बस्ती। हर्रैया तहसील के इमिलिया निवासी राम आशीष सिंह को राजकिशोर सिंह के करीबी होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इन्होनें जब मतदाता सूची में लगभग 250 लोगों के फर्जी होने की शिकायत की तो दबाव में एसडीएम ने न तो फर्जी नामों को निरस्त किया, और न जांच ही किया, दबाव इतना भारी था कि एसडीएम ने हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश को ही रददी की टोकरी में डाल दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले मामले का निस्तारण एसडीएम ने नहीं किया, अंतिम प्रकाशन भी हो गया, लेकिन फर्जी नामों को डिलीट नहीं किया गया, अवमानना याचिका तक दायर हुआ, हाईकोर्ट ने एसडीएम से कार्रवाई के बारे में पूछा, उसके बाद आनन-फानन में टीम गठित करके जांच करवाई गई, जिसमें 43 अपात्र पाए गए, हाईकोर्ट के कहने पर राम आशीष सिंह ने फिर से रिट दाखिल किया, इस पर हाईकोर्ट ने डीएम को सुनवाई कर मामले का निस्तारण करने का निर्देश दिया। जो 43 अपात्र पाए गए, उनमें अधिकतर मृतक, डबल नाम, तीन-तीन ग्राम पंचायतों में नाम शामिल होना और ससुराल में रहने वाली महिलाओं का नाम शामिल रहा। शिकायतकर्त्ता का कहना है, कि अगर 250 मतदाताओं की जांच हो जाए तो सभी अपात्र पाए जाएगें, लेकिन एसडीएम और ब्लॉक वाले मिलकर एक तो जांच पूरा नहीं किया और हाईकोर्ट में गलत हलफनामा प्रस्तुत कर दिया। कहा कि उन्हें राजकिशोर सिंह के करीबी होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कहा कि ईमानदार बीएलओ श्रीराम मौर्या को दबाव में हटाकर गांव से 15 किमी. की दूरी पर माझांकिता अव्वल के रोजगार सेवक अमरजीत को रातो रात बीएलओ बना दिया, और इस बेईमान बीएलओ ने मात्र दो घंटे में एक हजार मतदाताओं का सत्यापन कर पांडुलिपि भी एसडीएम के पास जमा कर दिया, कहा कि फर्जीवाड़ा करने के लिए ही अमरजीत को बीएलओ बनाया गया। कहा कि ऐसे बीएलओ को राष्टपति पुरस्कार देना चाहिए। एक सुपरमैन भी दो घंटे में एक हजार मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन नहीं कर देता है। पहली सितंबर 25 की दोपहर लगभग 12 बजे बीएलओ अमरजीत ज्वाइन करते हैं, और उसी दिन चार-चार बजने से पहले एक हजार मतदाताओं का न सिर्फ सत्यापन करते हैं, बल्कि उसे फीड भी करते और पांडुलिपि भी तहसील में जमा कर देते है। कहा कि इसी को आधार बनाकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर किया। कहा कि इस फर्जीवाड़ा में मुख्य भूमिका बीएलओ अमरजीत और पर्यवेक्षक एवं ग्राम पंचायत अधिकारी प्रतीक शुक्ल की रही है। बीडीओ विक्रमजोत ने भी फर्जीवाड़ा करने वालों का पूरा साथ दिया, और फर्जी रिपोर्ट को सही बताकर एसडीएम के पास भेज दिया। कहा कि जो  157 और फर्जी मतदाता है, वह दूसरे ग्राम पंचायत यानि रिक्खीपुर, इमिलिया, फूलडीह और अयोध्या गांव के निवासी है। इनमें अधिकांष प्रधान के रिष्तेदार है। कहते हैं, कि इसी फर्जी मतदाता के जरिए प्रधान का पिछला चुनाव जीते है। कि परिवार रजिस्टर की नकल और मनरेगा जांब कार्ड को आधार बनाया गया। कहा कि फर्जीवाड़े को लेकर 2021 के चुनाव में भी हाईकोर्ट गया था, लेकिन कोरोना के चलते सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। अगर यह मामला हाईकोर्ट गया है, और जिसके चलते प्रषासन को हलकान होना पड़ रहा है, दसके लिए पूरी तरह हर्रैया कें एसडीएम को जिम्मेदार माना जा रहा है। अगर इस मामले में हाईकोर्ट कोई कार्रवाई करता है, तो इसके लिए एसडीएम पूरी तरह दोषी होगें। जिस एसडीएम पर मतदाता सूची को पारदर्षी बनाने की जिम्मेदारी हैं, अगर वही एसडीएम नेताओं के दबाव में फर्जीवाड़ा करते हैं, तो ऐसे एसडीएम को सजा अवष्य मिलनी चाहिए।