‘हर्रैया’ के ‘धोबहा’ के 14 ‘मकानों’ पर चलेगा ‘बाबाजी’ का ‘बुलडोजर’
-किसी ने बंजर तो किसी ने खलिहान तो किसी ने नवीन परती की जमीन पर कब्जा कर बना लिया एक मंजिला, दों मंजिला और तीन मंजिला भवन
-जिस प्रधान और लेखपाल की जिम्मेदारी सरकारी जमीनों की रखवाली करने की उन्हीं दोनों ने पैसा लेकर कब्जा करवा दिया
-हाईकोर्ट ने इस मामले में डीएम को कार्रवाई कर व्यक्तिगत शपथ-पत्र देने का आदेश दिया
-गांव के चंदन कुमार और इनके अधिवक्ता केएल तिवारी की मेहनत रंग लाई, डीएम को हर हाल में मकानों पर बुलडोजर चलवाना होगा
-जिन लोगों ने प्रधान और लेखपाल की मिली भगत से सरकारी जमीनों पर मकान बनवा लिया, उनमें सुखई पुत्र साहू, मंगरु पुत्र रामदास, पंचम पुत्र रामदास, राकेश हीरालाल पुत्र झगरु, रामगनेश पुत्र कौलेसर, सुनील पुत्र झगरु, असगर पुत्र खलील, चिन्नूशाह पुत्र सुलेमान, सुखलाल पुत्र बैजराम, राजेश पुत्र बैसराम, रामकुमार पुत्र रामगोपाल, चंदन कुमार पुत्र तुलसीराम, मुराली पुत्र सीताराम एवं बैसराम पुत्र मिरची
बस्ती। जिले में पहली बार एक साथ 14 मकानों पर बाबाजी का बुलडोजर हाईकोर्ट के आदेश पर हर्रैया तहसील के ग्राम पंचायत धोबहा में चलने वाला है। इन सभी ने खलिहान, बंजर और परती की जमीन पर कई-कई मंजिला भवन बना लिया। जिस प्रधान और लेखपाल की जिम्मेदारी सरकारी जमीनों की रखवाली करने की उन्हीं दोनों ने पैसा लेकर कब्जा करवा दिया। किसी से 50 हजार लिया तो किसी से एक लाख लिया, अनेक शिकायतें चंदन कुमार की ओर से की गई, लेकिन हर बार पैसा लेकर हर्रैया तहसील वाले मामले को दबा देते थे, मजबूर होकर चंदन कुमार को हाईकोर्ट में पीआईएल अधिवक्ता केएल तिवारी के जरिए दाखिल करना पड़ा। जहां पर हाईकोर्ट ने इस मामले में डीएम को कार्रवाई कर व्यक्तिगत शपथ-पत्र देने का आदेश दिया। गांव के चंदन कुमार और इनके अधिवक्ता केएल तिवारी की मेहनत रंग लाई, डीएम को हर हाल में मकानों पर बुलडोजर चलवाना होगा, जिन लोगों ने प्रधान और लेखपाल की मिली भगत से सरकारी जमीनों पर मकान बनवा लिया, उनमें सुखई पुत्र साहू, मंगरु पुत्र रामदास, पंचम पुत्र रामदास, राकेश हीरालाल पुत्र झगरु, रामगनेष पुत्र कौलेसर, सुनील पुत्र झगरु, असगर पुत्र खलील, चिन्नूशाह पुत्र सुलेमान, सुखलाल पुत्र बैजराम, राजेश पुत्र बैसराम, रामकुमार पुत्र रामगोपाल, चंदन कुमार पुत्र तुलसीराम, मुराली पुत्र सीताराम एवं बैसराम पुत्र मिरची का नाम शामिल है। वैसे भी पूरे जिले में सबसे अधिक सरकारी जमीनों पर हर्रैया तहसील में ही कब्जा है। सबसे अधिक इसी तहसील में भूमाफिया है, जिन्हें तहसील वाले संरक्षण देते है। अब जरा अंदाजा लगाइए कि यह पीआईएल प्रधान और लेखपाल की ओर से दाखिल करना चाहिए था, लेकिन दाखिल गांव का एक आम नागरिक ने किया। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब एसडीएम, तहसीलदार और नायबतहसीलदार चाहेंगे तो भी बुलडोजर चलने से नहीं रोक सकते है। जिन लोगों ने पैसा लिया, उन्हीं लोगों के द्वारा ही बुलडोजर चलवाया जाएगा। डीएम को उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जिनके चलते उन्हें व्यक्तिगत हाईकोर्ट में शपथ-पत्र दाखिल करना पड़ेगा।
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