बस्ती। जिले की पुलिस खासतौर पर लालगंज थाने की पुलिस उन्हीं लोगों का मुकदमा दर्ज करती है, जो या तो सुसाइड कर चुके हों या फिर सुसाइड की धमकी दे रहे हों। ऐसा लगता है, कि मानों लालगंज पुलिए ने एफआईआर दर्ज करने का मानक मना लिया है। कम से कम भरवलिया और पसड़ा के मामले में पुलिस ने तो यह संदेश दे दिया कि अगर एफआईआर दर्ज करवाना है, तो उसके मानकों को पूरा करना होगा। मानक से रेट को अलग रखा गया है। लालगंज पुलिस को अपनी छवि सुधारने के लिए उसे उन लोगों की सुननी होगी, जो उनके पास फरियाद लेकर आते हैं, न सिर्फ सुनना होगा, बल्कि उन्हें सम्मान भी देना होगा, ठीक उसी तरह जिस तरह पुलिस अपराधियों और खराब छवि वाले नेताओं को देती है।
जिस दिन लालगंज पुलिस ने अपराधियों और खराब छवि वाले नेताओं को सम्मान देना बंद किया, उस दिन मीडिया और क्षेत्रीय जनता जयजयकार करेगी। लालगंज पुलिस को यह समझना होगा कि उनकी पहचान आम लोगों और सताए हुए लोगों की मदद और उन्हें न्याय देने के रुप में हैं, न कि फरियादियों को अपमानित करने और उनका एफआईआर दर्ज न करने के रुप में। कोई भी थानेदार अपराधियों की मदद करके हीरो नहीं बन सकता, वह तब भी हीरो बनेगा, जब पीड़ितों की मदद करेगा। हीरो वही थानेदार बन सकता है, जिसका टारगेट अधिक से अधिक पैसा कमाना नहीें बल्कि नाम कमाना होगा। पैसे को ही सबकुछ समझने वाले कभी आम जनता के हीरो नहीं बन सकते और न वह अपने थाने को माडल बना सकते है। जिस दिन लालगंज की पुलिस अपराधियों और बदमाषों को उनकी औकात बताने लगेगी, उसी दिन से जनता उन्हें अपने पल्कों पर बैठा लेगी।
न जाने क्यों लालगंज थाने की पुलिस एफआईआर तभी दर्ज करती है, जब कोई लड़की या तो सुसाइड कर लेती है, या फिर सुसाइड करने की धमकी देती है। भरवलिया के मामले में जिस तरह वहां के बाबू साहबों को बलात्कार और सुसाइड के आरोपी को मदद करते देखा गया, उससे उन लोगों का हौसला बड़ा जो लोग समाज और सरकार दोनों के दुष्मन है। यह लोग यह भूल जाते हैं, कि समाज उन्हें देख रहा है। भले ही पीड़ित परिवार कमजोर होने के नाते बाबू साहबों का कुछ न बिगाड़ सके, लेकिन बददुआ तो अवष्य देगें। अपनी नाबालिग लड़की को खोने वाली भरवलिया की पीड़ित परिवार ने बताया कि उन लोगों की नजर में पुलिस से अधिक गांव के वे बाबू साहब लोग जिम्मेदार हैं, जो आरोपी शक्तिमान और उसके परिवार को पुलिस से बचाते रहे। पीड़ित परिवार का दर्द उस समय भी देखा गया, जब पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं कर रही थी, और उस समय भी उनके चेहरे में न्याय के आषा की किरण देखी गई, जब मीडिया के दबाव और एसपी के पहल पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। षक्तिमान के जेल जाने से परिवार ने राहत की सांस ली। पुलिस ने शक्तिमान के साथ उसके परिवार के उन लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया, जो लोग मृतका को आवारा और बदचलन कहते थे। यह मुकदमा राजपति पत्नी नरोत्तम की तहरीर पर अरविंद पुत्र पंजाबी, मिथुन पुत्र पंजाबी और षक्तिमान की माता नाम अज्ञात पति पंजाबी के नाम से मुकदमा दर्ज किया। इसी तरह ग्राम पसड़ा की नाबालिग लड़की प्रीति ने जब एसओ से मुकदमा न दर्ज के आरोप में सुसाइड करने को कहा तो पुलिस ने उस मुकदमें को धमकी के आधा घंटा के भीतर दर्ज कर दिया, जो पिछले एक सप्ताह से नहीं दर्ज कर रही थी। इस मामले में पुलिस ने जनकदुलारी पत्नी शिवकुमार की लंबित तहरीर पर प्रदीप पुत्र श्रीप्रकाश, प्रानमति पत्नी श्रीप्रकाश, पूनम पिता श्रीप्रकाष, श्री प्रकाश पुत्र राम षब्द, विजय पुत्र राम शब्द एवं रंजीत पुत्र श्रीप्रकाश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
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