बस्ती। मृतक भोलेनाथ गोस्वामी के भाई पप्पू गोस्वामी और भाभी, पूर्व सांसद हरीष द्विवेदी और भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र से अपील कर रहें हैं, कि भाजपा के मनोनीत सभासद रवि गुप्त की किसी भी तरह से मदद मत कीजिए, क्यों कि यह मदद के लायक नहीं, यह मेरे भाई का कथित हत्यारा हैं। हुड़वा कुवंर के बाबू साहब को जितना मदद करना हो करने दीजिए, क्यों कि ऐसे लोगों की दुकानें गांजा तस्कर दीपक चौहान और बहुरुपिया रवि गुप्त के कारण ही चलती है। अगर आप दोनों ने इसकी मदद की तो बदनामी के छीटें आप दोनों पर भी पड़ेगें, क्यों कि मेरे भाई के साथ अन्याय हुआ, भाई की आत्मा तड़प रही है। कहते हैं, कि ऐसे लोगों की मदद करने का मतलब पार्टी और खुद की छवि को खराब करने जैसा होगा, जितना भी आप दोनों को रवि गुप्त की मदद करनी थी, वह कर दिया, लेकिन अब मत कीजिएगा, क्यों कि मामला अवैध संबधों के कारण कथित हत्या का है। अगर आप दोनों को वाकई मदद करना है, तो एफआईआर दर्ज कराने में कीजिए, ताकि उसके भाई के कथित हत्या के आरोपी रवि गुप्त और भाई की पत्नी रुचि को सजा मिल सके। भाई पप्पू ने रवि गुप्त और मृतक की पत्नी रुचि पर भाई को जहर देकर मारने और पीटने का आरोप लगाते हुए हर्रैया थाने में मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी है, लेकिन मुकदमा नहीं लिखा जा रहा है।
क्षेत्र के लोग बार-बार सवाल उठा रहें हैं, कि आखिर भोलेनाथ गोस्वामी की हत्या हुई, या फिर पेट दर्द की दवा खाने से मृत्यु। इस पूरे मामले में हर्रैया पुलिस की भूमिका आरोपियों को मदद पहुंचाने वाला लग रहा है। कहा जा रहा है, कि अगर किसी व्यक्ति की मौत पेट दर्द की गोली खाने से होती है, तो अब तक न जाने कितने लोग मर गए होते, क्यों कि पेट दर्द का हर मरीज कहीं न कहीं आराम पाने के लिए या तो घर में उपलब्ध टेबलेट या फिर डाक्टर के कहने पर खाता है, और आराम भी मिलता है। पुलिस की नजर में भोलेनाथ पहले ऐसे पेट दर्द के मरीज होगें, जिनकी मौत टेबलेट खाने से हुई, इसी लिए मृतक का भाई बार-बार कह रहा है, कि मौत टेबलेट खाने से नहीं बल्कि मारने पीटने और जहर देने/खिलाने से हुई। जैसा की मृतक के भाई पप्पू ने हर्रैया थाने में दी गई तहरीर में भी मौत का कारण जहर देने और मारने पीटने से होने का दावा किया गया। सही और गलत का फैसला तब तक नहीं होगा जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगा वैसे भी एफआईआर दर्ज न हो इसके लिए एड़ीचोटी का जोर लगाया जा रहा, पानी की तरह पैसा बहाने की बातें कही जा रही है। आकाओं का सहारा लिया जा रहा है। जिस तरह मृतक के भाई और भाभी आरोप लगा रहें हैं, उससे शक की सूई रवि गुप्त और रुचि पर ही घूम-फिरकर जा रही है।
भाई का कहना है, कि अगर कोई रुचि जैसी पत्नी और रवि गुप्त जैसा व्यक्ति हो जाए तो किसी के घर की इज्जत सुरक्षित ही नहीं रहेगी। सवाल सिर्फ रवि गुप्त जैसे अन्य लोगों का नहीं बल्कि सवाल उन पतियों की खूबसूरत पत्नियों का, जिसे जब चाहे रवि गुप्त जैसे लोग पैसे के बल पर हासिल कर लेतें, क्या यही खूबसूरत पत्नियों की पहचान और चरित्र होता है, जो पैसे के लिए हम विस्तर बन जाती है। सवाल उठ रहा है, कि क्या रुचि जैसी पत्नी, पतिव्रता हो सकती है, या फिर रवि गुप्त जैसा व्यक्ति चरित्रवान हो सकता है? इसी लिए दुनिया का सबसे पाप किसी परिवार के साथ इज्जत से खेलना माना जाता है। इससे कई जिंदगियां बर्बाद होती है। सवाल उठ रहा है, कि क्या इस घटना के बाद रवि गुप्त और रुचि का संबंध पहले जैसा रहेगा, यह फिर जो हुआ, उसे भूल जाओ जैसा होगा। यह सबकुछ मृतक की पत्नी पर निर्भर करेगा, अगर इस महिला में जरा भी शर्म और हया होगी, तो पष्चाताप करेगी, और चार साल की बेटी का अच्छे ढंग से परिवरिष करेगी। रही, बात रवि गुप्त जैसे लोगों की तो इन जैसे लोगों के सुधरने की संभावना बहुत कम होती है। ऐसे लोग तभी सुधरते हैं, जब इन्हें चोट लगती है, या फिर जब कोई इनके बहु बेटियों और पत्नियों के साथ रुचि जैसी घटना को अंजाम देता है। इस तरह के लोगों के पास जब तक हराम का पैसा रहेगा, तब तक यह दूसरे की बहु बेटियों और पत्नियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते रहेंगें, और ऐसे लोगों को हुड़वा कुंवर के बाबू साहब और बसंतपुर की रुचि जैसी महिलाएं मिलती रहेंगी। औरतों को तो सुधरते हुए देखा भी गया, लेकिन मर्दो को नहीं।
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