सूदखोरों के चंगुल में फंस कई हो गए र्स्वगवासी

-इनके चंगुल में फंसकर न जाने कितने घर और परिवार तबाह और बर्बाद हो गया, षहर छोड़कर भागना पड़ रहा, इज्जत, जमीन और जेवर से हाथ धोना पड़ रहा

-आदमी समाप्त हो जाता है, लेकिन इनका ब्याज और मूलधन कभी समाप्त नहीं होता, तमाम लोग इनके उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्याएं तक कर रहें


-एक ब्याज से छुटकारा पाने के लिए दूसरे ब्याज का सहारा लेना पड़ रहा, एक बार जो इनके चंगुल में आ गया, समझो उसकी मौत हो गई

-अच्छाखासा घर परिवार तबाह हो रहा है, व्यापारी या तो पलायन कर रहे हैं, या फिर आत्महत्या कर रहें, हंसता खेलता परिवार की खुशियां यह सूदखोर लोग छीन ले रहें

-महरीपुर, बेलाड़ी, पिपरागौतम, भेलवल, रुधौली, जिगना और गांधीनगर के सूदखोरों के चंगुल में छटपटा रहा जरुरतमंद

-शहर में एक सूदखोर न जाने कितने लोगों को तबाह कर चुका, 10 गुना तक छह माह में मूलधन पर ब्याज लेता, इसका खुलासा होने वाला

-सूद पर पैसा देने वालों का अमहटपार का एक नामी गांव हैं, इन्होंने इसे व्यापार बना लिया

-डरा हुआ व्यक्ति कुछ बोल नहीं पाता, मन की बात कह नहीं पाता, धोकरकसवा बन लोगों को लूट रहें

-हर कोई मजबूरी में सूद पर पैसा लेता, देना वाला मजबूरी का खूब फायदा उठाता, स्टांप पर हस्ताक्षर करवा कर सदा के लिए जमीन और जेवर अपने पास रख लेता

बस्ती। कहना गलत नहीं होगा कि चंद सूदखोरों की वजह से जिले के कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं, हंसता खेलता परिवार मुस्कराना भूल चुका है। इनके चंगुल में एक बार जो फंसा उसका सुखचैन चला गया। न जाने कितने घर और परिवार तबाह और बर्बाद हो चुके हैं, अनेक व्यापारियों को शहर छोड़कर भागना पड़ा, इज्जत, जमीन और जेवर से हाथ धोना पड़ रहा हैं, आदमी तो समाप्त हो जाता है, लेकिन इनका ब्याज और मूलधन कभी समाप्त नहीं होता, तमाम लोग इनके उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्याएं तक कर रहें है। एक ब्याज से छुटकारा पाने के लिए दूसरे ब्याज का सहारा ले रहें है। एक बार जो इनके चंगुल में आ गया, समझो उसकी मौत हो गई। अच्छाखासा घर परिवार तबाह हो रहा है, व्यापारी या तो पलायन कर रहे हैं, या फिर आत्महत्या कर रहें, हंसता खेलता परिवार की खुशियां यह सूदखोर लोग छीन ले रहें है। महरीपुर, बेलाड़ी, पिपरागौतम, भेलवल, रुधौली, जिगना और गांधीनगर के सूदखोरों के चंगुल में फंसकर न जाने कितने गरीब और व्यापारी छटपटा रहें है। शहर में एक सूदखोर न जाने कितने लोगों को तबाह कर चुका, 10 गुना तक छह माह में मूलधन पर ब्याज लेता, इसका खुलासा होने वाला, सूद पर पैसा देने वालों का अमहटपार का एक नामी गांव हैं, इन्होंने इसे व्यापार बना लिया। डरा हुआ व्यक्ति कुछ बोल नहीं पाता, मन की बात कह नहीं पाता, धोकरकसवा बन सूदखोर लोगों को लूट रहें है। हर कोई मजबूरी में सूद पर पैसा लेता, देना वाला मजबूरी का खूब फायदा उठाता, स्टांप पर हस्ताक्षर करवा कर सदा के लिए जमीन और जेवर अपने पास रख लेता है। न लेने वाला शिकायत करता और न देने वाला ही थाने जाता है। यह लोग परिवार को गम में ढ़केल दे रहे है। सबसे अधिक इनका शिकार कामगार और व्यापारी वर्ग हो रहा है। यह उन्हीं लोगों को सूद पर पैसा देते हैं, जिनसे यह या तो कुछ लिखवा लेते हैं, या फिर कुछ जेवर जमीन रखवा लेते है। कई नौजवान व्यापारी आत्महत्या तक चुके है। सूदखोरों के चलते समाज में अपराध बढ़ रहे हैं, परिवार तबाह हो रहे हैं। हाल ही एक व्यापारी पर इन लोगों ने इतना दबाव बनाया कि व्यापारी काफी तनाव में आ गए थे। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक लड़कियों की शादी और इलाज के लिए 10 से 20 फीसद महीना पर ब्याज पर लेने को मजबूर होते है, यह लोग इज्जत बचाने और जान बचाने के लिए सूद पर पैसा तो ले लेते हैं, लेकिन न तो वह समय से ब्याज दे पाते हैं, और न मूलधन ही चुकता कर पाते है। कहने का मतलब एक बार अगर किसी ने इनके पास अपनी जमीन घर और जेवर गिरवी रख दिया, समझो वह सूदखोरों का हो गया। परिवारों और व्यापारियों की बर्बादी और आत्महत्याएं के लिए समाज उन बाबू साहबों और पंडितजी लोगों को जिम्मेदार मानता है, जो मजबूरी का लाभ उठाते है। सौरभ श्रीवास्तव लिखते हैं, कि षहर में एक सूदखोर न जाने कितने लोगों को तबाह कर चुका, 10 गुना तक छह माह में मूलधन पर ब्याज लेता, कहा कि इसका खुलासा जल्द होने वाला है। ग्राम प्रधान संगठन की ओर से लिखा गया कि सूद पर पैसा देने वालों का अमहटपार का एक नामी गांव हैं, यहां के लोगों ने इसे व्यापार बना लिया। इन सूदखोरों की चपेट में जिले के कई सफेदपोश भी है, जो इनकी चंगुल से निकलने के लिए छटपटा रहे है।