जब रेडियोलाजिस्ट आपरेशन करेगा तो मरीज कैसे जिंदा बचेगा!
-जिस तरह मेडिकल कालेज अंबेडकरनगर में तैनात और ओमवीर हास्पिटल बस्ती के सर्जन डा. नवीन कुमार चौधरी के फोड़ा का चीरा लगाने से पल्टू की मौत हो गई, ठीक उसी बस्ती मेडिकल कालेज के रेडियोलाजिस्ट डा. राजेष पासवान ने सर्जन न होते हुए भी गालुर यादव के फोड़ा में चीरा लगाया, और मौत हो गई
-आपरेशन डा. राजेश पासवान ने अपने केयर डायगनोसिस्ट सेंटर में किया, भर्ती किरन सर्जिकल सेंटर में किया
-जब तबियत बिगड़ने लगी तो किरन सर्जिकल के डा. एसपी चौधरी ने कहा जिसने आपरेशन किया उसे दिखावा, डा. पासवान के सहायक ने कहा जहां भर्ती किया वही जिम्मेदार
-आपरेशन का डा. राजेश पासवान ने कुल 23 हजार लिया, और डा. एसपी चौधरी ने इलाज भर्ती सहित कुल 60 हजार लिया, दोनों डाक्टरों ने मरीज को चूस लिया
-इससे पहले मरीज के रिष्तेदार और पत्रकार वीरेंद्र कुमार और मृतक के पुत्र राम मनोरथ यादव डा. प्रमोद चौधरी को दिखाया, जहां पर आपरेशन करने से इंकार कर दिया
-जब डा. एसपी चौधरी के गए तो उन्होंने यह कहते हुए आपरेशन कर दिया कि पहले मैं डा. राजेश पासवान से पूछ लूं क्यों कि आपरेशन उन्हीं को करना हैं, अगर उन्होंने कर दिया तो भर्ती हम अपने अस्पताल में कर देगें
-जब डा. पासवान आपरेशन करने को तैयार हो गए तो डा. एसपी चौधरी ने मरीज को भेज दिया, वहां पर डा. पासवान वही कहा जो डा. नवीन चौधरी ने पल्टू के पुत्र वीरेंद्र प्रताप से कहा कि नो प्राब्लम चीरा लगाकर मवाद को निकाल लिया जाएगा, 20 हजार जमा करवा लिया, आपरेशन के बाद तीन हजार और अल्टासाउंड का 800 रुपया और लिया
-जिस डा. पासवान का काम कैली अस्पताल में अल्टासाउंड करने की है, वह गंभीर आपरेशन कर रहा, केयर डायगनोसिस्ट सेंटर में रातभर पासवान अल्टासाउंड करते और आपरेशन भी रात में ही करते
-इन्होंने बोर्ड पर न तो अपना नाम लिखा रखा है, और न मोबाइल नंबर ही, सालों से यह अनियमित आपरेशन और अल्टासाउंड सेंटर चला रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई
-मेडिकल कालेज से यह डा. नवीन की तरह मरीज को आपरेशन के लिए अपने केयर डायगनोसिस्ट सेंटर पर ले जाते
बस्ती। बस्ती के डाक्टर चाहें प्राइवेट अस्पताल के हों या फिर चाहें मेडिकल कालेज या फिर चाहें जिला अस्पताल और महिला अस्पताल सहित सीएचसी एवं पीएचसी के हों सभी ने मरीजों का खून चूसने का टारगेट बना लिया है। मरीजों का खून चूसने तक ही सीमित रहे तो ठीक हैं, लेकिन जब लोग पैसा कमाने के चक्कर में मरीजों को मारने लगते हैं, तो समाज ऐसे डाक्टरों को न जाने क्या-क्या नाम देती है। जिस तरह आए दिन डाक्टरों की लापरवाही से मरीजों के मरने की घटनाएं सामने आ रही है, उसने डाक्टर को भगवान से हैवान बना दिया। बार-बार कहा जाता है, कि अगर किसी मरीज की मौत कंपलीकेशन के कारण होती हैं, तो परिजन बर्दाष्त कर लेते हैं, लेकिन जब लापरवाही से होती है, तो गुस्सा होना लाजिमी है। अगर आईएमए इसे प्राइवेट अस्पतालों को धन उगाही की नीयत से निशाना बनाने की बात करते हैं, तो यह उनकी समझ और सोच है। आईएमए वालों को सोचना चाहिए कि हर कोई धन उगाही करने के लिए आरोप नहीं लगाता। अब हम आप को उस डाक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो है तो रेडियोलाजिस्ट लेकिन इन्हें गंभीर से गंभीर आपरेशन करने में कोई परहेज नहीं, मरीज मरे या जिए इनसे कोई मतलब नहीं, इन्हें तो आपरेशन का 20-25 हजार चाहिए। अगर इतना धन देने के बाद भी मरीज की जान बच सकती है, तो भी परिजन को कोई तकलीफ नहीं होती, लेकिन जब 80-90 हजार खर्च करने के बाद भी मरीज की जान नहीं बचती तो गंभीर विषय है। इस महान डाक्टर का नाम हैं, डा. राजेश पासवान, यह वर्तमान में मेडिकल कालेज में सहायक प्रोफेसर के रुप में रेडियोलाजिस्ट पद पर तैनात है। हैं, तो यह पीएमएस के डाक्टर और यह प्रतिनियुक्ति पर है। इन्हें पैसा कमाने की इतनी ललक रहती है, कि यह मरीज की जान लेने के लिए भी तैयार रहते है। जब एक रेडियोलाजिस्ट आपरेशन करेगा तो मरीज मरेगा ही।
जिस तरह मेडिकल कालेज अंबेडकरनगर में तैनात और ओमवीर हास्पिटल बस्ती के सर्जन डा. नवीन कुमार चौधरी के द्वारा फोड़ा का चीरा लगाने से पल्टू की मौत हो गई, ठीक उसी तरह बस्ती मेडिकल कालेज के रेडियोलाजिस्ट डा. राजेश पासवान ने सर्जन न होते हुए भी गालुर यादव के फोड़ा में चीरा लगाया, और उसकी मौत हो गई। आपरेशन डा. राजेश पासवान ने अपने केयर डायगनोसिस्ट सेंटर में किया, भर्ती किरन सर्जिकल सेंटर में करवाया।
जब तबियत बिगड़ने लगी तो किरन सर्जिकल के डा. एसपी चौधरी ने कहा कि जिसने आपरेशन किया उसे दिखाओ, जब डा. पासवान नहीं मिले तो उनके सहायक ने कहा जहां भर्ती किया वही जिम्मेदार। आपरेशन का डा. राजेश पासवान ने कुल 23 हजार लिया, और डा. एसपी चौधरी ने इलाज भर्ती सहित कुल 60 हजार लिया, दोनों डाक्टरों ने मरीज को खूब चूसा और जब इलाज करने की बारी आई तो एक दूसरे डाक्टर पर टालते रहें, इसी टालमटोल के बीच मरीज की जान चली गई। इससे पहले मरीज के रिष्तेदार और पत्रकार वीरेंद्र कुमार और मृतक के पुत्र राम मनोरथ यादव डा. प्रमोद चौधरी को दिखाया, जहां पर आपरेशन करने से इंकार कर दिया, जब डा. एसपी चौधरी के गए तो उन्होंने यह कहते हुए आपरेशन करने से इंकार कर दिया कि पहले मैं डा. राजेश पासवान से पूछ लूं क्यों कि आपरेशन उन्हीं को करना हैं, अगर उन्होंने हो कर दिया तो भर्ती हम अपने अस्पताल में कर देगें। अब जरा अंदाजा लगाइए एक नामचीन सर्जन आपरेशन के लिए रेडियोलाजिस्ट से सलाह लेने को कहा। इससे पता चलता है, दोनों डाक्टरों के बीच पैसा कमाने का इस तरह का समझौता है। वरना कोई सर्जन क्यो आपरेशन के लिए रेडियोलाजिस्ट से सलाह लेगा। जो आपरेशन एसपी चौधरी को करना चाहिए था, उस आपरेशन को करने के लिए डा. पावान के अनैतिक केयर डायगनोेस्टि में भेज दिया। ताकि दोनों मरीज को चूसा जा सके, एक ने आपरेशन के नाम पर 23800 रुपया लिया और दूसरे ने भर्ती और इलाज करने के नाम पर 60 हजार लिया, दोनों को तो पैसा मिल गया, लेकिन मरीज के नरिजन को क्या मिला पिता की लाश। क्या यही डाक्टर का धर्म है। जब डा. पासवान आपरेशन करने को तैयार हो गए तो डा. एसपी चौधरी ने मरीज को भेज दिया, वहां पर डा. पासवान वही कहा जो डा. नवीन चौधरी ने पल्टू के पुत्र वीरेंद्र प्रताप से कहा कि नो प्राब्लम चीरा लगाकर मवाद को निकाल लिया जाएगा।-जिस डा. पासवान का काम कैली अस्पताल में अल्टासाउंड करने की है, वह गंभीर आपरेशन कर रहा, केयर डायगनोसिस्ट सेंटर में रातभर पासवान अल्टासाउंड करते और आपरेशन भी रात में ही करते। इन्होंने बोर्ड पर न तो अपना नाम लिखा रखा है, और न मोबाइल नंबर ही, सालों से यह अनियमित आपरेशन और अल्टासाउंड सेंटर चला रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, मेडिकल कालेज से यह डा. नवीन की तरह मरीज को आपरेशन के लिए अपने केयर डायगनोसिस्ट सेंटर पर ले जाते है। पत्रकार ने अपना परिचय भी दिया और कहा भी डाक्टर साहब अगर को खास दिक्क्त हो तो लखनउ ले जाउं। रिष्तेदार पत्रकार वीरेंद्र कुमार और पिता को खोने वाले राम मनोरथ यादव ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियों से कहते हुए दोनों डाक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और दोनों का सेंटर सील करने की मांग की है।
0 Comment