राजकिशोर सिंह की छवि कोई और नहीं बल्कि इनके समर्थक ही खराब कर रहे, जो समर्थक पत्रकारों को मां-बहन की गाली देगें, दलाल कहेगा, वह पूर्व मंत्री की छवि बनाने के बजाए धूमिल कर रहे

बस्ती। चार दिन पहले प्रिंट मीडिया में ‘कैसे सपा का दागी मंत्री भाजपा का चहेता बना’ नामक शीर्षक से ‘तेज युग’ नामक अखबार में खबर प्रकाशित हुई। इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में कमेंट किए गए, 99 फीसद कमेंट में खबर की सराहना की गई, वहीं पर राजकिशोर सिंह के कुछ ऐसे समर्थक हैं, जो इनके अति करीबी और परिवार के सदस्य हैं, और वे लोग भी हैं, जो पूर्व मंत्री के लेटर पैड का दुरुपयोग कर लखनउ में ठेका पटटी का काम करते है। इनमें एक हैं, ‘प्रकाश सिंह मुन्ना’ हैं, इन्होंने सारी हदें पार करते हुए पत्रकार को यह लिखा कि ‘सोहन सिंह तुम मा...चोद.., हो’। सवाल उठ रहा है, कि क्या किसी को मां-बहन की गाली देने का अधिकार है, और वह भी सोशल मीडिया पर, जाहिर सी बात हैं, कि जो व्यक्ति किसी के मां-बहन को गाली दे सकता है, वह व्यक्ति अपनी मां-बहन की कितनी इज्जत करता होगा, इसे आसानी से समझा जा सकता है। पत्रकार चाहता तो इसी पर मुकदमा दर्ज करवा देता, लेकिन पत्रकार, ‘प्रकाश सिंह मुन्ना’ जैसा नहीं। दूसरे इनके समर्थक ‘अमित पाल’ है, जिन्होंने न तो कभी पत्रकार से मिले होगें और न देखे ही होगें, फिर भी इन्होंने लिख दिया, ‘सबसे बड़े दलाल तो आप है’। दलाल पत्रकार है, कि वह लोग जो नेताओं के यहां दलाली करते, इसका निर्णय जनता करे। इन्होंने फिर लिखा कि ‘आप पत्रकार के नाम पर एक काला धब्बा हैं,’ अब काला धब्बा कौन हैं, इनसे अधिक और कोई नहीं जानता। एक पूर्व मंत्री के समर्थक ‘कमलेश मिश्र’ हैं, जिन्होंने लिखा कि ‘किसी का नमक खाया है, तो उसे अदा करना ही पड़ेगा,’। इनका ईशारा हर्रैया के विधायक ‘अजय सिंह’ की ओर हैं, शायद इन्हें नहीं मालूम कि यह वही अजय सिंह हैं, जिन्होंने पत्रकार सोहन सिंह को फोबाइल पर कहा था, कि ‘अगर टेप नहीं कर रहे हो, तो टेप कर लो, कहा था कि मैं तुम्हें जिंदगी भर जेल में सड़वा दूंगा’ यह बात इन्होंने भ्रष्ट सचिव राजमंगल दूबे को लेकर कहा था, इन्हें लगा था कि सचिव को निलंबित हमने करवाया। जबकि पत्रकार ने सिर्फ खबर लिखा था। क्या कोई खुददार पत्रकार ऐसे विधायक का नमक खा सकता है, जो पत्रकार को जेल भेजवाने की धमकी दिया हो। यह पूर्व मंत्री के वही समर्थक हैं, जब पत्रकार ने एक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर राजकिशोर सिंह को अजय सिंह से अधिक लोकप्रिय लिखा, तब पूर्व मंत्री का कोई भी ऐसा समर्थक नहीं था, जिसने खबर की सराहना न की हो, उनमें प्रकाश सिंह मुन्ना भी थे। इन दोनों नेताओं के समर्थकों को अच्छी तरह मालूम हैं, कि कौन दलाल हैं, और कौन खाए हुए नमक को अदा कर रहा है। नेताओं के समर्थकों को शायद यह नहीं मालूम कि उनके इस तरह के कमेंट से उनके नेता को कितना नुकसान हो सकता हैं, असल में इस तरह के लोग नेताओं के समर्थक नहीं, बल्कि वे लोग होते हैं, जो कमेंट के जरिए अपनी वफादारी दिखाते हैं, और उल्लू सीधा करना चाहतें है। पत्रकारों को गाली देकर किसी नेता की छवि नहीं बन सकती, खराब अवष्य हो सकती है। मीडिया बार-बार कहती आ रही है, कि अगर किसी को खबर में कोई दिक्कत हैं, या फिर खबर से मानहानि हुई है, तो उसे एफआईआर दर्ज करवाना चाहिए, न कि किसी पत्रकार के मां-बहन को गाली देना और दलाल कहना चाहिए। असल में असली दलाल तो वे लोग होते हैं, जो नेताओं के आगे पीछे लगे रहते है। इसी तरह एक बड़े नेता ने पत्रकार को सोशल मीडिया पर ‘रंडी’ शब्द का इस्तेमाल किया था, पत्रकार चाहता तो उस नेता के खिलाफ मुकदर्मा दर्ज करवा देता, लेकिन पत्रकार ने समय का इंतजार किया, और पत्रकार को ढ़ाई साल बाद मौका मिला, तब नेताजी की ओर से ‘मिठाई’ का डिब्बा और ‘सारी’ दोनों आया। इसी लिए बार-बार कहा जाता है, कि कमेंट करने के बजाए पत्रकारों को समय का इंतजार करना चाहिए, अगर नेता है, तो पत्रकार को कभी न कभी मौका अवष्य मिलेगा। यही वह राजकिषोर सिंह हैं, जब पहली बार मंत्री बने तो एक पत्रकार के बहन की शादी में इन्होंने खबर को लेकर अपशब्दों का इस्तेमाल किया था, वह दिन और आज का दिन पत्रकार कभी भी पूर्व मंत्री से नहीं मिला। तभी पत्रकार ने कहा था, कि मंत्रीजी इतना घंमड ठीक नहीं। कई साल पहले जिस अखबार में पत्रकार काम करता था, उसके सम्पादकजी बस्ती आए हुए थे, और उन्होंने पत्रकार से कहा कि चलो चंगेरवा चलते हैं, मंत्रीजी से मिलना हैं, तब पत्रकार ने सम्मादकजी से कहा था, कि सर मैं उनके घर तक पहुंचा , दूँगा लेकिन उनसे मिलने आपके साथ नहीं जाउगंा। नेताओं की दलाली करने वाले और नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए, कि पत्रकार 40-50 साल भी पत्रकार, पत्रकार ही रहेगा।