ओमप्रकाश गौतम
गढ़मुक्तेश्वर प्राचीन नक्का कुआं  शिव मंदिर में चल रही भागवत कथा के सत्यम दिवस की कथा का वर्णन करते हुए कथा व्यास पंडित रामकृष्ण दास जी महाराज ने बताया कि यदि आपने 6 दिन तक कथा नहीं सुनी हो और सातमें दिन की कथा को श्रवण कर लिया जाए तो भी कथा श्रवण का पूर्ण लाभ प्राप्त हो जाता है। व्यास जी ने बताया एक बार भगवान श्री कृष्ण को झूठा कलंक लग गया एक सत्राजित नाम के राजा ने भगवान श्री कृष्ण को इसमंतक मणि चुराने का झूठा कलंक लगाया । भगवान श्री कृष्ण को वह मणि जामवंत जी की गुफा में जामवंत जी की बेटी के पास मिली। इसके बाद व्यास जी ने भगवान श्री कृष्णा के  सोलह हजार एक सो आठ विवाहों का वर्णन किया। एक नरकासो नाम का लेते था जिसको भोमासुर भी कहते हैं उसने अपने जेलखानों में राजाओं की सोलह हजार एक सो कन्या कैद करके रखी हैं । भगवान श्री कृष्ण ने आकर इसका प्राणअंत कर दिया। इन सब कन्याओं ने कहां प्रभु अब हम आपको छोड़कर कहां जाएं हम आपके ही चरणों में रहना चाहते हैं। फिर भगवान ने एक ही मुहूर्त में इन सब के साथ विवाह किया और द्वारिका में सबके लिए अलग-अलग महल बनाए । फिर पांडवों के राजसूर्य महायज्ञ की कथा सुनाई। इसके बाद भगवान के परम मित्र सुदामा जी महाराज की कथा का बड़ा सुंदर वर्णन किया । सुदामा चरित्र की कथा सुनकर सभी भक्त भाव विभोर हो गए । उसके बाद में संपूर्ण कथा का वर्णन करते हुए व्यास विदाई की गई सभी श्रद्धालु भक्तों ने नम आंखों से व्यास जी की विदाई की व्यास जी का तिलक कर भागवत जी का तिलक कर लड्डू गोपाल जी का तिलक करके विदाई की गई । इस अवसर पर मुख्य यजमान मुकेश सैनी माया सैनी डॉक्टर चरण सिंह सैनी राजबाला , पंडित विनोद शर्मा शास्त्री, ऋषभ शर्मा साउंड, नंदकिशोर उपाध्याय, लाला टेक चंद,थे।