बस्ती। सूदखोर का नाम आते ही जैसे किसी यमराज की शक्ल सामने आ जाती। इन्हें अगर मौत का सौदागर कहा जाए तो गलत नहीं होगा, बार-बार सवाल उठ रहा है, कि आखिर कब तक गरीब परिवार सूदखोंरों के चंगुल में फंसा रहेगा। सूदखोरों को चाहिए कि ऐसे लोगों को कम से कम आजाद कर दे, जिन्होंने मूलधन के साथ सूद का पैसा भी चुकता कर दिया। एक और परिवार सूदखोंरों के चंगुल से आजाद होने को छटपटा रहा है। इस महिला का नाम कमरजहां पत्नी हनीफ हैं, और यह थाना सोनहा के ग्राम सेखुई की रहने वाली है। इस महिला ने सूद पर लेन-देन का कारोबार करने वाले बबलू पुत्र उमाशंकर बड़ा भाई राजू जो गांव के ही निवासी हैं, से आज से छह साल पहले 30 हजार 15 फीसद ब्याज यानि साल में 180 फीसद पर लिया। जिले का अब तक सबसे बड़ा ब्याज पर लिया गया धन है। महिला का कहना है, कि मूलधन और ब्याज दोनों अदा कर चुकी हूं, लेकिन बबलू की नीयत बदल चुकी है, कहता है, कि अभी भी 25 हजार बाकी है, उसे चुकता कर दो, नहीं दो गांव में रहना दूभर कर दूंगा। कहती है, कि इसी डर से पति घर छोड़कर कहीं चले गए। पति का आजतक पता नहीं चला। ऐसा लगता है, कि मानो पति ने आत्महत्या कर ली हो। डीआईजी से मिलकर कहा कि थाना को जानकारी दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं किया। बल्कि पुलिस वाले उल्टा 25 हजार देने का दबाव बना रहे हैं, ऐसा लगता है, कि मानो पुलिस भी सूदखोंरों से मिली हुई है। कहा कि हल्का-4 के दरोगा और सिपाही राजू की दुकान पर बैठकर बिचौलिए का काम कर रहें हैं। कहती है, कि दरोगाजी सूदखोंरों से कहते हैं, कि तुम इसी तरह सूद पर पैसा देते रहो, हम तुम्हारे साथ है। जिसके चलते सूदखोरों का हौसला बढ़ा हुआ है, राजू कहता है, अगर इसने पैसा नहीं दिया तो आतंकवादी घोषित कर जेल भेजवा देगें। पूरा परिवार भयभीत है। जिस पुलिस से महिला को न्याय मिलना चाहिए, वही पुलिस सूदखोंरों की भाषा बोल रही है। अब आप लोग समझ ही गए होगें कि क्यों सूदखोंरों का मन बढ़ता जा रहा है, और क्यों लोग आत्महत्याएं कर रहे है। वैसे सोनहा पुलिस इस तरह का आरोप नहीं लगता।