बस्ती। साल भर तक सोते रहने वाले फुड विभाग के अधिकारी और कर्मचारी होली में भी सोते रहें। जिले के लोग नकली खोआ और पनीर खा-खाकर बीमार होते रहे, लेकिन इस विभाग के लोगों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। जब इस विभाग के नोडल सीआरओ साहब लोगों का फोन ही नहीं रिसीव करेगें, तो जनता षिकायत करे तो किससे करे, ऐसा लगता है, कि इन्हें फोन न रिसीव करने का कोई अतिरिक्त वेतन दे रहा हो। होली हो चाहें दिपावली अधिकारी और फूड निरीक्षक फोन ही नहीं उठाते। खुले आम खोआ मंडी में नकली खोआ बिकता रहा, और जिम्म्ेदार लोग सोते रहें। इस विभाग के लोग जितना होली और दीपावली के त्यौहारी के मस्त रहते हैं, उसका आधा भी अपनी जिम्मेदारी निभाते तो जिले के लोगों को नकली खोआ और पनीर न खाना पड़ता। अब इन लोगों को कौन समझाने जाए कि जो खोया 350 रुपये से कम मंे एक किलो बन ही नहीं सकता है, वह खोआ कैसे खुले मार्केट में दो सौ-ढ़ाई में बिेका। खुले आम रोडवेज की बस से सुबह-सुबह कानपुर से नकली खोआ का बोरा का बोरा उतरा, और विभाग के लोग सोते रहें। यह लोग उन्हीं के यहां छापेमारी की कार्रवाई करते, जहां से इन्हें मोटी रकम मिलने की संभावना रहती है। विभाग के पास उन नकली खोआ और पनीर का कारोबार करने की लिस्ट हैं, जिनसे यह त्यौहारी वसूलते है। ऐसा भी नहीं कि इसकी जानकारी नोडल अधिकारी को न हो, चूंकि सभी त्यौहारी खाते हैं, इस लिए मौके पर सभी सो जाते है। चूंकि प्रशासन इस लिए चुप रहता है, क्यों कि इस त्यौहारी के खेल में उसके अधिकारी और कर्मचारी भी मिले रहते है। इन लोगों की त्यौहारी पांच सौ या फिर एक हजार के लिफाफे में नहीं रहती। इनकी त्यौहारी मोटे लिफाफों में रहती है। दीपावली के लिए पुरानी बस्ती के एक मषहूर नमकीन बनाने वाले कारोबारी के यहां जब छापेमारी की योजना बनी तो इसकी भनक कारोबारी को लग गई, बताते हैं, कि उस कारोबारी को लगभग दस लाख की त्यौहारी देनी पड़ी, और उसके बाद भी उसके यहां छापा पड़ा। जाहिर सी बात हैं, कि जिस विभाग में त्यौहारी का लाखों रुपया मिलता हो, उस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी क्यों अपनी त्यौहारी खराब करने जाएगें? नकली खोआ बेचने वाले एक कारोबारी ने बताया कि जिले में जितना भी नकली खोआ और पनीर बिक रहा है, वह सभी फूड विभाग की मिली भगत से बिक रहा है। कोई मरे या बीमार पड़े इन लोगों के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। यह भी बताया कि त्यौहारों में सबसे अधिक पनीर, खोआ और मिठाई अधिकारियों के यहां ही जाता है। अब जरा अंदाजा लगाइए कि जिन अधिकारियों के यहां बिना कीमत के खोआ, पनीर और मिठाई जाएगा, क्या वह कार्रवाई या फिर फोन रिसीव करेगा? नकली खोआ और पनीर का कारोबार फलने फूलने में सबसे बड़ा हाथ विभाग के अधिकारी और कर्मचारी के साथ वे प्रशासनिक के अधिकारी और कर्मचारी हैं, जो फ्री में खाते भी है, और मोटी त्यौहारी भरी लेते हैं। यही कारण है, कि इस विभाग की हनक अब किसी भी कारोबारी में नहीं रह गई, यह भी न समझिए कि त्यौहारी देने के बाद कारोबारी खुश हो जाता है, या फिर अपने आप को सुरक्षित महसूस करने लगता है। इसका उदाहरण मेंहदावल रोड पर स्थित नमकीन के एक चर्चित कारोबारी के रुप में देखा जा सकता है। सच तो यह है, कि विभाग के लोग किसी के भी नहीं होते, यह उनके भी प्रति ईमानदार नहीं होते जिनके सेहत की सुरक्षा की गारंटी इन पर रहती हैं, और सरकार जिसके लिए इन्हें मोटी रकम देती है। यह उन कारोबारियों के भी नहीं होते, जिनके चलते इनके किचेन का खर्चा चलता है। यह लोग जिले के उन हजारों लाखों गरीब बच्चों के गुनहगार हैं, जो नकली मिठाई खाकर इलाज करवा रहे है। यह लोग समाज और सरकार दोनों के दुष्मन है। इन्हें इतना तक एहसास नहीं होता कि इनके भी परिवार और बच्चे होतें हैं, इन्हें लोगों की बददुआएं से भी डर नहीं लगता।  चूंकि ऐसे लोगों का सब कुछ पैसा होता है, इस लिए यह अपने परिवार और बच्चे को भी दांव पर लगाने से नहीं हिचकते।