बस्ती। जिले की वाल्टरगंज चीनी मिल के मौसमी एवं नियमित कर्मचारी पिछले 298 दिन से मिल गेट पर धरने पर बैठे हैं। कर्मचारी अपने बकाया वेतन, रिटेनर और मिल को पुनः चलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार और जिला प्रशासन का रवैया पूरी तरह तानाशाही भरा है।

298 दिन के धरने का सच’

 

1.बकाया पर चुप्पी’रू वर्ष 2018 से मौसमी कर्मचारियों का वेतन और नियमित कर्मचारियों का रिटेनर बकाया है। 298 दिन से लगातार धरने के बाद भी एक रुपये का भुगतान नहीं हुआ।

2.’तानाशाही रवैया’ प्रशासन मिल मालिकों पर कार्रवाई करने के बजाय धरनारत मजदूरों को ही धमका रहा है। पुलिस भेजकर उठाने का दबाव बनाया जा रहा है।

3.’मिल बंद, मजदूर बर्बाद’ बिना देयक निस्तारण मिल बंद कर दी गई। सैकड़ों परिवार भुखमरी की कगार पर हैं, पर शासन को किसानों-मजदूरों की कोई चिंता नहीं।

4.’ज्ञापन बेअसर’ 298 दिन में दर्जनों बार कमिश्नर बस्ती मंडल, जिलाधिकारी, शासन और मंत्रालय को ज्ञापन दिए गए। हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, आदेश एक भी नहीं।

 

’संघर्ष समिति का ऐलान’

298 दिन से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से धरना चल रहा है। सरकार-प्रशासन की तानाशाही अब बर्दाश्त के बाहर है। यदि तुरंत बकाया वेतन-रिटेनर का भुगतान और बीआरएस कराकर मिल चलाने का आदेश नहीं आया तो आंदोलन उग्र होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।

 

’हमारी मांगें’

 

1. 2018 से बकाया समस्त वेतन, रिटेनर, बोनस का ब्याज सहित तत्काल भुगतान हो।

2. वाल्टरगंज चीनी मिल का बीआरएस कराकर पेराई सत्र 2026-27 से मिल चलाई जाए।

3. मजदूरों का शोषण करने वाले मिल मालिकों और लापरवाह अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज हो।