बस्ती। जिले में भाजपा के दो ऐसे नेता भी है, कि अगर यह दोनों कोई बात सच भी कहें तो लोग यकीन करने को जल्दी तैयार नहीं होतें है। इनमें एक नाम ‘संजय चौधरी’ और दूसरे का नाम ‘अनूप खरे’ है। अब जरा जिला पंचायत अध्यक्ष के द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे उस पत्र पर नजर डालिए, और सोचिए कि यह जो राय दे रहे हैं, उनमें कितना सच और कितना गलत है। क्या कोई मानेगा कि जनप्रतिनिधियों की अपेक्षा अधिकारी गुणवत्ता परक काम कम करवातें है। इनका सुझाव हैं, कि अगर समय से पंचायत चुनाव नहीं हो सकता तो प्रशासक नियुक्ति करने के बजाए जिला पंचायत अध्यक्ष, क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष और प्रधानों का ही कार्यकाल बढ़ा दिया जाए, इन्होंने अपने अनुभव का हवाला देते हुए लिखा कि प्रषासक की अपेक्षा जनप्रतिनिधि अच्छी और गुणवत्तापरक काम कराते है। इनके इस पत्र पर जिला पंचायत अध्यक्ष, क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष और प्रधान तो ताली बजा रहे हैं, लेकिन जनता कह रही है, कि यह सब लुटेरे हैं, इनका कार्यकाल न बढ़ाया जाए। यह लोग चाहते हैं, कि पांच साल के लूट के बाद और लूटने का रिन्यूवल हो जाए। पांच साल में शायद जिला पंचायत अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को इससे पहले कभी पत्र लिखा होगा, और इनके पहले पत्र पर ही जनता सवाल खड़े कर रही हैं, अब आप समझ गए होगें कि जनता क्यों नहीं इन दोनों नेताओं की बात पर यकीन करती? कौन नहीं जानता कि पिछले लगभग पांच सालों में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों और प्रधानों ने किस तरह जिले को कंगाल कर दिया, एक भी ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत नहीं, जहां पर सरकारी धन का लूटपाट न हुआ हो, इसी लूटपाट के चलते 1182 ग्राम पंचायत, 14 क्षेत्र पंचायत और एक जिला पंचायत में से कोई भी माडल नहीं बन पाया, जब कि धन पानी की तरह लुटाया। जानकारों का कहना है, कि प्रशासक भी कोई ईमानदार नहीं होतें, लेकिन वह जनप्रतिनिधियों की अपेक्षा कम बेईमान होतें हैं। प्रशासक इस लिए कम बेईमान होता, क्यों कि उसे नौकरी जाने का खतरा रहता हैं, और अधिकांश जनप्रतिनिधि इस लिए बेईमान होते हैं, क्यों कि उन्हें कोई खतरा नहीं होता। प्रशासक चोरी भी करेगा तो नमक के बराबर, वहीं यह बाते जनप्रतिनिधियों के बारे में इस लिए नहीं कही जा सकती, क्यों कि इनका चोरी और बेईमानी करने का कोई पैमाना नहीं है।

मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र के बाद जो कमेंट सोशल मीडिया में आ रहे हैं, उससे पत्र लिखने वाली की जगहंसाई हो रही है। इनके सुझाव पर ताली बजाने के बजाए इन्हें बुरा भला कह रहें है। रवि पांडेय लिखते हैं, कि सब लुटेरे हैं, भईया कोई दूध का धुला नहीं है। भाजपा के सत्येंद्र सिंह उर्फ भोलू कहते हैं, कि और लुटे की खातिर। एक ही लाइन में इन्होंने सबकुछ कह दिया। संजय ओझा कमेंट करते हैं, कि ताकि विकास की यात्रा जारी रहे। गोलू शुक्ल लिखते हैं, कि पांच साल के लिए फिर से रिन्यूवल किया जाएगा। षिवकुमार चौधरी कमेंट करते हैं, कि अपना विष्वास अपना विकास जय हो। बृजेश पटेल लिखते हैं, कि डबल इंजन की सरकार समय से चुनाव नहीं करा पा रही है। आलोक कुमार सिंह डीडीयू, जिला पंचायत अध्यक्ष से सवाल करते हैं, कि पूरे कार्यकाल में सीएम को कितना पत्र लिखा। अमर बहादुर सिंह कमेंट करते हैं, कि प्रधानजी को इसी बहाने लूटने का मौका मिल जाएगा। मंटू पांडेय ने जिला पंचायत अध्यक्ष पर कटाक्ष करते हुए लिखते हैं, कि काश इतनी मेहनत और लगन से विकास कार्य किए होते। अवध न्यू लाइव लिखते हैं, जी बिलकुल बस्ती में लॅूटने की प्रथा कुछ ज्यादा ही है। दुर्गेश शुक्ल लिखते हैं, कि कुछ नहीं मिलेगा, चोरी का बहुत मौका मिल जाएगा। राहुल कुमार लिखते हैं, कि ताकि जो गलती से छूट गया, उसे भी लूट सके। एक भी आम आदमी ने जिला पंचायत अध्यक्ष की बातों का समर्थन नहीं किया। इससे अंदाजा लगा लीजिए कि जनता जिला पंचायत अध्यक्ष के बारे क्या सोचती है?