रिंकू ‘दूबे’ ने मनीष ‘मिश्र’ को दिखाया ‘आइना’
बस्ती। भाजपा कार्यकर्त्ता रिंकू दूबे ने भाजपा के मनीष मिश्र को आइना दिखाते हुए कहा कि अभी इन्हें पूर्व सांसद एवं राष्टीय महामंत्री हरीश द्विवेदी और सपा के सांसद राम प्रसाद चौधरी से कुछ सीखने की आवष्कता है। इन दोनों नेताओं ने कभी एक दूसरे को यह नहीं कहा कि मैं दो लाख वोट से हराउंगा। इन दोनों बड़े नेताओं ने सिर्फ और सिर्फ चुनाव लड़ने और जीतने का प्रयास किया, यह अलग बात हैं, कि राम प्रसाद चौधरी को तीसरी लड़ाई में जीत मिली। कहा कि मिश्राजी आपके यह कहने से कि मैं राम प्रसाद चौधरी को इस लिए दो लाख वोट से हराउंगा क्यों कि इन्होंने मेरे बड़े भाई हरीश द्विवेदी को एक लाख वोट से हराया। सवाल करते हुए, कहते हैं, क्या आप को लोकसभा का टिकट मिल गया, जो राम प्रसाद चौधरी को दो लाख वोटों से हराने की बात कह रहे है? अगर मिल गया हो तो बताइए मेरे जैसा कार्यकर्त्ता आप को दो लाख वोटों से जीताने के लिए अभी से जी जान लगा देगा। फिर सवाल किया कि क्या आप को हरीश द्विवेदी ने यह कहा कि मैं 2029 में चुनाव नहीं लडूंगा। आइना दिखाते हुए कहा कि भईया इतनी व्याकुलता ठीक नहीं,? बस्ती में सैकड़ों कार्यकर्त्ता हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा के लिए खपा दिया। कहा कि मानते हैं, कि आप के पास पैसा बहुत हैं, और आप के सामने बस्ती में धन के मुकाबले में भाजपा का कोई भी कार्यकर्त्ता हैसियत नहीं रखता, लेकिन भाजपा का कार्यकर्त्ता भले ही धनबली नहीं हैं, लेकिन वह हरीश द्विवेदी जैसे पार्टी के प्रति समर्पित और संघर्ष करने वाले को अपना नेता मानता है। अभी आप को बस्ती में जुमाजुमा छह माह हुआ हैं, और आप खुद को भाजपा प्रत्याशी मान लिए। कहा कि चार माह पहले कुछ बहनों के नाम से फेक आईडी का जन्म हुआ, उस पोस्ट से दूरी बनाए रखिए, वरना न चाहते...। कहा कि आप को इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि जिन बड़े भाई को आप चूका हुआ, खिलाड़ी बताने का प्रयास कर रहे हैं, वही बड़े भाई 2014 और 2019 में राम प्रसाद चौधरी को लगातार दो बार हरा चुके है, और हरीष द्विवेदी हम जैसे हजारों नौजवानों के दिलों पर राज कर रहे हैं, वह भी निःस्वार्थ। कहा कि अगर आप यह कहते कि हरीष द्विवेदी को हम सभी बस्ती के लोग पूरी ताकत लगाएगें और सब मिलकर 2029 में लड़ाएगें और राम प्रसाद चौधरी को दो लाख वोट से हराएगें, तो बस्ती की जनता आपके समर्पण को प्रणाम करती, और आप की ख्याति एक अच्छे समाजसेवी के रुप में चारों ओर होती।
इस पोस्ट को लेकर सैकड़ों कमेंट आए और अधिकांश में हरीश द्विवेदी का जयजयकार करते हुए उन्हें अपना नेता माना, रिंकू दूबे को इस पोस्ट की सराहना करते हुए धन्यवाद भी दिया। अनिल सिंह ने पोस्ट की सराहना करते हुए कहा कि इसी तरह सामान्य कार्यकर्त्ताओं का भी दायित्व हैं कि पोस्ट लिखे, मृगमरीचिका में लोगों को नहीं आना चाहिए। शिवेंद्र सिंह प्रिंस लिखते हैं, कि हरीश द्विवेदी का कद अब इतना बढ़ गया हैं, कि अगर वह देश के किसी भी कोने से लड़े तो जीत सकते हैं। रघुवर दयाल लिखते हैं, किसी के नाम रजिस्टी नहीं हो गई है। कप्तानगंज में एक अच्छा उम्मीदवार नहीं ला पा रहे हैं, और आप लोग हरैंया की बर्बादी लिख रहे है, क्या खाक जीत पाओंगे, यूजीसी, एससीएसटी और आरक्षण पर कोई भाजपा का सर्वण नेता नहीं बोलता पद मिल जाए, भले ही अपनों को मारकर दीया चलता हो। संजय चौहान लिखते हैं, कि हरीश द्विवेदी एक नेक दिल इंसान हैं, राजनीतिक साख लंबी है, राम प्रसाइ चौधरी बहूुत मिलनसार हैं, लेकिन कभी दोनों नेताओं ने व्यक्तिगत जीवन पर एक दूसरे पर टिपणी नहीं करते, इसी लिए दोनों की शान है। मनीष मिश्रजी को अभी बहुत कुछ सीखना पड़ेगा, यू-टयूबर के सहारे राजनीतिक साख नही बनेगा, उसके लिए बहुत प्रयास करना पड़ेगा। मोहन शुक्ल लिखते हैं, कि हरीशजी को तिबारा अब बस्ती से टिकट मिलना मूुस्किल, मनीष मिश्र भैया ही उम्मीदवार होगें, ऐसा अधिकांश जमीनी कार्यकर्त्ताओं को लगता, बाकी चाटुकारिता की कोई सीमा नहीं होती, चाहें वह स्वार्थ बस हो या निःस्वार्थ। मनीष पांडेय लिखते हैं, कि बड़बोला पन ठीक नहीं, कम बोलना ज्यादा सुनना। अंबिकेश शुक्ल अंबू लिखते हैं, कि समझने वाली बात तो तथाकथित भैयाजी को....सही कहा हैं, कि आपने एक नंबर..। बृजभूषण पांडेय लिखते हैं, कि एक मौका और चाहिए?? लूटने का, दस साल कम पड़ गया। अभिनव उपाध्याय लिखते हैं, कि हरीषजी का कोई विकल्प नहीं, बस्ती के अगले सांसद हरीशजी ही होगें। अनिल दत्त चर्तुवेदी लिखते हैं, कि रिेंकूजी आपने आइना दिखा दिया। सूरज पाठक सार्थ लिखते हैं, कि पार्टी में व्याकुलता नहीं, धैर्य और समर्पण की जरुरत होती है, हरीशजी के संघर्ष को बस्ती का बच्चा-बच्चा जानता, धनबल पर निष्ठा भारी पड़ेगी। रोहित शुक्ल लिखते हैं, कि हर कोई हरीश द्विवेदी नहीं बन सकता। कभी-कभी इंसान को उसका बड़बोलापन ही उसे खा लेता। इंद्रसेन उपाध्याय लिखते हैं, इस समय पार्टी में यही कमी है, मेहनत कोई और करें, मलाई कोई दूसरा खाए।
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