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मुझे और मेरे भाई को शड़यंत्र पूर्वक फंसाया जा रहाःपूर्व विधायक-टाइम सिटी कम्पनी के धोखाधड़ी मामले में मेरा परिवार निर्दोषः चन्द्र प्रकाश शुक्लबस्ती। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक चन्द्र प्रकाश शुक्ल ने टाइम सिटी कम्पनी में धोखाधड़ी मामले में दर्ज मुकदमें के सम्बन्ध में कहा है कि वे और उनका परिवार पूरी तरह से निर्दोष है। उन्हें और उनके...
पीजी की तैयारी के नाम पर फरार हो गए 10 जेआर-मानसिक रोग, नेत्र, मेडिसिन, गाइनी जैसे विभाग के एमबीबीएस के जूनियर रेजीटेंड बिना बताए भाग गए, भागने वालों में एक पत्रकार की पुत्री भी शामिल-यह लोग चाहते थे, कि मेडिकल कालेज में उन्हें ऐसी जगह लगा दिया, जहां पर उन्हें काम न करना पड़े ताकि वह घर बैठे पीजी की तैयारी कर सके-इन लोगों के फरार होने से मेडिकल काले...
महेंद्रजी अगर पूर्व विधायक होना चाहतें तो खूब गेट लगवाइए!-लेकिन अगर दुबारा विधायक बनना है, तो गेट लगाने में 50 फीसद कमीशन का मोह छोड़ना होगा, वरना फारचूनर और आवास के गेट के बाहर पूर्व विधायक का स्टीकर लगाना पड़ेगा-विधायकजी 10 लाख का गेट 10 घंटा भी नहीं चला, बदनामी और नारेबाजी का दंश अलग से झेलना पड़ा, क्या यही हैं, आप का विकास-विधायकजी अगर यही 10 लाख...
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को पलीता लगाने वाले इंस्पेक्टर को क्यों दिया गया चार्ज! गोकशी करने वाले अपराधियों को संरक्षण देने का भी इंस्पेक्टर विनोद पांडेय पर लग चूका हैं आरोपबीजेपी सरकार की छवि को खराब करने वाले इंस्पेक्टर का गढ़ में भी लोगों ने किया था विरोध। उत्तर प्रदेश का सबसे भ्रष्ट कोतवाल विनोद पांडे जिस...
ईसी एक्ट में पहला मुकदमा सुनील सिंह के खिलाफ दर्ज हुआबस्ती। कमिश्नर के निर्देश का असर देखने को मिल रहा है। कमिश्नर के आदेश के दूसरे दिन ईसी एक्ट यानि आवश्यक वस्तु अधि-1955 के तहत ग्राम पंचायत अकारी के दिव्य खाद्य भण्डार (लाइसेंस नं0 104322) के प्रोपराइटर सुनील सिंह पुत्र प्रमोद सिंह के खिलाफ नगर थाने में खाद निरीक्षक बाबूराम के द्वारा दर्ज करवाया ग...
आखिर नेताओं का पेट इतना बड़ा क्यों होता जो कभी भरता ही नहीं?-क्या कभी किसी नेता का पेट भरा हैं, जो अब भरेगा? भूख से अधिक खाने के बाद भी इनका हाजमा न जाने क्यों खराब नहीं होता, इन्हें हाजमोला की आवष्यकता ही नहीं पड़ती-आखिर नेताओं का ही क्यों विकास हो रहा जनता का क्यों नहीं? क्यों नेता बनते ही यह अकूत संपत्ति के मालिक हो जाते?-क्यों नेताओं के ही...
टार्च की रोशनी में परसरामपुर के सचिव करते, खाद की कालाबाजारी-चूंकि सचिव श्याम नरायन वर्मा यह अपने आपको एआर का खास कहते हैं, इस लिए इन्हें खाद का आवंटन अधिक होता-कहते हैं, कि एक टक खाद पर 15 हजार देना पड़ता, 5000 एआर को, 5000 हजार पीसीएफ के डीएस को और पांच हजार दरोगा को देना पड़ता, इस लिए चाहें जहां शिकायत करो मेरा कुछ नहीं होगा-सचिव नेवादा और परसरामप...
रेडियोलाजिस्ट पांच, अल्टासाउंड सेंटर पांच सौ!-ओझा डायग्नोस्टिक वाले तो सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्टासाउंड तीनों करते हैं, और इनके यहां तीन से चार सौ मरीज लाइन लगाए रहते, क्या इनके रिपोर्ट की सत्यतता पर यकीन किया जा सकता-एक अल्टासाउंड करने में कम से कम 10-15 मिनट लगना चाहिए, इस तरह डा. ओझा को सिर्फ अल्टासाउंड के लिए 60 घंटा चाहिए, क्या उनमें पास इतना...
चौंकिए मतः 15 सौ का यूरिया 500 में बिक रहा-समिति के सचिव और रिटेलर्स यूरिया प्लांट लगाने वाले कारोबारियों को 500 बोरी में दे रहे, जब कि इस यूरिया का कामर्सिएल रेट 1500 बोरी हैं, एक बोरी में व्यापारी को एक हजार का लाभ हो रहा-यूरिया का प्लांट लगाने वाले कारोबारी पानी में डालकर ईधन बनाते, और फिल्टर कर ईधन को टक और कार की ईधन वाली टंकी लीटर के हिसाब से...
जब ओमवीर हास्पिटल में आईसीयू ही नहीं था, तो सील क्यों?बस्ती। ओमवीर हास्पिटल के डा. नवीन चौधरी की लापरवाही से हुई पल्टू की मौत के पुत्र वीरेंद्र प्रताप से सवाल उठाते हुए सीएमओ से पूछा कि जब इस अस्पताल में आईसीयू ही नहीं था, तो सील किस आईसीयू का किया? क्या रातों रात आईसीयू बन गया? अगर इस अस्पताल में आईसीयू होता तो फिर मेरे पिता क्यों गोरखपुर रेफर किय...