हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर।

कोथला खादर में भू-माफियाओं का आतंक

शिकायत करने पर देते हैं झूठे मुकदमे में फसाने की धमकी।

हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर। कोथला खादर की भूमि लगातार विवादों में घिरी रही है वहीं हल्का लेखपाल अनुज कुमार और उसका सहायक बिटटु पर विवादित कृषि भूमि का बैनामा कराने और इसकी शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देकर भागने का आरोप लगाते हुए पीड़ित किसान ने पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों से गुहार लगाई गढ़ क्षेत्र के गांव दौताई निवासी साजिद मूंछ ने एसडीएम समेत पुलिस के आलाधिकारियों को शिकायत पत्र भेजा था जिसमें उल्लेख किया गया है कि कोथला खादर में स्थित उसकी कृषि भूमि है जिसका मुकदमा तहसीलदार कोर्ट में विचाराधीन है उसी भूमि का हल्का लेखपाल ने अपने सहायक के साथ मिलकर फर्जी ढंग से बैनामा करा लिया है किसान का आरोप है कि उक्त बैनामा लेखपाल द्वारा अपनी पत्नी प्रियंका पत्नी अनुज कुमार  और उसके निजी सहायक बिटटू ने अपनी मां शन्ति देवी पत्नी जवाहरलाल के हक में कराया था पीड़ित किसान का आरोप है कि उक्त लेखपाल और उसका सहायक प्राकृतिक झील वाली भूमि में आवंटित हुए पटटे जो शासन स्तर से निरस्त कर दिए गए थे  उन्हें भी उक्त लेखपाल और उसका सहायक संक्रमणीय भूमिधर का दर्जा दिलाकर महानगरों में जुड़े पूंजीपतियों को बिकवाकर मोटी रकम वसूलने का गोरख धंधा कर रहे है पीड़ित किसान ने मामले की बारीकी से जांच करा कर कड़ी कार्यवाही करने की गुहार लगायी है।

दिनांक 03/05/2024 गढ़मुक्तेश्वर एसडीएम साक्षी शर्मा का कहना था कि शिकायत पत्र के आधार पर जांच कराई जा रही है जिसमें कोई भी सच्चाई सामने आने पर इस प्रकरण से संबंधित लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। गढ़मुक्तेश्वर तहसीलदार व एसडीएम से पीड़ित की शिकायत करने के बावजूद भी अभी तक किसी प्रकार की हल्का लेखपाल व उसके निजी सहायक के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की गयी है। इसी प्रकरण को लेकर आज फिर एसडीएम साक्षी शर्मा से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि तहसीलदार से जांच करवा कर अग्रिम कार्यवाही की जायेगी 

अब सवाल यह उठता है कि करीब एक माह बीत जाने के बाद भी अधिकारीयों द्वारा अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीें हुई है।जब कोई कार्यवाही होती नहीं है तो पीड़ित  अपनी गुहार कहां लगाने जाये। 

आपको बताते चले तहसील गढ़मुक्तेश्वर कोथला खादर स्थित प्राकृतिक झील और ग्राम समाज की भूमि 450 सौ एकड़ सरकारी भूमि के घोटाले का पर्दाफाश होने पर भूमाफियों में हड़कंप मच गया था। सर्वोत्तम न्यायालय के आदेश को ताक पर रखकर स्थानीय प्रशासन द्वारा कोथला खादर स्थित ग्राम समाज की सरकारी झील में आवंटित किया गए अवैध पटटों का खुलासा होने पर प्रशासन इनको नष्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी थी कोथला खादर में सरकारी झील की 300 एकड़ भूमि सहित 450 एकड़ भूमि पर लगभग 175 लोगों का अवैध पटटे कब्जा किया हुए हैं इस भूमि की कीमत करोड़ों रुपए में आंकी गई है जिस पर कब्जा किए हुए अवैध पटटों को कुछ लोग ने गुजरात और दिल्ली गाजियाबाद में रहने वाले कई व्यापारियों को इस भूमि के फर्जी बैनामें भी करा दिए थे। इस भूमि में जिन लोगों ने फर्जी पट्टे लिए हैं अवैध कब्जे से जंगल में रहने वाले दुर्लभ जीवों के जीवन को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था जबकि भू जल का स्तर  भी लगातार घटता जा रहा है इस भूमि पर कोथला खादर स्थित प्राकृतिक झील का कुल रकबा लगभग 300 एकड़ है जबकि ग्राम समाज भूमि का रकबा 150  एकड़ है। इस सारे 450  एकड़ में लगभग 175 लोगों ने कोई भी औपचारिकता पूरी कराये बिना प्रशासन से सांठ-गांठ कर फर्जी पटटों  के आधार पर सीधे खतौनी में अपना नाम अमलदरामद करा  लिया और करोड़ों रुपए की इस सरकारी भूमि पर अवैध ढंग से काबिज होकर प्राकृतिक झील को तहस नहस कर डाला इससे जंगल में रहने वाले उन जीव जंतुओं के अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा हो गया है जो इस झील में आकर जल का सेवन करते थे जबकि प्राकृतिक झील नष्ट होने में क्षेत्र गांवों का भूर्गीय जल स्तर भी लगातार घटता जा रहा है देश में लगातार घट रहे जलस्तर की समस्या को रोकने के लिए उसे समय पूर्व सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि किसी भी प्राकृतिक तालाब झील अथवा पोखर का अस्तित्व समाप्त ने किया जाए और अगर इन पर कोई अवैध कब्जा हो रहा है तो उसे सरकार तुरंत हटवाया जाये। उस समय तत्कालीन गढ़मुक्तेश्वर एसडीएम श्री हरि प्रताप शाही ने बताया कि इन पटटों को अधिकांश निरस्त कर दिए गए थे। जबकि शेष लोगों के नाम और पटटों की जांच कर कर उन्हें भी नोटिस भेज दिए जाएंगे उन्होंने बताया कि प्राकृतिक झील और ग्राम समाज को सरकारी भूमि में जो पटटें दर्शायें गये है। वह पूरी तरह फर्जी है क्योंकि इनकी सारी प्रक्रिया ही अवैध है उन्होंने बताया कि फर्जी पटटों को नष्ट करने के बाद इस भूमि को अवैध कब्जा से मुक्त कराकर प्राकृतिक झील के अस्तित्व को फिर से कायम कराया जाएगा ताकि जंगल में रहने वाले दुर्लभ जीवों के जीवन को खतरा उत्पन्न ना हो पाए प्राकृतिक का और ग्राम समाज की सरकारी भूमि में फर्जी पट्टे हासिल करने वाले कुछ लोगों ने इस भूमि का काफी हिस्सा गुजरात और दिल्ली गाजियाबाद में रहने वाले कई व्यापारियों को बजरिया रजिस्ट्री बैनामा करोड़ों रुपए में बेच दिया है वैसे प्रदेश की योगी सरकार भू-माफियों पर लगाम कसने की लगातार  बात करती है लेकिन हापुड़ प्रशासन की नाक के तले भू-माफिया सांठ-गांठ करके कई वर्षो से 300 एकड़ झील की 150 एकड़ ग्राम समाज की भूमि को खुर्द बुर्द करके कब्जा जमाये हुऐ हैं। प्रशासन मौन है शिकायत करने के बाद भी तहसील प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीें की जाती है।किसानों के नाम की भूमि भी भूमाफियों ने सांठ-गांठ कर कब्जा कराया जा रहा है। आप को बताते चले कि 2005 में दिल्ली के पुलिस संयुक्त पुलिस कमिश्नर की कोथला स्थित भूमि को सरकारी संपत्ति में शामिल कर लिया गया था जबकि उनका गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने का प्रयास शुरू कर दिया है 

उस समय के तत्कालीन जिलाधिकारी ने बताया कि गढ़ स्थित कोथला बांगर और खादर के बहुत चर्चित भूमि घोटाले का खुलासा होने के बाद उक्त भूमि को सरकारी संपत्ति घोषित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है इसी जंगल की प्राकृतिक झील पर हुए अवैध कब्जे को हटाकर उसका स्वरूप वापस दिलाया जाएगा ग्राम समाज की भूमि में बनी आरोपी पुलिस अधिकारी एनएस राणा की आलीशान कोठी को सरकारी गेस्ट हाउस के रूप में प्रयोग किया जाएगा।