देश की एकता खतरे में, युवा सड़क पर, सत्ता की हनक में युवाओं के संघर्ष को कुचलने का प्रयास संस्थाओं के जिम्मेदार लोकतंत्र को बचाने से झाड़ रहे पल्ला,हुए सत्ता के आधीन 

संविधान से नफरत कर उसी संविधान की शपथ लेकर सत्ता पर पहुंचकर हुए काबिज,बनाया इतिहास

ओमप्रकाश गौतम
 गढ़मुक्तेश्वर: भारतीय संविधान दुनिया का सबसे मजबूत सबको समानता का अधिकार देता है। मामूली गरीब हो या सर्वोच्च नागरिक को एक वोट का समान अधिकार है। देश की एक विचार धारा संविधान,देश की आन बान शान तिरंगा से नफरत करते हुए सर्वोच्च सत्ता पर पहुंचे तो  देश की संवैधानिक संस्थाओं पर काबिज हो गए। लोकतंत्र के रक्षक चारों स्तंभ लोकतंत्र को कुचलते हुए देख रहे है। संवैधानिक संस्थाओं के पदों पर विराजमान सत्ता के आधीन होकर केंद्रित हो गए। जो लोकतांत्रिक देश भारत के इतिहास में दर्ज हो गए। शिक्षित युवा बेरोजगार हुए युवाओं के साथ उस समय खुला खिलवाड़ होने लगा जब   एक एक कर पेपर लीक का मामला गंभीर होकर उठा तो युवा मजबूर हुए और सड़क पर आ गए। देश का भविष्य युवाओं को लेकर विपक्ष के राहुल गांधी ने अभियान चला दिया जिससे आग ने घी ने काम किया। संवैधानिक अधिकार युवाओं के प्रदर्शन को कुचलने के लिए सत्ता ने हनक में देश की सैन्य ताकत झौंक दी और बेटियों और युवाओं के अलावा मीडिया कर्मियों को बर्बरता का सामना करना पड़ा। 

लोकतंत्र का रक्षक चुनाव आयोग बना कठपुतली=
चुनाव आयोग सत्ता के प्रभाव  में कठपुतली बनकर इतिहास में दर्ज हो गया। निष्पक्ष चुनाव नहीं कराए जाने के आरोप लगे तो मनमानी कर सुना नहीं गया। एल ओ पी राहुल गांधी के किसी भी आरोप का जवाब नहीं दिया बल्कि देश से माफी मांगने को कहा गया।  चुनाव की फुटेज देने से साफ इनकार किया गया उस समय हद हुई जब पश्चिम बंगाल में वोट काट कर मतदाताओं को वंचित कर दिया। शीर्ष अदालत ने भी अगले चुनाव में वोट देने का फरमान दिया। चुनाव सम्पन्न कराए जाने के बाद 26 लाख वंचित मतदाताओं को जोड़ दिया गया। 

संविधान,तिरंगा से नफरत =
देश की आजादी के बाद 70 साल तक भारतीय तिरंगा जो देश की आन बान शान है को अपने ऑफिस और नहीं फहराया और स्वीकार नहीं किया। यही सोच सत्ता की हनक में जाति धर्म में बांटने में जुटी रही। संवैधानिक संस्थाओं पर काबिज हो गए। लोकतंत्र के रक्षक जिम्मेदार हुकूमत के हमदर्द बन गए। 

गरीब को और गरीब बनाया=
गरीब को पांच किलो राशन के जरिए और गरीब बनाकर अंधभक्त बना दिया जबकि देश के संस्थान पूंजीपतियों को देकर शिखर पर पहुंचा दिया गरीब के साथ युवाओं को भी नहीं छोड़ा तो ज्वाला भड़क रही है। इतिहास में दर्ज लोकतंत्र के कमजोर करने वाले जिम्मेदारों को भुलाया नहीं जाएगा।