बस्ती। जिला सहकारी बैंक ने 10 लाख के ऋण सीमा तक समिति के सचिवों को तो करोड़ों तो दे दिया, लेकिन सचिव साहब यह देखने फील्ड में नहीं जा रहे हैं, कि जो पैसा खाद के कारोबार के लिए दिया गया, वह खाद समितियों पर हैं, कि नहीं, अगर नहीं हैं, तो क्यों नहीं अभी तक गबन के आरोप में सचिवों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया? समितियों पर खाद होने या न होने या फिर गबन होने का पता तब चलेगा, जब सचिव साहब एसी से बाहर निकलेगें। एक-एक समितियों पर नौ-नौ लाख बकाया है, लेकिन ऐसा लगता है, मानो सचिव साहब को बैंक के पैसे की कोई चिंता ही न हो, अगर चिंता होती तो जाकर समितियों पर देखते कि दिए गए ऋण के सापेक्ष समिति पर खाद है, कि नहीं? समितियों पर अगर खाद होती तो किसान खाद के लिए परेशान न होता, और न उसे ब्लैक में लेना ही
पड़ता। अगर समिति पर खाद और पैसा दोनों नहीं हैं, तो इसका मतलब सचिवों ने पैसे का या तो गबन कर लिया, या फिर कहीं और निवेश कर दिया। सचिव साहब पैसा आप ने दिया तो वापस लेने की जिम्मेदारी भी आप की ही है। जरा एक नजर बकाए पर भी डाल लीजिए, तब आपको पता चलेगा कि समितियों पर कितना पैसा बैंक का बकाया है। सचिव साहब अगर पैसा वापस नहीं हुआ तो बड़ी मुस्किल से खड़ी हुई बैंक कहीं आप की लापरवाही के चलते फिर न बैठ न जाए। ऋण दिया, पांच करोड़ 92 लाख, बकाया, पांच करोड़ 35 लाख। यह आकड़ा चार जुलाई 24 तक का है। सबसे बड़ा सवाल यह है, कि अगर समितियों के पास बैंक का पांच करोड़ 35 लाख है, तो फिर खाद कहां गया? सचिव साहब, आरटीजीएस पर आरटीजीएस करने से बैंक को नुकसान के सिवाय लाभ होने वाला नहीं है। अगर कोई समिति बकाया जमा नहीं कर रही है, तो फिर क्यों नहीं उस समिति का आरटीजीएस रोक दिया जाता। आरटीजीएस रोकने के बाद आप को समिति पर जाना चाहिए और देखना चाहिए कि दिए गए ऋण के सापेक्ष समिति पर खाद हैं, कि नहीं? अगर नहीं हैं, तो संबधित सचिव के खिलाफ गबन के आरोप में मुकदमा दर्ज करवाना चाहिए। न आप समिति पर जाएगें और रहे न मुकदमा ही दर्ज करवाएगें, तो फिर आप करेगें क्या? आप तो आज नहीं तो कल जिले से चले जाइएगा, भुगतना तो बैंक को ही पड़ेगा। अभी भी समय हैं, एसी कमरे से बाहर निकलिए और समितियों पर जाइए। रही बात एआर साहब की तो ऐसा लगता हैं, सचिवों ने इन्हंे भी अपने रंग में डाल लिया है, तभी तो यह भी एसी कमरे से बाहर नहीं निकलते। एआर के आने से इतना तो लाभ हुआ कि समितियों पर खाद जाने लगा, एआर साहब समितियों पर तो खाद जा रही है, लेकिन पैसा नहीं जमा हो रहा है, इसी लिए एआर साहब आप भी सचिव की तरह एसी से बाहर निकलिए और देखिए कि आप के सचिव लोग क्या कर रहे हैं? खाद बांट रहे हैं, या खाद के पैसे से कोई अन्य कारोबार कर रहे है। यह तभी पता चलेगा, जब आप एसी कमरे से बाहर निकलेगें। एआर साहब आपको उन सचिवों से सावधान रहना होगा, जो आप के आसपास मड़रा रहे है। क्यों कि कुछ ऐसे चिहिृत सचिव हैं, जिन्होंने खाद, गेहूं और धान में गोलमाल किया। पैसे की रिकवरी के लिए न सिर्फ बैंक के सचिव जिम्मेदार हैं, बल्कि एआर भी जिम्मेदार होते है। आप दोनों सभी समितियों पर तो नहीं जा सकते, लेकिन उन समितियों पर तो जा सकते हैं, जो बड़े बकाएदार है।
‘21’ लाख तो सचिव ‘अरुणेश पांडेय’ पर ‘बकाया’
बस्ती। लालगंज, बानपुर और सिंकदरपुर समिति के सचिव अरुणेष पांडेय पर सबसे अधिक 21 लाख 16 हजार बताया है, इनके लालगंज समिति पर 7.28 लाख, बानपुर में 5.45 लाख और सिंकदरपुर में 8.44 लाख सहित कुल 21.16 लाख बताया है। वैसे सबसे अधिक बकाया 9.74 लाख साउंघाट के बाघडीह समिति पर है। यहां हम आपको उन 51 बड़े बकाएदारों के बारे में जानकारी देगें, जिन पर पांच लाख से लेकर नौ लाख से अधिक का बकाया है। बनकटा पर 6.26 लाख, मरवटिया पर 5.80, रुधौली पर 7.78, गनवरिया पर 7.36, सजनाखोर पर 7.92, मनकौरा कला पर 6.85, पकरीचंदा पर 6.16, जोधीजोत पर 6.66, सुरुवार कला पर 6.08, जयनगर एकमा पर 6.13 लाख, लालगंज पर 7028, बानपुर पर 5.45, अमानाबाद टिकरिया पर 8.27, कलवारी पर 5.35, बहादुरपुर पर 5.84, सिकंदरपुर पर 8.44 लाख, पिपरा गौतम पर 6.39, नगर बाजार पर 7.94, देवरिया माफी पर 7.84, महसिन पर 5.45, बाघडीह पर सबसे अधिक 9.74, बायपोखर पर 6.08, भानपुर पर 7.10, दरियापुर पर 5.29, सहसरावं पर 6.85, मझौवा बाबू पर 8.44, बड़हरखुर्द पर 8.49, उभाई पर 6.81, ठेंगरहा पर 5.39, रमवापुर कुचरु पर 6.83, करमापिपरा पर 9.34, महराजगंज पर 5.83, भरवलिया पर 8.98, सांवडीह पर 7.88, अमयपुरा पर 5.28, सूदीपुर पर 6.19, दुबौलिया पर 8.45, बैरागल पर 6.93, महुआडाड़ पर 5.64, नयकापार कप्तानगंज पर 9.06, समौढ़ा पर 8.09, सुकरौली पर 5.52, साड़पुर दुबौली पर 7.71, आनंदपुर रुपगढ़ पर 6.69, कोडिला पर 5.80, भरौली बाबू पर 5.49, सल्टौआ पर 6.04, दसिया पर 6.21, पचानू पर 5.28, रोहदा हर्रैया पर 9.44, दुखेड़ी पर 5.19, परसरामपुर पर 6.25, सिंकदरपुर 5.74 एवं षंकरपुर पर 5.20 लाख सहित कुल 116 समिति पर पांच करोड़ 35 लाख बकाया है।
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