निवेशकों का पैसा लूटने वाले चेयरमैन और डायरेक्ट की जगह जेल में!
-टाइम सिटी के चेयरमैन पंकज कुमार पाठक और डायरेक्टर संतोष कुमार सिंह जेल की हवा खा भी चुकें
-पाठकजी और शुक्लाजी जेल जाना कोई समाधान नहीं, बल्कि निवेशकों का पैसा कैसे मिले यह समाधान, आप दोनों ने अपने स्वार्थ के लिए निवेशकों को बीच मझंधार में छोड़ दिया
-आप दोनों अपने हिसाब से कंपनी चलाते रहें, कंपनी के पैसे का दुरुपयोग करते रहे, लेकिन क्या कभी आप दोनों ने निवेशकों के हित के बारे में कभी सोचा, अगर सोचे होते तो जेल न जाते
-यह पहली ऐसी चिट फंड कपनी हैं, जिसके पुराने और नए चेयरमॅैन सहित सभी डायरेटर्स के खिलाफ फ्राड के आरोप में मुकदमा दर्ज
-अगर पुराने चेयरमैन सीपी शुक्ल के खिलाफ गोरखपुर में तो नए चेयरमैन पंकज कुमार पाठक के खिलाफ बाराबंकी में दर्ज, नये वाले तो जेल की हवा खा चुके हैं, पुराने वाले की बाकी
-अगर पूरे मैनेजमेंट के खिलाफ फ्राड के आरोप में निवेशकों मुकदमा दर्ज कराते हैं, तो माना जाता है, फ्राड पूरे मैनेजमेंट ने मिलकर निवेशकोंके धन का दुरुपयोग किया
-भले ही चाहें दोनों चेयरमैन यह कहे, कि उनके खिलाफ पावर और मनी का इस्तेमाल करके मुकदमा दर्ज कराया गया, लेकिन दोनों अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते
-कोई कम बेईमान तो कोई अधिक बेईमान हो सकता है, लेकिन निवेशकों दोनों को चोर, बेईमान और धोखेबाज मान रहें
बस्ती। आज से लगभग 15 साल पहले कुछ पढ़े लिखे लोगों ने मिलकर टाइम सिटी रिटेल प्रोडक्ट प्रा. लि. नामक सोसायटी का पंजीकरण कपनी एक्ट 2002 के तहत कराया। जब कंपनी का गठन हुआ तो सीपी शुक्ल चेयरमैन और पंकज कुमार पाठक डायरेक्टर थे, आज पाटकजी चेयरमैन है। कंपनी पर विष्वास करके निवेशकों ने जिंदगीभर की जमापूंजी को यह सोचकर लगा दिया, कि छह साल बाद उनका पैसा दोगुना हो जाएगा और उनका अपना मकान होने का सपना पूरा हो जाएगा, लेकिन निवेशकों को क्या मालूम था, कि जिन लोगों पर वह भरोसा कर रहे हैं, एक दिन वही लोग धोखा भी दे सकते है। जिन लोगों ने निवेशकों के साथ धोखा दिया, अगर वे लोग जेल जाते हैं, तो सबसे बड़ी राहत निवेशकों को मिलती है। जैसा कि पाठकजी और संतोष कुमार सिंह को जेल जाने से मिली होगी, निवेशकों को उस समय राहत मिलेगी जब सीपी शुक्ल सहित उनके भाई जेल जाएगें। सच पूछिए तो ऐसे लोगों की जगह जेल में ही हैं, क्यों कि इनका बाहर रहना निवेशकों के लिए शुभ नहीं माना जा रहा है। पूर्व चेयरमैन एवं पूर्व भाजपा के विधायक सीपी शुक्ल और तत्कालीन डायरेक्टर एवं वर्तमान चेयरमैन पंकज कुमार पाठक आपस में लड़ रहे, निवेशकों के पैसे का दुरुपयोग कर रहें है। जितना चाहा जैसे चाहा वैसे निवेशकों के पैसे को नीजि समझ कर खर्च कर चुके/कर रहे हैं। पाठकजी और शुक्लाजी जेल जाना कोई समाधान नहीं, बल्कि निवेशकों का पैसा कैसे मिले इसका समाधान निकालना आवष्यक है। आप दोनों ने अपने स्वार्थ के लिए निवेशकों को बीच मझंधार में छोड़ दिया, कभी मिलकर समाधान निकालने का प्रयास नहीं किया, इस बात में लगे रहे कि अगर सीपी शुक्ल ने जेल भेजवाया तो हम भी उन्हें जेल भेजवाएगें, इसी का खेल हो रहा है, बाराबंकी और गोरखपुर में वर्तमान और पूर्व चेयरमैन के खिलाफ फ्राड का मुकदमा दर्ज हुआ, उसी खेल का एक पार्ट हैं।
आप दोनों अपने हिसाब से कंपनी चलाते रहें, कंपनी के पैसे का दुरुपयोग करते रहे, लेकिन क्या कभी आप दोनों ने निवेशकों के हित के बारे में सोचा, अगर सोचे होते तो जेल न जाते और न एफआईआर ही दर्ज होता। शुक्लाजी और पाठकजी आप दोनों निवेशकों के और सभ्य समाज के दुष्मन और गुनहगार माने जा रहें हैं। आप दोनों भले ही पावर और मनी का दुरुपयोग करके कानूनी दांव पेंच चल कर कुछ दिनों तक बच सकते हैं, लेकिन हमेशा के लिए बच नहीं पाएगें, आप लोगों को अपने गुनाह की सजा मिलेगी ही। आज नहीं तो कल सुवर्तो राय की तरह अवष्य मिलेगी।
देश की यह पहली ऐसी चिट फंड कपनी होगी जिसके पुराने और नए चेयरमॅैन सहित सभी डायरेटर्स के खिलाफ फ्राड के आरोप में मुकदमा दर्ज है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं, कि इन लोगों की मंशा निवेशकों के पैसे को दोगुना और जमीन देने की नहीं रही, बल्कि निवेशकों के धन को लूटने की रही। अभी तो बस्ती के निवेशकों का मुकदमा दर्ज कराना बाकी। वैसे निवेशकों इसकी तैयारी कर भी रहें है। अगर पुराने चेयरमैन सीपी शुक्ल के खिलाफ गोरखपुर में तो नए चेयरमैन पंकज कुमार पाठक के खिलाफ बाराबंकी में मुकदमा दर्ज है, नये वाले तो जेल की हवा खा चुके हैं, पुराने वाले की बारी है। अगर पूरे मैनेजमेंट के खिलाफ फ्राड के आरोप में निवेशकों मुकदमा दर्ज कराते हैं, तो माना जाता है, फ्राड पूरे मैनेजमेंट ने मिलकर किया, सभी ने मिलकर निवेशकों के धन का दुरुपयोग किया, भले ही चाहें दोनों चेयरमैन एक दूसरे पर यह आरोप लगाते रहें कि पावर और मनी का इस्तेमाल करके मुकदमा दर्ज कराया गया, लेकिन दोनों न तो अपनी जिम्मेदारी से भाग सकते और न कानून से ही छुटकारा पा सकते। निवेशकों का कहना है, कि तो दोनों बेईमान कोई कम तो कोई अधिक हो सकता है, लेकिन निवेशकों नए और पुराने मैनेजमेंट को चोर, बेईमान और धोखेबाज के आरोपी मान रहें।
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