घोटाले के आरोपी बस्ती के सहायक निदेषक रेशम को सजा के बजाए मिला मलाईदार जिला

बस्ती। जिले के प्रभारी रहे, रेशम उधोग के मंत्री राकेश सचान और उनके चहेते रिटायर डिप्टी डायरेक्टर रेशम डा. एसपी सिंह ने मिलकर घोटालेबाज बस्ती के सहायक रेशम निदेषक डा. नितेष कुमार को आरोप साबित होने के बाद दंड़ित करने के बजाए मलाईदार जिला दे दिया, जिसे जेल के भीतर होना चाहिए उसे लूटने के लिए खुला छोड़ दिया, निलंबित तक नहीं किया, जब जांच रिपोर्ट में इन्हें लाखों रुपये के गबन और दुरुपयोग करते जांच टीम ने पकड़ा, कार्रवाई करने के लिए विभागीय मंत्री और निदेषालय को रिपोर्ट भी भेजा, लेकिन कार्रवाई करने के बजाए कार्रवाई वाली पत्रावली को दबा दिया गया। जब कि यह जांच मंत्री के आदेश पर हुआ था। बस्ती के रेशम फार्म तरेता, हाथाखुर्द एवं सुरुवारकला की स्थलीय जांच हुई। डा. नितेश कुमार ने न सिर्फ बस्ती में घोटाला किया, बल्कि गोंडा में भी जमकर घोटाला किया, फिर इन्हें भी कार्रवाई करने के बजाए इन्हें विभाग और मंत्रीजी ने ईनाम स्वरुप कुशीनगर का अतिरिक्त प्रभार दे दिया। अब जरा अंदाजा लगाइए कि बस्ती के सहायक निदेषक रेशम को लाखों रुपये का दुरुपयोग करते पाया गया, और कार्रवाई करने के बजाए उसे मलाईदार जिला दे दिया जाता है। इस मामजे में बताते हैं, निदेषालय के डिप्टी डायरेक्ट डा. एसपी सिंह ने रिटायर होने से पहले मोटा लिफाफा लेकर पत्रावली को दबा दिया। बताते हैं,  िकइस मामले में एक रिटायर उत्तम प्रसाद की अहम भूमिका है। यह वही व्यक्ति हैं, जो रिटायर के बाद मंत्रीजी के साथ ही रहता है, और जितने भी गलत सही काम होते हैं, इसी के जरिए मंत्रीजी करते है। अब जरा अंदाजा लगाइए, कि जिस मंत्री के पत्र पर जांच हुई, अगर वही मंत्री रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई नहीं करते तो मंत्रीजी पर तो सवाल उठेगा ही। यह कोई पहले मंत्री नहीं हैं, जिस पर इस तरह के आरोप लगे हैं, इससे पहले न जाने कितने मंत्री और डिप्टी सीएम पर आरोपियों को बचाने के आरोप लगते रहें है। कहने का मतलब अगर भाजपा 2027 में सत्ता में नहीं आती है, तो इसके लिए योगीजी के मंत्रियों को ही जिम्मेदार माना जाएगा। पिछले लगभग पांच सालों में कोई भी ऐसे मंत्री नहीं जिनपर और जिनके विभाग कें अधिकारियों पर घोटाले सहित अन्य गंभीर न लगे हों, यही कारण है, कि आज एक भी मंत्री और उसके विभाग को भ्रष्टाचारमुक्त नहीं कहा जा सकता। रही बात योगीजी की तो इनके भीतर वह तेवर ही नहीं दिखाई दिया, जिसके लिए यह जानते और पहचानते जा रहे थें, इनके मंत्री भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार करते जा रहे हैं, और यह खामोष हैं, क्यों खामोष हैं? यह एक राज बना हुआ है। न योगीजी अपने भ्रष्ट मंत्री को हटा पा रहे हें, और आला कमान योगीजी से छुटकारा पा रही है। सबकी अपनी-अपनी मजबूरी, और इस मजबूरी का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।