से अपराध मे संलिप्त रहा हैँ। यह प्रश्न किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक संस्कृति का है जिसमें वर्षों तक संगठन का भार उठाने वाले कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और अवसरवादियों का सम्मान सामान्य होता जा रहा है। यदि समर्पण से अधिक महत्व प्रभाव और भय की राजनीति को मिलने लगे, तो यह किसी भी संगठन के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए। मंच पर बैठने वालों से अधिक महत्वपूर्ण वे लोग हैं जिन्होंने संगठन को खड़ा करने में अपना जीवन लगाया है। इतिहास गवाह है कि दलों की मजबूती चेहरे नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की निष्ठा और परिश्रम से तय होती है।

वैसे यह पहली बार नहीं हुआ, जब बड़े-बड़े नेताओं के मंच पर अपराधी विराजमान होते नहीं देखे गए। मंच की शोभा जब अपराधी किस्म के लोग बढ़ाएगें तो सवाल तो नेता पर भी उठेगा और पार्टी पर भी। नेताओं के साथ अनजाने में अपाराधियों के साथ का फोटो तो खूब वायरल होता हैं, जिससेे नेता यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं, कि कौन उनके साथ फोटो खिंचवाया, उन्हें मालूम नहीं रहता, लेकिन अगर मंच में एक साथ चार-पांच जो विराजमान होते हैं, और उनमें एक अपराधी होता तो यह कर नहीं बचा जा सकता कि उन्हें नहीं मालूम कि मंच पर कौन बैठा और कौन नहीं। खासतौर से जब एक ही विधानसभा के हो तो। रणजीत सिंह उर्फ खनन सिंह और उनके तीनों पुत्रों के अपराध की सूची दुबौलिया थाने के एसओ ने विजस प्रताप सिंह के द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में दी गई।